क्या आप भी चर्बी पिघलाने वाले इंजेक्शन ले रहे? छिन सकती है आंखों की रोशनी, US से आई चेतावनी से भारत में क्यों बढ़ी चिंता
Weight-Loss Drugs News: क्या आप भी चर्बी पिघलाने वाले इंजेक्शन ले रहे हैं? अगर ऐसा है तो आपकी आंखों की रोशनी भी छिन सकती है. US से आई चेतावनी से भारत में चिंता क्यों बढ़ रही है.
Side Effects of Weight-Loss Drugs: हमारे देश में 25 करोड़ से ज्यादा लोग मोटापे का शिकार हैं. इनमें से एक बड़ी आबादी पतला होने के लिए एक विशेष दवा का इस्तेमाल करती है. ऐसे लोगों के लिए खतरे की घंटी है. अमेरिका में मोटापा कम करने वाली वही दवा लोगों की आंखों की रोशनी छीन रही है. जो लोग बिना मेहनत के चर्बी गायब करने के लिए इंजेक्शन का इस्तेमाल कर रहे थे, उन्होंने दवा बनाने वाली दिग्गज कंपनियों पर केस दर्ज करवाया है. ये उन भारतीयों के लिए भी डरावना है, जो इसका प्रयोग करते हैं.
स्वामी विवेकानंद का मानना था कि बीमार शरीर को नया जीवन देने वाली सही औषधि साक्षात ईश्वर की कृपा और अमृत की तरह है, जो मनुष्य को दोबारा कर्म करने के योग्य बनाती है. लेकिन कुछ दवाइयाँ ऐसी होती हैं, जो एक बीमारी को ठीक करने के बदले दूसरी गंभीर बीमारी दे जाती हैं.
मोटापे की दवा से चली गई रोशनी
अमेरिका की पेंसिल्वेनिया की ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट फेडरल कोर्ट में सैकड़ों शिकायतें दर्ज की गई हैं, जिसमें कहा गया है कि GLP-1 ड्रग्स लेने के बाद उनकी आंखों की रोशनी चली गई है. GLP-1 दवाओं के एक पूरे ग्रुप का नाम है, जिसमें ओज़ेम्पिक, वेगोवी, मौनजारो, जेपबाउंड, रिबेल्सस, विक्टोज़ा और सैक्सेंडा जैसी दवाइयां आती हैं.
सामान्यतः दो तरह के लोग GLP-1 ग्रुप की दवाओं का इस्तेमाल करते हैं. एक, वे लोग जो मोटापे का शिकार हैं और बिना मेहनत किए पतला होना चाहते हैं और दूसरे, वे लोग जिन्हें डायबिटीज है.
खतरे के बारे में पहले से चेतावनी न देने का आरोप
ऐसे ही लोगों ने अमेरिका में इन दवाओं का इस्तेमाल किया और फिर उन्होंने अदालत में आंखों की रोशनी जाने की शिकायत दर्ज करवाई. शिकायत दर्ज कराने वाले मरीजों ने दवा बनाने वाली दिग्गज कंपनियों पर केस किया है.
मरीजों का सीधा आरोप है कि उन्हें इस भयानक खतरे के बारे में पहले से कोई चेतावनी नहीं दी गई थी, जबकि कंपनियों को इस खतरे का अंदाजा था. फिर भी उन्होंने डिब्बे पर या पर्चे में सही ढंग से वॉर्निंग नहीं छापी.
कंपनी के खिलाफ 216 केस पैंडिंग
लोगों को जो बीमारी हुई है, उसका नाम है NAION यानी नॉन-आर्टेरिटिक एंटीरियर इस्केमिक ऑप्टिक न्यूरोपैथी. आम बोलचाल में कहें तो यह आंखों का एक तरह का स्ट्रोक है. इसमें आंख की मुख्य नस यानी ऑप्टिक नर्व तक खून की सप्लाई अचानक रुक जाती है. नतीजा यह होता है कि इंसान की एक आंख की रोशनी अचानक और हमेशा के लिए चली जाती है.
