NSUI का अकेला सितारा राहुल झांसला... जिसने 2025 में DU में बचाई थी कांग्रेस की लाज, बने थे उपाध्यक्ष
DUSU Election History: पिछले साल यानी कि 2025 के DUSU चुनाव एक बार फिर स्टूडेंट पॉलिटिक्स में ABVP का दबदबा दिखा. ABVP ने चार में से तीन अहम पद जीते, लेकिन NSUI के राहुल झांसाला ने उपाध्यक्ष का पद जीता, जिससे कांग्रेस समर्थित छात्र संगठन की मौजूदगी बनी रही.
DUSU Election 2026: इस साल दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव में कौन जीतेगा, यह तो 18 सितंबर को वोटिंग और 19 सितंबर को नतीजों के बाद ही पता चलेगा. हालांकि, 2025 के DUSU चुनाव में ABVP ने चार में से तीन सीटें जीती थीं. वहीं NSUI के राहुल झांसाला ने उपाध्यक्ष का पद जीता, जिससे कांग्रेस समर्थित स्टूडेंट संगठन की मौजूदगी बनी रही. जानें कि राहुल झांसाला ने उपाध्यक्ष का पद कैसे हासिल किया और कैंपेन के एजेंडे में क्या था.
पिछले साल यानी कि 2025 के DUSU चुनाव एक बार फिर स्टूडेंट पॉलिटिक्स में ABVP का दबदबा दिखा. ABVP ने चार में से तीन अहम पद जीते, लेकिन NSUI के राहुल झांसाला ने उपाध्यक्ष का पद जीता, जिससे कांग्रेस समर्थित छात्र संगठन की मौजूदगी बनी रही. राहुल को 29,339 वोट मिले, जबकि उनके ABVP विरोधी गोविंद तंवर को 20,547 वोट मिले.
इसीलिए राहुल झांसाला को 2025 के DUSU चुनाव में NSUI का 'अकेला विजेता' कहा गया. ABVP ने अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव की पोस्ट जीतीं, जबकि राहुल उपाध्यक्ष बने.
राहुल झांसला कौन हैं?
राहुल झांसला अलवर, राजस्थान के रहने वाले हैं. उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के शहीद भगत सिंह कॉलेज से ग्रेजुएशन किया और बाद में लॉ की पढ़ाई की. उन्होंने DU में छात्रों के अधिकार कैंपस के मुद्दों में एक्टिव रोल निभाया. स्टूडेंट पॉलिटिक्स में उनकी पहचान सिर्फ एक चुनावी कैंडिडेट के तौर पर नहीं थी. वह हॉस्टल की कंडीशन, स्पोर्ट्स फैसिलिटी और स्टूडेंट से जुड़े दूसरे मुद्दों को लेकर मूवमेंट और प्रोटेस्ट में एक्टिव थे.
स्टूडेंट मुद्दों के लिए पहचान बनाई
राहुल झांसला के पॉलिटिकल करियर का एक बड़ा हिस्सा स्टूडेंट फैसिलिटी और कैंपस के मुद्दों के आसपास घूमता रहा. चुनाव से पहले, उन्हें एक ऐसे लीडर के तौर पर प्रमोट किया गया था, जो हॉस्टल की सफाई, स्पोर्ट्स फैसिलिटी और स्टूडेंट वेलफेयर से जुड़े मुद्दे उठाते थे.
DUSU चुनाव के दौरान, उन्होंने हॉस्टल कैपेसिटी बढ़ाने और स्टूडेंट्स के लिए फीस को और सस्ता बनाने जैसे मुद्दे भी उठाए. मिरांडा हाउस में हुए एक इवेंट के दौरान, उन्होंने शहीद भगत सिंह कॉलेज में फीस बढ़ोतरी के मुद्दे पर NSUI के प्रोटेस्ट और जांच का भी जिक्र किया था.
DUSU चुनाव में कैसा रहा राहुल झांसला का परफॉर्मेंस?
DUSU की चार खास सीटों पर राहुल झांसाला की जीत NSUI के लिए सबसे बड़ी कामयाबी थी. आखिरी नतीजों में, राहुल को 29,339 वोट मिले. ABVP के गोविंद तंवर को 20,547 वोट मिले. इस तरह, राहुल ने लगभग 8,800 वोटों के मार्जिन से उपाध्यक्ष का पद हासिल किया.
दूसरी तरफ, ABVP के आर्यन मान ने अध्यक्ष का पद जीता. सचिव का पद भी ABVP को मिला और संयुक्त सचिव का पद भी ABVP कैंडिडेट ने जीता. इस तरह, चार में से तीन सीटें ABVP को मिलीं, जिससे NSUI के पास सिर्फ उपाध्यक्ष का पद बचा.
NSUI के लिए राहुल की जीत क्यों जरूरी थी?
