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DUSU Election 2026: पोस्टर-पर्चे से Instagram Reels तक पहुंचा चुनाव प्रचार, Gen-Z वोटर्स को लुभाने की क्या है रणनीति?

DUSU Election 2026 में चुनाव प्रचार का तरीका डिजिटल हो गया है. Instagram Reels, YouTube वीडियो, मीम्स और सोशल मीडिया कैंपेन के जरिए उम्मीदवार Gen-Z छात्रों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं. वहीं हॉस्टल-पीजी सुरक्षा, छात्र आवास, महिला सुरक्षा, शिक्षा और रोजगार जैसे मुद्दे भी कैंपेन का हिस्सा बने हैं.

Written By Renu Akarniya
Published: Sep 14, 2026, 10:18 PM IST | Updated: Sep 14, 2026, 10:27 PM IST
Image Credit: DUSU Election 2026: पोस्टर-पर्चे से Instagram Reels तक पहुंचा चुनाव प्रचार
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DUSU Election 2026: दिल्ली विश्विद्यालय छात्र संघ (DUSU) चुनाव 2026 के लिए कैंपेनिंग का तरीका तेजी से बदलता दिख रहा है. पहले जहां उम्मीदवार अपनी बात पहुंचाने के लिए पोस्टर, पैम्फलेट और स्टूडेंट्स के साथ सीधी मीटिंग का इस्तेमाल करते थे. वहीं इस बार इंस्टाग्राम रील्स, यूट्यूब वीडियो, मीम्स और सोशल मीडिया कैंपेनिंग का अहम जरिया बन गए हैं. 18 सितंबर को होने वाले चुनाव से पहले छात्र संगठन और उम्मीदवारों ने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपना एंगेजमेंट बढ़ा दिया है.

पोस्टर और पैम्फलेट के बजाय डिजिटल कैंपेन
इस बार, DUSU चुनाव में पारंपरिक कैंपेनिंग के तरीकों पर कई पाबंदियां हैं. इस वजह से उम्मीदवार छात्रों तक पहुंचने के लिए डिजिटल तरीकों का सहारा ले रहे हैं. इंस्टाग्राम पर छोटे वीडियो क्लिप, मीम्स और कैंडिडेट के मैसेज तेजी से शेयर किए जा रहे हैं. इससे चुनाव कैंपेन कैंपस की सीमाओं से बाहर निकलकर स्टूडेंट्स के मोबाइल स्क्रीन तक पहुंच गया है.

Gen-Z को टारगेट कर रहे उम्मीदवार
दिल्ली यूनिवर्सिटी के बहुत सारे स्टूडेंट्स युवा हैं और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एक्टिव हैं. यही वजह है कि कैंडिडेट लंबे भाषणों के बजाय कम समय में अपनी बात पहुंचाने वाले छोटे वीडियो और रील्स पर जोर दे रहे हैं. उम्मीदवारों ने के सोशल मीडिया कंटेंट में पर्सनल प्रोफाइल, चुनावी वादे, स्टूडेंट के मुद्दे और कैंपस से जुड़े मुद्दे तेजी से शामिल हो रहे हैं. इसका मकसद स्टूडेंट्स से सीधे जुड़ना और उन्हें ज़्यादा नैचुरल तरीके से प्रभावित करना है.

उदाहरण के लिए, जैसे ABVP ने अपने X पर पोस्ट करके स्टूडेंट के मुद्दे उठाए और एक रील शेयर की, जिसमें अपने सोशल मीडिया कैंपेन में स्टूडेंट के मुद्दों को प्राथमिकता दी गई.

रील्स और मीम्स नए कैंपेन टूल बने
इस चुनाव में मीम्स और रील्स सिर्फ मनोरंजन तक ही सीमित नहीं हैं. इनका इस्तेमाल छात्रों तक आसानी से और तेजी से पॉलिटिकल मैसेज पहुंचाने के तरीके के तौर पर किया जा रहा है. कैंडिडेट्स अपने कैंपेन को ज्यादा एंगेजिंग बनाने के लिए ट्रेंडिंग फॉर्मेट और सोशल मीडिया भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं. इस वजह से चुनाव कैंपेन में पुराने पोस्टरों की जगह वायरल डिजिटल कंटेंट ने ले ली है.

