'सच्चाई की जीत हुई', जामिया में 18 दिन की भूख हड़ताल के बाद क्या बोले छात्र?
जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में चल रहा छात्रों का प्रदर्शन खत्म हो गया है. प्रशासन ने छात्रसंघ चुनाव कराने की मांग को मंजूरी दे दी है. जामिया में छात्रसंघ चुनाव 20 साल बाद होगा. इस फैसले के आने के बाद से ही छात्रों में खुशी का माहौल था.
दिल्ली के जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में पिछले 18 दिनों से छात्रों का प्रोटेस्ट चल रहा था. ये प्रोटेस्ट छात्रसंघ चुनाव की मांग को लेकर स्टूडेंट्स द्वारा किया जा रहा था. वहीं यूनिवर्सिटी प्रशासन ने अब छात्रों की मांगो को मंजूर कर लिया है. प्रशासन ने लगभग 20 साल बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया स्टूडेंट्स यूनियन (JMISU) के चुनाव दोबारा कराने का फैसला किया है. वहीं जैसे ही ये फैसला आया छात्रों में जश्न का माहौल बन गया.
कैसे कराया जाएगा चुनाव?
जामिया के रजिस्ट्रार महताब आलम ने बताया कि छात्रों ने प्रशासन को तीन मांगे लिख के दी थी. इसमें सबसे मेन मांग छात्रसंघ का संविधान तैयार करने की थी. प्रशासन ने 15 मई 2027 तक छात्रसंघ के ड्राफ्ट संविधान को तैयार करने पर सहमति जताई है.
वहीं जो समिति संविधान तैयार करेगी उसमें प्रोफेसर और कानूनी विशेषज्ञों के साथ छात्रों के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे. इसके तहत हर फैकल्टी से छात्र के प्रतिनिधि चुने जाएंगे. इससे संविधान तैयार करने के प्रोसेस में छात्रों की भागीदारी भी हो सकेगी. चुनाव को लिंगदोह समिति की सिफारिशों के अनुसार कराया जाएगा.
भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों ने क्या कहा?
प्रोटेस्ट में एबिन बेसिल 18 दिनों तक और रेहान मेवाती 15 दिनों तक भूख हड़ताल पर बैठे थे. ऐसे में जब प्रशासन द्वारा मांगों को मान लिया गया, तो दोनों ही छात्रों ने इसे छात्र समुदाय की बड़ी जीत बताया. एबिन बेसिल ने कहा कि यह स्टूडेंट्स के लिए एक बड़ी जीत है. यह जामिया के इतिहास और विरासत में सुनहरे शब्दों में लिखा जाएगा. वहीं रेहान मेवाती का कहना था कि ये सच्चाई की जीत हुई है. उन्होंने आगे कहा कि मैं पिछले 15 दिनों से भूख हड़ताल पर था. मेरी तबीयत खराब हो रही थी, लेकिन जामिया एडमिनिस्ट्रेशन ने हमारी मांगें मान ली और सच का साथ दिया. हम सच के लिए लड़ रहे थे. इंकलाब जिंदाबाद. सच की हमेशा जीत होती है.
कब कराए जाएंगे छात्रसंघ चुनाव
प्रशासन के अनुसार, छात्रसंघ चुनाव 16 जुलाई 2027 से शुरू होने वाले शैक्षणिक सत्र के 6 हफ्ते के अंदर कराए जाएंगे. वहीं दूसरी तरफ प्रोटेस्ट के दौरान छात्रों पर की गई कार्रवाई और कैंपस में एंट्री पर लगाई गई रोक भी हटा दी गई है.
(नोएडा से अशोक कुमार की रिपोर्ट)