जिस पुतिन को ट्रंप ने बताया था 'दिमागी विक्षिप्त', उसी के बर्थडे पर दे दिया सबसे बड़ा गिफ्ट! रूस से डीजल खरीदने के पीछे क्या है पूरा खेल?
अमेरिका में बढ़ते डीजल संकट के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से डीजल खरीदने का फैसला किया है. पुतिन के जन्मदिन के बाद हुई इस डील को बर्थडे गिफ्ट कहा जा रहा है. इससे रूस की कमाई बढ़ेगी और यूक्रेन युद्ध में जेलेंस्की की मुश्किलें बढ़ सकती हैं.
प्रदर्शन के बाद अब हम उस एक्शन का विश्लेषण करने जा रहे हैं, जिसने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है. ये एक्शन लिया है अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने और इस कदम के बाद दुनिया कहने लगी है कि डोनाल्ड ट्रंप ने अपने धुर विरोधी रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को बर्थडे गिफ्ट दे दिया है. इस विश्लेषण को समझने के लिए आपको सबसे पहले ट्रंप के एक्शन को समझना चाहिए.
ट्रंप ने रूस से डीजल खरीदने का फैसला किया
ट्रंप ने कहा है कि उन्होंने पुतिन के साथ फोन पर बात की थी. इस फोन कॉल के बाद अमेरिका ने रूस से डीजल खरीदने का फैसला किया है. डीजल की सप्लाई के लिए अमेरिका ने रूस को अप्रैल 2027 तक के लिए लाइसेंस भी दे दिया है.
इस डील के तहत अक्टूबर में रूस से अमेरिका को तकरीबन 36 करोड़ लीटर डीजल मिलेगा. अगले महीने यानी नवंबर में रूस लगभग 59 करोड़ लीटर डीजल सप्लाई करेगा. दिसंबर में ये आंकड़ा बढ़कर तकरीबन 118 करोड़ लीटर तक पहुंचेगा. अगले साल के पहले महीने यानी जनवरी 2027 में अमेरिका को 353 करोड़ लीटर डीजल मिलेगा. यानी अगले 4 महीनों में अमेरिका को रूस से 550 करोड़ लीटर से ज्यादा डीजल मिलेगा.
पुतिन के जन्मदिन पर ट्रंप का बड़ा फैसला
7 अक्टूबर को पुतिन का बर्थडे था और 10 अक्टूबर को ट्रंप की डीजल वाली डील की खबर सामने आ गई. इसी वजह से दुनिया इस डील को पुतिन का बर्थडे गिफ्ट कह रही है. ये वही डोनाल्ड ट्रंप हैं जिन्होंने पुतिन को दिमागी रूप से विक्षिप्त इंसान करार दिया था. ये वही ट्रंप हैं जिन्होंने रूस से तेल खरीदने पर भारत को 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की धमकी दी थी और आज देखिए, वही डोनाल्ड ट्रंप खुद रूस के साथ डीजल की डील कर बैठे हैं.
ट्रंप ने किस तरह पुतिन की तारीफ करते हुए अपनी पीठ थपथपाई है, ये भी समझना जरूरी है.
हिंदी की एक कहावत है - अपना उल्लू सीधा करना. इसका मतलब है कि जरूरत के वक्त किसी भी हथकंडे को अपनाया जाता है. ट्रंप ने भी यही किया है. आखिर ट्रंप की जरूरत कहां फंसी थी. अब हम आपको इससे जुड़ी जानकारी देने जा रहे हैं.
अमेरिका में गहराता डीजल संकट
अमेरिका में डीजल की कीमत तकरीबन 157 रुपए प्रति लीटर पहुंच गई है. पिछले 8 महीनों की बात करें तो डीजल के दाम 70 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं. इसके साथ ही अमेरिका में डीजल का रिजर्व भी तेजी से कम हो गया है. सितंबर और अक्टूबर में आए डाटा के अनुसार, अमेरिका के पास सिर्फ 1590 करोड़ लीटर डीजल बच गया है.
अगर अमेरिका की बात करें तो आमतौर पर अमेरिकी नागरिक इतना डीजल एक ही महीने में इस्तेमाल कर देते हैं. वर्ष 2003 के बाद पहली बार ऐसी स्थिति आई है कि अमेरिका के पास एक महीने का रिजर्व डीजल ही बचा है.
डीजल संकट के लिए ट्रंप की नीतियां जिम्मेदार
अमेरिका के डीजल संकट के लिए कोई और जिम्मेदार नहीं है, इसके जिम्मेदार खुद ट्रंप हैं. ट्रंप के आदेश पर ही ईरान का युद्ध शुरू हुआ था. युद्ध की वजह से ही होर्मुज का रास्ता बंद हुआ और दुनिया भर में तेल की सप्लाई प्रभावित हो गई. एक वक्त था जब अमेरिका डीजल का एक्सपोर्ट यानी निर्यात करता था, लेकिन ट्रंप के एक फैसले की वजह से आज अमेरिका को रूस तक से डीजल खरीदना पड़ रहा है.
मध्यावधि चुनाव से पहले ट्रंप का मास्टर स्ट्रोक
अमेरिका में अगले ही महीने मध्यावधि चुनाव है. जाहिर है, डीजल की कमी से जूझती जनता को राहत देना ट्रंप की मजबूरी थी, लेकिन मजबूरी में भी ट्रंप ने एक ऐसा मास्टर स्ट्रोक खेला है, जिसने यूक्रेन और यूक्रेनी राष्ट्रपति वोल्दोमिर जेलेंस्की की टेंशन बढ़ा दी है.
