DNA: चुनाव आयोग को सुप्रीम कोर्ट के नोटिस का विश्लेषण
DNA: चुनाव आयोग को सुप्रीम कोर्ट के नोटिस का पूरा विश्लेषण. मुख्य चुनाव आयुक्त के कामकाज, फॉर्म-6 में बदलाव और सर्वसम्मत फैसलों से जुड़े विवाद पर शीर्ष अदालत की सख्त टिप्पणी और केंद्र व चुनाव आयोग से मांगे गए जवाब की पूरी रिपोर्ट पढ़ें.
DNA मित्रो, आतंकी वारदात को लेकर कोई विवाद नहीं होना चाहिए..लेकिन ये दुर्भाग्य है कि इस पर भी राजनीति हो रही है। देश में एक और विवाद चुनाव आयोग के फ़ैसलों और मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर चल रहा है. आज इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई हुई. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग को लेकर याचिका दायर की गई थी. सुप्रीम कोर्ट ने इस पर कोई भी अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया. लेकिन ये भी स्पष्ट शब्दों में कहा कि अगर कोई फ़ैसला तीनों चुनाव आयुक्तों ने सर्वसम्मति या बहुमत से नहीं लिया था तो उसे वापस लिया जा सकता है. साथ ही फॉर्म-6 को लेकर भी सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी टिप्पणी की. सुप्रीम कोर्ट ने साफ़ किया कि उसने चुनाव आयोग के फॉर्म-6 में बदलाव को मंज़ूरी नहीं दी थी. इसके बाद अब विपक्ष को एक और मुद्दा मिल गया है.
ये देश की चुनाव प्रक्रिया और लोकतंत्र से जुड़ा मामला है. इसलिए आपको विस्तार से और बेहद बारीकी से समझना चाहिए कि आज की सुनवाई में क्या हुआ. सुप्रीम कोर्ट में क्या मांगें रखी गईं और उन पर अदालत का क्या जवाब था? अब इस मामले में आगे क्या होगा? आज की सुनवाई से किसका पक्ष मज़बूत हुआ? मित्रों, मुख्य चुनाव आयुक्त और SIR को लेकर जारी विवाद में आज सुप्रीम कोर्ट में 2 याचिकाओं पर सुनवाई हुई. इन याचिकाओं में मांग की गई थी कि मुख्य चुनाव आयुक्त के पद से ज्ञानेश कुमार को निलंबित किया जाए. साथ ही मुख्य चुनाव आयुक्त ने जो फ़ैसले अकेले लिए, उन्हें रद्द किया जाए. याचिका में ये मांग भी की गई थी कि SIR के दौरान मतदाताओं के नाम हटाने के मामलों की जांच SIT से कराई जाए. इस SIT का अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के किसी रिटायर्ड जज को बनाया जाए.
CEC को निलंबित किया तो पूरा देश जल सकता है
आपको जानना चाहिए कि आज सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता की तरफ़ से क्या दलील दी गई और उस पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा.याचिकाकर्ता की तरफ से कहा गया कि हम एक गंभीर स्थिति से निपट रहे हैं, जो हमारे लोकतंत्र की मूल नींव को कमजोर कर रही है. उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त को निलंबित करने का अंतरिम आदेश देने का अनुरोध किया. कहा गया कि ऐसा नहीं होने पर पूरा देश जल सकता है. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर मुख्य चुनाव आयुक्त को निलंबित कर दिया जाता है तो चुनाव आयोग का कामकाज रुक सकता है. ऐसी स्थिति में चुनाव कौन कराएगा?
