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एक कप चाय की कीमत क्या हो सकती है... 10 रुपये, 20 रुपये या किसी फाइव स्टार होटल में 200-300 रुपये? लेकिन मध्य प्रदेश की सरकारी बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी ने तो सारे रिकॉर्ड ही तोड़ दिए. यहाँ दीक्षांत समारोह के नाम पर वीवीआईपी मेहमानों को 590 रुपये की आधी कप काली चाय पिलाई गई. आरटीआई से सामने आए इस चौंकाने वाले खुलासे ने यूनिवर्सिटी प्रशासन में मची कथित बजट की खुली लूट की पोल खोलकर रख दी है. आज के DNA में हम इस घोटाले को डिकोड कर रहे हैं.
डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन का मानना था कि "विश्वविद्यालयों को केवल ज्ञान का भंडार नहीं होना चाहिए, बल्कि उन्हें एक ऐसी पवित्र जगह होना चाहिए जहां मानव की आत्मा और बुद्धि को सही दिशा मिले." इसी मूल उद्देश्य के साथ 1970 में उस भोपाल विश्वविद्यालय की स्थापना की गई थी, जो अब बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के नाम से जाना जाता है.
उस यूनिवर्सिटी में छात्रों की बुद्धि को सही दिशा देने के नाम पर जो पैसे मिलते हैं, उसकी लूट हो रही है. यूनिवर्सिटी का मैनेजमेंट पढ़ाई के नाम पर मिलने वाले बजट को लूट रहा है. हमारे हाथ में एक दस्तावेज़ है, जो उस लूट का साक्ष्य है, जिसमें दर्ज है कि यूनिवर्सिटी के एक कार्यक्रम में 10-10 रुपये की चाय पांच-पांच सौ रुपये में पिलाई गई.
समझ रहे हैं? पांच सौ की एक चाय, वो भी आधी कप. यानी इस सरकारी यूनिवर्सिटी ने तो महंगे-महंगे फाइव स्टार होटलों को भी पीछे छोड़ दिया, क्योंकि इतनी महंगी चाय तो 5 स्टार होटल में भी नहीं मिलेगी. बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी में सिर्फ एक आयोजन के लिए 4 लाख 47 हज़ार दो सौ साठ रुपये का बिल मंजूर कर दिया गया.
साल 2023 में बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी में एक दीक्षांत समारोह हुआ था. कायदे से कार्यक्रम यूनिवर्सिटी के अपने ऑडिटोरियम में होना चाहिए, लेकिन उसके बदले यह कार्यक्रम कुशाभाऊ ठाकरे हॉल में करवाया गया. उस कार्यक्रम में जो खर्च हुआ, वो चौंकाने वाला है.
यह बात हैरान करने वाली तब और हो जाती है जब यूनिवर्सिटी के पास अपना ऑडिटोरियम है. उसे विज्ञान भवन कहते हैं, इसे 2 करोड़ रुपये खर्च करके हाईटेक बनाया गया है. इसमें भोपाल के बड़े-बड़े कार्यक्रम होते हैं. महज 25 हज़ार रुपये के किराए पर अपना विज्ञान भवन ऑडिटोरियम यह यूनिवर्सिटी दूसरों को देती है, लेकिन खुद करीब ढाई लाख रुपये खर्च करके बाहर कार्यक्रम किया.
एक RTI से मिली जानकारी की पड़ताल के लिए ज़ी न्यूज़ के संवाददाता यूनिवर्सिटी कैंपस पहुंचे तो वहां उनकी मुलाकात उस RTI कार्यकर्ता धर्मेंद्र सिंह से हुई, जिन्होंने यह कच्चा चिट्ठा निकाला है. वह दस्तावेज़, जिसमें दर्ज है कि जिस चाय के लिए 590 रुपये खर्च किए गए, वो काली चाय थी और वो भी आधी कप. वह चाय भी असिस्टेंट रजिस्ट्रार को अपना परिचय देने के बाद दी गई थी. उन्होंने बताया कि किस तरह असिस्टेंट रजिस्ट्रार ने भी 590 रुपये की आधी कप चाय पर आपत्ति जताई थी.
अपना ऑडिटोरियम छोड़कर यूनिवर्सिटी प्रशासन करीब 9 किलोमीटर दूर कार्यक्रम करने गया था, लिहाजा हमारी टीम उस ऑडिटोरियम को देखने भी पहुंची, जहां एक कार्यक्रम के लिए तैयारी चल रही थी. वहां पता चला कि जिस यूनिवर्सिटी के अधिकारी 590 रुपये की आधी कप चाय पीते हैं, वहां कैंटीन में सिर्फ 10 रुपये में चाय मिलती है. यह भले ही पुराना मामला कहकर अपना पल्ला झाड़ रहे हों, लेकिन सच्चाई यह है कि ऐसा कार्यक्रम हर साल हो रहा है. 2023 के बाद 2024, 2025, 2026 हर साल हुआ है.