पिछले 2 वर्ष के दौरान ट्रंप सात बार सार्वजनिक रूप से जेलेंस्की को युद्ध खत्म करने के लिए कह चुके हैं, लेकिन यूरोपियन यूनियन के दम पर लड़ने वाले जेलेंस्की ने अब तक युद्ध खत्म नहीं किया. अब ट्रंप ने यूक्रेन के विरोधी रूस की तिजोरी भरनी शुरू कर दी है, जिसका सीधा असर यूक्रेन और रूस के युद्ध पर पड़ेगा.
रूस के लिए डीजल डील क्यों फायदेमंद है
डीजल वाली डील पुतिन की मदद किस तरह करेगी, इसे समझने के लिए प्रसिद्ध थिंक टैंक CSIS यानी सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज के एक आकलन को समझना जरूरी है.
CSIS के आकलन में कहा गया है कि अमेरिका को डीजल बेचने से रूस को सिर्फ चार महीनों के अंदर 35 हजार करोड़ रुपए का फायदा होगा. रूस के पास निर्यात के लिए डीजल बड़ी मात्रा में मौजूद है. पिछले 6 महीनों से ये रिजर्व लगातार जमा हो रहा है. अब अमेरिका को डीजल बेचकर रूस, डीजल की नई खेप का उत्पादन कर पाएगा. अमेरिकी और यूरोपियन बाजारों में डीजल के दाम ज्यादा कम नहीं होंगे, लेकिन रूस के लिए ये फायदे का बड़ा सौदा साबित होगा.
रूस की तिजोरी भरी तो बढ़ेगी वॉर मशीनरी
जाहिर है पुतिन की तिजोरी भरेगी तो उसका इस्तेमाल यूक्रेन युद्ध में भी किया जाएगा. रूस के पास हथियार बनाने की फैक्ट्रियां पहले से मौजूद हैं. अब पैसे से कच्चा माल खरीदकर दोबारा हथियारों का निर्माण शुरू होगा और यूक्रेन के लिए स्थितियां नाजुक हो जाएंगी.
यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की भी इस तथ्य को समझते हैं. इसी वजह से डीजल डील की खबर आते ही जेलेंस्की ने सोशल मीडिया पर एक तंज भरा पोस्ट किया है.
इस पोस्ट में लिखा है - अमेरिका ने रूस के डीजल पर से प्रतिबंध हटा दिया है. इस कदम के जवाब में पुतिन ने जैपोरीजिया पर बमबारी करके शुक्रिया कहा है. इस बमबारी में बुजुर्ग और बच्चे मारे गए हैं. अमेरिका के जरिए बातचीत सिर्फ एक पर्दा था. इस पर्दे के पीछे पुतिन ने हमलों की स्क्रिप्ट लिखी है, लेकिन हम रूस के आगे झुकेंगे नहीं.
यूक्रेन की सैन्य रणनीति पर भी असर
जेलेंस्की को बखूबी पता है कि अमेरिका से आने वाला पैसा रूस की वॉर मशीनरी की फंडिंग करेगा. इसके साथ ही यूक्रेन के महत्वाकांक्षी सैन्य प्लान पर भी पूर्णविराम लग जाएगा. पिछले तकरीबन 1 साल से यूक्रेन लगातार रूस की रिफाइनरी पर हमले कर रहा है. अब अमेरिकी डीजल के इस स्रोत पर भी हमले करना मुश्किल हो जाएगा.
यानी रूस को पैसे के साथ ही साथ डीजल की सिक्योरिटी से जुड़ी गारंटी भी मिल जाएगी. जेलेंस्की की ये चिंता उस वक्त साफ-साफ दिखी, जब जर्मनी में अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने उनसे बातचीत की.
चाणक्य की नीति और ट्रंप-जेलेंस्की संबंध
अर्थशास्त्र में आचार्य चाणक्य ने लिखा है, अपने से अधिक शक्तिशाली राष्ट्र या राजा के प्रति हमेशा अनुकूल व्यवहार रखना चाहिए. यदि आप अपने किसी मजबूत सहयोगी को कारणवश नाराज करते हैं, तो युद्ध जैसी स्थितियों में आपका नुकसान निश्चित है.
डोनाल्ड ट्रंप का एक अधूरा सपना है, नोबल पीस प्राइज. ट्रंप को हमेशा लगता रहा कि वो यूक्रेन का युद्ध खत्म कराएंगे और नोबल प्राइज उनकी झोली में आ गिरेगा, लेकिन जेलेंस्की ने ये होने नहीं दिया. इसी का नतीजा हुआ कि ट्रंप निराश हुए और अब इस निराशा का नुकसान जेलेंस्की को भरना पड़ेगा.
ट्रंप का नया फैसला और इंटरनेशनल कोर्ट पर प्रतिबंध
शांति का नोबल पाने का सपना फिर से टूटने के बाद ट्रंप आउट ऑफ कंट्रोल हो गए हैं. इस बार उन्होंने इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस को ही बैन कर दिया है.
ट्रंप सरकार ने इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस को प्रतिबंधित संगठन घोषित कर दिया है. अब इंटरनेशनल कोर्ट के साथ कोई भी अमेरिकी संस्था कोई भी रिश्ता नहीं रख पाएगी. ट्रंप सरकार ने कोर्ट को 6 महीने का वक्त दिया है. अगर 6 महीनों के अंदर कोर्ट ने सफाई पेश नहीं की तो प्रतिबंधों को परमानेंट यानी स्थायी कर दिया जाएगा.
दुनिया में कहा जाता है कि ट्रंप के मूड और फैसले, मौसम से भी पहले बदल जाते हैं. इंटरनेशनल कोर्ट पर प्रतिबंध लगाकर ट्रंप ने एक बार फिर इस कथन को सच साबित कर दिया है.