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India-Japan Air Combat Exercise: भारतीय सेना जमीन से लेकर आसमान तक अपनी सामरिक शक्ति को लगातार अभेद्य बना रही है. इसी रणनीतिक मकसद के लिए भारत, अमेरिका और जापान जैसे शक्तिशाली देशों के साथ संयुक्त युद्धाभ्यास कर रहा है. भारत और अमेरिका की सेना के बीच उत्तराखंड के औली के जंगलों में वॉर एक्सरसाइज चल रही है. युद्धाभ्यास के दौरान सैनिक घने जंगलों में छिपे दुश्मनों को ढूंढने, इंडोर फायरिंग और चट्टानों पर रैपलिंग करने जैसी घातक तकनीकों को निखार रहे हैं.
दूसरी तरफ, राजस्थान में भारत और जापान की वायुसेना एक-दूसरे से अपना अनुभव साझा कर रही हैं. जापान के एयर फोर्स चीफ ने जोधपुर एयर फोर्स स्टेशन पर उड़ान भरी और ये उड़ान स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस में भरी गई. ये कोई सामान्य उड़ान नहीं है. जापान और भारत के बीच बढ़ते सैन्य सहयोग का नया प्रमाण है. तेजस में इस संयुक्त उड़ान का अर्थ क्या है, इसे अब हम डिकोड करेंगे.
राजस्थान के जोधपुर में 'वीर गार्जियन-2026' के नाम से भारत और जापान के बीच एक बेहद महत्वपूर्ण और रणनीतिक हवाई युद्धाभ्यास चल रहा है. इस अभ्यास की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इतिहास में पहली बार जापान के लड़ाकू विमान भारतीय धरती पर किसी द्विपक्षीय अभ्यास में हिस्सा लेने आए हैं. जापान एयर सेल्फ-डिफेंस फोर्स ने इस अभ्यास के लिए अपने F-2A लड़ाकू विमानों की एक टुकड़ी को भारत भेजा है. तो भारतीय वायुसेना इस अभ्यास में अपने स्वदेशी तेजस, सुखोई-30 MKI और राफेल जैसे फ्रंटलाइन के लड़ाकू विमानों के साथ हिस्सा ले रही है. 9 सितंबर से शुरू हुआ ये युद्धाभ्यास 22 सितंबर तक चलेगा.
14 दिनों के इस वॉर एक्सरसाइज का सबसे महत्वपूर्ण क्षण तब आया, जब भारतीय वायुसेना के प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह और जापान के एयर चीफ जनरल ताकेहिरो मोरिता ने तेजस में उड़ान भरी. हालांकि, दोनों ने अलग-अलग उड़ानें भरीं. भारतीय वायुसेना प्रमुख एपी सिंह ने अकेले तेजस उड़ाते हुए फॉर्मेशन का नेतृत्व किया. जब एक से अधिक लड़ाकू विमान हवा में एक निश्चित दूरी, गति और एक तय शेप बनाकर एक साथ उड़ान भरते हैं, तो उसे 'फॉर्मेशन फ्लाइंग' कहा जाता है.
जापानी एयर चीफ ने ग्रुप कैप्टन आई. सम्राट के साथ तेजस के टू-सीटर ट्रेनर विमान में उड़ान भरी. तेजस पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से विकसित एक 4.5 जनरेशन का लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट है. यह हवा से हवा में कॉम्बैट, आक्रामक हवाई सहायता, जमीनी हमले और समुद्री ऑपरेशंस को बखूबी अंजाम दे सकता है. यह दुश्मन के रडार को चकमा देने और क्लोज कॉम्बैट में बहुत माहिर है.
जनरल मोरिता भारत के इस स्वदेशी लड़ाकू विमान को उड़ाने वाले पहले एशियाई वायुसेना प्रमुख बन गए हैं. जापानी एयर चीफ जनरल मोरिता का तेजस उड़ाना कोई सामान्य घटना नहीं है, इसके गहरे कूटनीतिक और सैन्य मायने हैं.
जापान जैसे अत्यधिक हाई-टेक देश के सैन्य प्रमुख का तेजस उड़ाना भारतीय विमान की युद्ध क्षमता, सुरक्षा और आधुनिक तकनीक पर अंतरराष्ट्रीय स्तर के गहरे भरोसे को दिखाता है. जनरल मोरिता ने खुद तेजस को भारत के 'टेक्नोलॉजिकल इनोवेशन' और 'मेक इन इंडिया' पहल का एक उत्कृष्ट प्रतीक बताया है.
जब जापान जैसा तकनीकी रूप से समृद्ध देश तेजस की तारीफ करता है, तो इससे तेजस और अन्य भारतीय रक्षा उपकरणों की ब्रांड वैल्यू दुनिया में बहुत बढ़ जाती है. यह भविष्य में अन्य देशों को तेजस निर्यात करने का रास्ता आसान करेगा. ब्राजील, इजिप्ट, अर्जेंटीना और फिलीपींस जैसे देशों के साथ पहले से तेजस को लेकर बातचीत चल रही है. उस लिहाज से इसके संकेत सकारात्मक हैं.
जापान दूसरे विश्वयुद्ध के बाद ऐतिहासिक रूप से एक शांतिप्रिय देश रहा है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में चीन के आक्रामक रवैये और उत्तर कोरिया के खतरों को देखते हुए वह तेजी से अपनी सैन्य क्षमता और बजट बढ़ा रहा है.
भारत और जापान क्वाड समूह के सदस्य भी हैं. पहली बार जापान के F-2 लड़ाकू विमानों ने भारतीय धरती से उड़ान भरी है. इसका मतलब है कि किसी बड़े संकट के समय दोनों देश एक-दूसरे के सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल करने के लिए भी तैयार हो रहे हैं. भारत और जापान का एक साथ आना कैसे महत्वपूर्ण है, इसे भी समझिए.
भारत-जापान की 'तेजस उड़ान' का 'गगनचुंबी' विश्लेषण, भारत-जापान की मित्रता का 'वायु परीक्षण' कैसा रहा?
— Zee News (@ZeeNews) September 21, 2026
जापानी वायुसेना दुनिया की सबसे आधुनिक सेनाओं में से एक है. उनके साथ युद्धाभ्यास करने से भारतीय पायलटों को नई युद्ध तकनीकों, जापानी F-2 विमानों की कार्यप्रणाली और आधुनिक रणनीतियों को समझने का मौका मिलता है.
दूसरा अहम फैक्टर चीन है. चीन पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपना दबदबा बनाना चाहता है. भारत और जापान दोनों ही चीन की इस विस्तारवादी नीति से सीधे प्रभावित हैं. दोनों का एक साथ आना चीन के आक्रामक रुख को नियंत्रित करने के लिए जरूरी है.
अगर चीन भारत के साथ लद्दाख या वास्तविक नियंत्रण रेखा पर तनाव बढ़ाता है, तो जापान के साथ भारत की नजदीकी चीन पर पूर्वी चीन सागर की तरफ से भी रणनीतिक दबाव बनाए रखेगी.
जाहिर है कि दोनों देशों के एयर चीफ का तेजस में उड़ान भरना साफ संकेत है कि भारत और जापान की सेनाओं के बीच आपसी तालमेल बहुत ऊंचे स्तर पर पहुंच चुका है. भविष्य में ये काफी उपयोगी साबित होने वाला है. विशेषकर भारतीय दृष्टिकोण से, ये एक तरफ जहां व्यापारिक लिहाज से महत्वपूर्ण है. वहीं पड़ोसी देश की विस्तारवादी नीति के विरुद्ध भी निर्णायक हो सकता है.