संबंधित पक्षों को सुने बिना सुप्रीम कोर्ट कोई फैसला नहीं दे सकता
इसके बाद याचिकाकर्ता की तरफ से सुझाव दिया गया कि कोर्ट ऐसा आदेश दे सकता है कि चुनाव आयोग आगे से केवल सर्वसम्मति से या बहुमत के आधार पर ही फैसले ले. इस पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि ऐसी व्यवस्था पहले से ही क़ानून के तहत बनी हुई है. हम उम्मीद करते हैं कि चुनाव आयोग इसका पालन करेगा. अगर कोई उल्लंघन हुआ है, तो हम उस फैसले को भी पलट सकते हैं. इसके बाद याचिकाकर्ता की तरफ़ से दलील दी गई कि मुख्य चुनाव आयुक्त के एकतरफा फैसलों के कारण मतदाता सूची ही प्रभावित हो गई है. इस पर कोर्ट ने कहा कि वो संबंधित पक्षों को सुने बिना एकतरफा आदेश नहीं दे सकता. अगर रिकॉर्ड से ये पता चलता है कि कोई फैसला सर्वसम्मति या बहुमत से नहीं लिया गया था, तो कोर्ट उन फैसलों पर रोक लगा सकता है. कोर्ट ने ये उम्मीद भी जताई कि मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयोग इस मामले में स्पष्ट और पारदर्शी तरीके से जवाब देंगे. आज की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने फॉर्म-6 को लेकर भी बड़ी टिप्पणी की. उन्होंने साफ किया कि सुप्रीम कोर्ट ने फॉर्म-6 में किसी भी तरह के बदलाव को मंजूरी नहीं दी है.
क्या है फॉर्म - 6
DNA मित्रो, फॉर्म-6 वो है जिसका इस्तेमाल नए वोटर के रूप में नाम दर्ज कराने के लिए किया जाता है. इसको लेकर, पिछले दिनों एक अंग्रेज़ी अख़बार के ख़ुलासे के बाद से काफ़ी विवाद हो रहा है. अख़बार की रिपोर्ट में सामने आया था कि 2 चुनाव आयुक्तों की राय को दरकिनार करके नया फॉर्म-6 लागू किया गया था. इसके बाद चुनाव आयोग की तरफ़ से सफाई दी गई थी कि फॉर्म-6 में कोई बदलाव नहीं किया गया है. फॉर्म-6 के साथ एक घोषणा पत्र जोड़ा गया था जो एक अतिरिक्त दस्तावेज़ था. और ये फ़ैसला चुनाव आयोग ने सर्वसम्मति से लिया था. चुनाव आयोग ने 9 दिन पहले यानी 26 सितंबर को एक प्रेस रिलीज़ के ज़रिए ये भी कहा था कि फॉर्म-6 के साथ लगाए गए घोषणापत्र को सुप्रीम कोर्ट से मंज़ूरी मिली हुई है. इसी के बाद विपक्ष एक बार फिर से चुनाव आयोग पर हमलावर है.
राहुल गांधी ने फॉर्म - 6 को लेकर लगाए थे आरोप
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने फॉर्म-6 को गैर-क़ानूनी तरीक़े से बदला है. इसके बाद चुनाव आयोग की तरफ़ से इसका फैक्ट चेक करते हुए एक पोस्ट आई. चुनाव आयोग ने राहुल गांधी के दावे को भ्रामक बताया. चुनाव आयोग ने कहा कि बिहार में SIR के लिए 24 जून 2025 को आयोग ने सर्वसम्मति से आदेश जारी किया था. सर्वोच्च न्यायालय ने 27 मई 2026 के अपने फ़ैसले में इस आदेश को बरकरार रखा है. चुनाव आयोग ने फिर दोहराया कि SIR के लिए फॉर्म-6 के साथ जुड़ी घोषणा को सुप्रीम कोर्ट ने सही ठहराया है. यानी चुनाव आयोग का कहना है कि मूल फॉर्म-6 में कोई बदलाव नहीं हुआ है. उसके साथ एक घोषणा पत्र जोड़ा गया है जिसे मंज़ूरी मिली थी. लेकिन इसके बाद भी कांग्रेस अपने आरोपों पर कायम है.