DUSU चुनावों में NSUI के लिए यह नतीजा इसलिए ज़रूरी था क्योंकि ABVP को चुनौती देने के बावजूद संगठन बाकी सेंट्रल पैनल सीटें जीतने में नाकाम रहा. इस मामले में, राहुल की जीत ने NSUI को स्टूडेंट यूनियन के टॉप रैंक में अपनी मौजूदगी बनाए रखने में मदद की.
उनकी जीत को NSUI के लिए एक पर्सनल कामयाबी और एक स्ट्रेटेजिक कामयाबी, दोनों के तौर पर देखा गया. चुनाव के नतीजों ने दिखाया कि ABVP के मज़बूत असर के बावजूद, NSUI के पास अभी भी कुछ मुद्दों और कुछ एरिया में स्टूडेंट का अच्छा-खासा सपोर्ट था.
इलेक्शन कैंपेन के दौरान भी चर्चित रहे
DUSU इलेक्शन के दौरान, राहुल झांसला NSUI के जाने-माने चेहरों में से एक थे. उनके कैंपेन में बैलेट नंबर "5225" के आस-पास नारे और कैंपेनिंग शामिल थी. राहुल ने खुद कहा कि ऐसे नारे इलेक्शन कैंपेन को युवाओं के लिए ज्यादा आकर्षक और वाइब्रेंट बनाते हैं.
उनका पॉलिटिकल फोकस सिर्फ़ इलेक्शन जीतने पर ही नहीं था, बल्कि स्टूडेंट पार्टिसिपेशन और कैंपस के मुद्दों को पॉलिटिकल डिबेट का हिस्सा बनाने पर भी था. इसीलिए इलेक्शन के दौरान उन्हें NSUI के एक्टिव स्टूडेंट लीडर्स में गिना जाता था.
राहुल के एजेंडा में क्या था?
2025 के चुनाव के लिए राहुल और NSUI के एजेंडा में कई एकेडमिक और स्टूडेंट वेलफेयर मुद्दे शामिल थे. इनमें एग्जामिनेशन सिस्टम में ट्रांसपेरेंसी, पेपर लीक रोकने के उपाय, स्मार्ट क्लासरूम, बेहतर हॉस्टल फैसिलिटी और स्टूडेंट्स के लिए बेहतर ट्रांसपोर्टेशन शामिल थे. कैंपेन में फीमेल स्टूडेंट्स से जुड़े मुद्दों को भी हाईलाइट किया गया. इनमें मेंस्ट्रुअल लीव, सैनिटरी वेंडिंग मशीन, लीगल एड और कैंपस सिक्योरिटी को मज़बूत करने की मांगें शामिल थीं.
जीत के बाद भी आसान नहीं
राहुल झांसला के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि उपाध्यक्ष पद जीतने के बावजूद ABVP के पास DUSU की बाकी तीन अहम सीटें थीं. इसलिए, स्टूडेंट यूनियन में असरदार भूमिका निभाने के लिए उन्हें अपने पद के दायरे में रहकर काम करना था और स्टूडेंट के मुद्दे उठाते रहना था.
चुनाव के बाद भी, राहुल ने स्टूडेंट वेलफेयर के मुद्दों पर एक्टिव रहने की कसम खाई. अक्टूबर 2025 में नए DUSU नेताओं के साथ बातचीत में उन्होंने इशारा किया कि चुनावी हार के बावजूद, NSUI स्टूडेंट की आवाज को मजबूती से उठाता रहेगा.
राहुल झांसला की कहानी का बड़ा मैसेज
2025 के DUSU चुनाव राहुल झांसला के लिए सिर्फ चुनावी जीत नहीं थे. यह ऐसे समय में हुआ जब ABVP ने चार में से तीन अहम पदों पर कब्जा कर लिया था. ऐसे माहौल में अकेले NSUI विजेता के तौर पर राहुल का उभरना उन्हें पार्टी के स्टूडेंट संगठन में एक अहम हस्ती बनाता है.
29,339 वोटों के साथ उपाध्यक्ष पद जीतने वाले राहुल झांसला ने यह जरूर साबित कर दिया कि DU स्टूडेंट पॉलिटिक्स पर ABVP की मजबूत पकड़ के बावजूद, NSUI ने अपनी जगह पूरी तरह से नहीं खोई है. उनकी पॉलिटिकल पहचान अब और मजबूत होगी, क्योंकि वे अपने कार्यकाल के दौरान स्टूडेंट के मुद्दों को कैसे उठाते हैं और जमीन पर कितना असर डाल पाते हैं.
इस बार यह देखना बहुत दिलचस्प होगा कि इस बार DUSU चुनाव में क्या NSUI उपाध्यक्ष पद पर अपना दबदबा कायम रखेगी और क्या सीट का दायरा एक से आगे बढ़ेगा या फिर एक सीट भी हाथ से चली जाएगी. यह सब 18 सितंबर को DUSU चुनाव की वोटिंग और 19 सितंबर को रिजल्ट के बाद ही पता चल पाएगा.