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DUSU Election Result 2026: DUSU चुनाव को लेकर छात्रों के बीच काफी उत्साह रहता है. वहीं 2026 के चुनाव के लिए बीते शुक्रवार को वोटिंग हुई, जबकि काउंटिग 19 सितंबर यानी कि आज सुबह 8 बजे से शुरू हो गई है. इस बार अध्यक्ष पद के लिए ABVP के यश डबास, NSUI के विजय शंकर मीणा और AISA-SFI की अनन्या रतूड़ी समेत 7 अन्य उम्मीदवार मैदान में हैं.
DUSU को दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों का प्रतिनिधि संगठन माना जाता है. अध्यक्ष का पद छात्रसंघ के सबसे अहम पदों में से एक है. ऐसे में सवाल ये बनता है कि क्या DUSU अध्यक्ष को हर महीने कोई सैलरी मिलती है या नहीं? अध्यक्ष के पास कौन-कौन से अधिकार होते हैं और उसकी जिम्मेदारी क्या होती है?
किसके सिर सजा ताज?
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) चुनाव 2026 में अध्यक्ष पद पर ABVP के यश डबास ने जीत दर्ज की है. ABVP और NSUI के बीच अध्यक्ष पद पर कड़ा मुकाबला देखने को मिला. यश डबास की जीत के बाद ABVP समर्थकों में उत्साह है. यश डबास ने NSUI के विजय शंकर मीणा को हराया है.
DUSU अध्यक्ष को कितनी सैलरी मिलती है?
DUSU अध्यक्ष का पद किसी सरकारी नौकरी या विश्वविद्यालय की नौकरी जैसा नहीं होता है. जानकारी के अनुसार, अध्यक्ष को कर्मचारी की तरह तय मासिक वेतन नहीं मिलता. मतलब ये एक निर्वाचित छात्र प्रतिनिधि का पद है, न कि वेतन वाली सरकारी या विश्वविद्यालय की नौकरी. इसलिए DUSU अध्यक्ष को विधायक या सासंद की तरह मासिक वेतन और जनप्रतिनिधि के लिए तय सरकारी भत्ते नहीं मिलते. अगर यूनिवर्सिटी की तरफ से प्रशासनिक सुविधा या खर्च की व्यवस्था होती है, तो वो संबंधित नियमों और प्रावधानों के अनुसार होती है.
अध्यक्ष की जिम्मेदारी क्या होती है?
DUSU के संविधान में अध्यक्ष को संघ का Chief Executive Head यानी मुख्य कार्यकारी प्रमुख बताया गया है. ऐसे में अध्यक्ष को संघ से जुड़े मामलों में संविधान के अनुसार काम करना होता है. इसका मतलब है कि अध्यक्ष छात्रसंघ की गतिविधियों का नेतृत्व करता है. साथ ही स्टूडेंट्स के मुद्दों को यूनिवर्सिटी के सामने रखता है और उसका समाधान कराने की कोशिश करता है
छात्रों की आवाज उठाना
DUSU अध्यक्ष काम स्टूडेंट्स से जुड़े मुद्दों को उठाना होता है. इसमें शिक्षा, परीक्षा, छात्र सुविधाएं, हॉस्टल, कैंपस सुरक्षा, फीस जैसे छात्र हित के मुद्दे शामिल हो सकते हैं. अध्यक्ष विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने छात्र समुदाय की समस्याएं रखने और उनके समाधान को लेकर बातचीत करने में भी भूमिका निभाता है.
छात्रसंघ का नेतृत्व कौन करता है?
वहीं DUSU अध्यक्ष यूनिवर्सिटी से जुड़े काम काज का भी नेतृत्व करता है. इसके साथ ही छात्रसंघ की अलग-अलग गतिविधियों और कार्यक्रमों में उसकी भूमिका होती है. बता दें कि अध्यक्ष अकेले सारे फैसले नहीं ले सकता है. DUSU का काम संविधान और छात्रसंघ की दूसरे संस्थाओं के तय नियमों के अनुसार चलता है.
सेंट्रल काउंसिल और एग्जीक्यूटिव कमेटी के साथ काम
इतना ही नहीं DUSU की व्यवस्था में सेंट्रल काउंसिल और एग्जीक्यूटिव कमेटी भी भूमिका निभाती है. एग्जीक्यूटिव कमेटी सेंट्रल काउंसिल द्वारा तय नीतियों और DUSU संविधान के तहत काम करती है. इसलिए अध्यक्ष का पद जरूरी होने के बावजूद वो छात्रसंघ की पूरी व्यवस्था से ऊपर नहीं होता.
DUSU अध्यक्ष का चुनाव इतना महत्वपूर्ण क्यों माना जाता है?
DUSU चुनाव दिल्ली विश्वविद्यालय के सबसे चर्चित छात्र चुनावों में शामिल हैं. यहां के युनाव में ABVP, NSUI और AISA-SFI जैसे छात्र संगठन सक्रिय रूप से हिस्सा लेते हैं. इस बाद के चुनाव में अध्यक्ष पद पर सात उम्मीदवार और चार केंद्रीय पदों के लिए कुल 20 उम्मीदवार मैदान में थे.
DUSU चुनाव में स्टूडेंटस् से जुड़े मुद्दे मेन माने जाते हैं. इस बार का बड़ा मुद्दा छात्र आवास और कैंपस से जुड़ी सुरक्षा जैसे मुद्दे चर्चा में रहे. दिल्ली के सत्य निकेतन में PG इमारत गिरने की घटना के बाद छात्र आवास की कमी और सुरक्षित रहने की व्यवस्था पर भी चर्चा हुई.
DUSU अध्यक्ष बनने के बाद क्या मिलता है?
DUSU का अध्यक्ष बनने के बाद किसी भी तरह के तय वेतन का प्रावधान नहीं है. ये पद विश्वविद्यालय के हजारों छात्रों का प्रतिनिधित्व करने की जिम्मेदारी देता है. अध्यक्ष को छात्रसंघ के कामकाज का नेतृत्व करने के साथ-साथ य्टूडेंट्स और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच बातचीत में जरूरी भूमिका निभानी होती है. यही वजह है कि DUSU अध्यक्ष पद छात्र राजनीति में चर्चा का केंद्र रहता है. अध्यक्ष के अधिकार और जिम्मेदारियां DUSU संविधान में तय नियमों के दायरे में ही रहती हैं.