दवा बनाने वाली कंपनियों ने आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. उनका कहना है कि सारे आरोप बेबुनियाद हैं. हालांकि, कंपनी की सफाई के बावजूद वहां पर अभी भी अदालत में 216 केस पेंडिंग हैं और इन पर सुनवाई होनी है.
जिस सेमाग्लूटाइड ने दुनियाभर में वेट लॉस रिवॉल्यूशन पैदा किया, वही अब सवालों के घेरे में है. वैसे तो GLP-1 ड्रग्स का सबसे बड़ा मार्केट इस वक्त अमेरिका में है, लेकिन भारत में भी लोग इसका इस्तेमाल करते हैं.
भारत में 13 करोड़ लोग डायबिटीज से पीड़ित
भारत में करीब 13 करोड़ लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं और 25 करोड़ से अधिक लोग मोटापे के शिकार हैं. कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के अनुमान के अनुसार, भारत में पौने तीन लाख लोग GLP-1 ड्रग्स का इस्तेमाल कर रहे हैं. भारत में GLP-1 ड्रग्स का मार्केट लगभग 1,900 करोड़ रुपये का है.
भारत में डॉक्टर GLP-1 ड्रग्स प्रिस्क्राइब करते हैं. डॉक्टर मरीजों को GLP-1 ग्रुप की दवा लेने के लिए कहते हैं. इसलिए हमने इसको लेकर डॉक्टर से बात की. उन्होंने जो बताया है, उसे बहुत ही ध्यान से जानिएगा क्योंकि उन्होंने GLP-1 ग्रुप की दवा से होने वाली बीमारी के बारे में भी बताया है. उन्होंने ये भी बताया है कि इस दवा के कारण किन लोगों को और किस हालात में आई स्ट्रोक का खतरा होता है.
दवा का इस्तेमाल करते हुए सजगता की जरूरत
वरिष्ठ एंडोक्राइनोलॉजिस्ट ने डॉ. अशोक झिंगन ने स्पष्ट रूप से बताया कि GLP-1 से खतरा है, लेकिन खतरे का रेशियो कम है. इसलिए इस दवा का इस्तेमाल करते हुए अतिरिक्त सतर्कता की आवश्यकता है. वैसे, किसी भी दवा का इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह से ही करना चाहिए. क्योंकि मोटापा कम करने वाली दवा आंख की रोशनी छीन रही है, तो दर्द कम करने वाली दवा किडनी खराब कर रही है.
देश में बिकने वाली सभी दवाइयों, टीकों और मेडिकल उपकरणों की सुरक्षा और गुणवत्ता की जांच करने वाली संस्था केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन CDSCO ने कहा है कि डॉक्टर की सलाह लिए बगैर बार-बार या लंबे समय तक पेनकिलर्स खाने से क्रोनिक किडनी डिजीज और किडनी खराब होने का गंभीर खतरा बढ़ जाता है.
डॉक्टर की सलाह के बिना न लें दवाएं
रिपोर्ट के मुताबिक, देश में तकरीबन 50 से 70 प्रतिशत लोग कभी न कभी बिना डॉक्टर की सलाह के सिरदर्द, बदन दर्द या घुटनों के दर्द के लिए सीधे मेडिकल स्टोर से पेनकिलर खरीदकर खाते हैं. भारत में दर्द निवारक दवाओं का बाजार 16 हजार करोड़ रुपये का हो चुका है. इससे अंदाजा लगा सकते हैं कि स्थिति कितनी खतरनाक है.
इसलिए कहा गया है कि दवाएं दोधारी तलवार की तरह होती हैं. जब इन्हें बिना डॉक्टर के मार्गदर्शन के लिया जाता है, तो ये बीमारी को ठीक करने के बजाय शरीर के स्वस्थ अंगों को नष्ट करने लगती हैं. केवल योग्य चिकित्सक ही दवा को अमृत बना सकता है.