सुप्रीम कोर्ट ने फॉर्म -6 में बदलाव को मंजूरी नहीं दी
कुल मिलाकर आज की सुनवाई की बड़ी बातें ये हैं कि फॉर्म-6 में बदलाव को सुप्रीम कोर्ट ने मंज़ूरी नहीं दी है. सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त को निलंबित करने से इनकार कर दिया क्योंकि इससे चुनाव आयोग का काम-काज प्रभावित हो सकता है. हालांकि, कोर्ट इन आरोपों की समीक्षा जरूर करेगा कि क्या मुख्य चुनाव आयुक्त ने बाकी चुनाव आयुक्तों की राय को दरकिनार कर एकतरफा फैसले तो नहीं लिए हैं. ज़रूरत पड़ी तो उन फ़ैसलों को रद्द किया जा सकता है और कोर्ट ने कहा कि केवल मीडिया में आई ख़बरों के आधार पर आदेश नहीं दिया जा सकता. संबंधित पक्षों को सुनना ज़रूरी है. अब सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त और केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. जवाब मिलने के बाद अब इस मामले में अगली सुनवाई होगी. बीजेपी ने सुप्रीम कोर्ट में आज की सुनवाई को न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा बताया.
सुप्रीम कोर्ट के पास CEC को सस्पेंड करने की ताकत नहीं
यहां ये जानना भी ज़रूरी है कि संविधान में सुप्रीम कोर्ट को ऐसी कोई शक्ति नहीं दी गई है जिसके तहत मुख्य चुनाव आयुक्त को सस्पेंड किया जा सकता है. उन्हें हटाने का अधिकार सिर्फ़ संसद को है और ये प्रक्रिया ठीक उसी तरह है जैसे सुप्रीम कोर्ट के किसी जज को हटाया जाता है. यानी संसद में महाभियोग के द्वारा. लेकिन आयोग के फ़ैसलों की जांच कोर्ट कर सकता है. अगर कोई निर्णय क़ानून के विरुद्ध पाया जाता है तो सुप्रीम कोर्ट उस पर रोक लगा सकता है या उसे रद्द कर सकता है. आज सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई ऐसे समय में हुई जब विपक्षी INDIA गठबंधन देश भर में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहा है. कल INDIA गठबंधन के सांसद पहले से तय कार्यक्रम के तहत चुनाव आयोग तक मार्च निकालने वाले हैं. विपक्षी दलों के सांसद कल सुबह 10.30 बजे संसद के मकर द्वार पर इकट्ठा होंगे और उसके बाद 11 बजे से मार्च शुरू होगा.
कांग्रेस की CEC के खिलाफ आंदोलन की रणनीति
कांग्रेस ने आज एक बार फिर मुख्य चुनाव आयुक्त के ख़िलाफ़ आंदोलन की रणनीति बनाई. इसके बाद प्रदर्शन के दूसरे और तीसरे चरण का एलान किया गया.दूसरे चरण का अभियान 10 अक्टूबर से 20 अक्टूबर के बीच चलाया जाएगा. इस दौरान ब्लॉक स्तर पर बाइक रैली, पदयात्रा और साइकिल रैली आयोजित की जाएंगी. वहीं तीसरे चरण का अभियान 25 अक्टूबर से 25 नवंबर तक चलेगा, फिर 26 नवंबर को संविधान दिवस पर देश के अलग-अलग हिस्सों से 6 बड़ी यात्राएं निकाली जाएंगी. यानी चुनाव आयोग के ख़िलाफ़ प्रदर्शन को कांग्रेस जन आंदोलन में बदलने की तैयारी में जुट गई है. इसकी एक वजह ये भी है कि 10 अक्टूबर को आम जनता पार्टी ने दिल्ली के जंतर मंतर पर आंदोलन करने का एलान किया है. यानी आने वाले दिनों में ज्ञानेश कुमार के मुद्दे पर कांग्रेस और AJP का अलग-अलग मोर्चा चलता रहेगा.