इन्फ्लुएंसर और पर्सनल ब्रांडिंग पर भी जोर 
डिजिटल कैंपेनिंग का एक और जरूरी पहलू पर्सनल ब्रांडिंग है. कैंडिडेट्स सिर्फ अपने संगठन के नाम से कैंपेन करने के बजाय, स्टूडेंट्स के सामने अपनी पहचान और पर्सनल इमेज दिखाने की कोशिश कर रहे हैं. कुछ कैंपेन में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और डिजिटल प्रमोशन का इस्तेमाल करने की भी रिपोर्ट मिली है.

क्या सोशल मीडिया वोट दिलाने में मदद करेगा? 
सोशल मीडिया पर पॉपुलैरिटी और चुनावी टर्नआउट दो अलग-अलग चीजें हैं. पिछले DUSU चुनावों के अनुभव बताते हैं कि सोशल मीडिया पर बड़ी फॉलोइंग होने से चुनावी जीत की गारंटी नहीं मिलती. इसलिए, कैंडिडेट डिजिटल कैंपेनिंग के साथ-साथ पर्सनल स्टूडेंट एंगेजमेंट और कैंपस-लेवल नेटवर्किंग पर फोकस कर रहे हैं.

इस बार किन मुद्दों पर फोकस है?
DUSU चुनाव 2026 में स्टूडेंट हाउसिंग, PG और हॉस्टल सिक्योरिटी, महिलाओं की सेफ्टी, एजुकेशन, कैंपस फैसिलिटी और एम्प्लॉयमेंट जैसे मुद्दे भी सोशल मीडिया स्ट्रैटेजी के लिए अहम हैं. स्टूडेंट हाउसिंग और सिक्योरिटी चुनावी बहस का सेंटर बन गए हैं, खासकर सत्य निकेतन बिल्डिंग गिरने के बाद.

डिजिटल कैंपेनिंग क्यों जरूरी है?
सोशल मीडिया के जरिए, कैंडिडेट एक ही पोस्ट या वीडियो से बड़ी संख्या में स्टूडेंट तक पहुंच सकते हैं. इसके अलावा, स्टूडेंट रिएक्शन, शेयर और कमेंट्स का अंदाज़ा कम समय में लगाया जा सकता है. यही वजह है कि DUSU चुनावों में डिजिटल कैंपेनिंग सिर्फ़ एक कैंपेनिंग ऑप्शन ही नहीं, बल्कि कैंडिडेट की चुनावी स्ट्रैटेजी का एक अहम हिस्सा बन रहा है.

DUSU चुनाव 2026 ने स्टूडेंट पॉलिटिक्स के कैंपेनिंग के तरीके में एक बड़ा बदलाव किया है. चुनाव के मैसेज कैंपस की दीवारों और पैम्फलेट से हटकर इंस्टाग्राम रील्स, यूट्यूब, मीम्स और डिजिटल कंटेंट के जरिए स्टूडेंट्स के मोबाइल फोन पर आ गए हैं. लेकिन, आखिर में वोटर्स ही तय करेंगे कि सोशल मीडिया पर पॉपुलैरिटी वोट में बदलेगी या नहीं.

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About the Author

रेनू अकर्णिया, वर्तमान में Zee News में सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं और दिल्ली-एनसीआर और हरियाणा की लेटेस्ट, ट्रेंडिंग कंटेंट, यूटिलिटी जुड़ी खबरों पर काम कर रहे हैं. रेनू पिछले 3 सालों से डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं. पत्रकारिता में ग्रेजुएशन करने के बाद उन्होंने 2022 में Zee News से करियर की शुरुआत की.  लोकल चैनल समाचार प्लस में इंटर्न से शुरुआत की और कारवां बढ़ता हुआ जी न्यूज पहुंचा.
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