क्या सच में दिल्ली SIR में कमाल हो गया? 33 लाख को मिला था नोटिस, 20 लाख के निपटारे का दावा
दिल्ली में SIR प्रक्रिया के तहत करीब 33 लाख वोटर्स को नोटिस जारी किए गए थे. निर्वाचन आयोग के अनुसार, इनमें से 20 लाख मामलों का निपटारा हो चुका है. 2002 की मतदाता लिस्ट में नाम नहीं मिलने और अन्य गड़बड़ियों के चलते ये नोटिस भेजे गए थे.
दिल्ली में SIR को लेकर 33 लाख वोटर्स को नोटिस जारी किया गया था. वहीं निर्वाचन अधिकारियों के अनुसार, 33 लाख मामलों में से 20 लाख का निपटारा कर दिया है. इन मतदाताओं को 2002 की वोटर लिस्ट में नाम नहीं मिलने या अन्य विसंगतियों के कारण नोटिस भेजे गए थे. इस बात का दावा आयोग की तरफ से आधिकारिक बयान में किया गया है.
कार्यालय की तरफ से क्या कहा गया?
दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कार्यालय के अनुसार, किसी भी व्यक्ति को किसी तरह की कोई शिकायत है, तो वो 14,947 बूथ स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ), 902 सहायक निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों (एईआरओ), 70 निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों (ईआरओ), 13 जिला निर्वाचन अधिकारियों (डीईओ) या दिल्ली के सीईओ से संपर्क कर सकता है.
दिल्ली निर्वाचन आयोग ने क्या कहा?
दिल्ली निर्वाचन आयोग के अनुसार, इन मामलों के समाधान के लिए अभियान शुरू किया था, जिसमें 33 लाख में से करीब 20 लाख मामलों का निपटारा किया जा चुका है. इसके साथ ही विशेष शिविर भी लगाए जा रहे हैं. यहां पर BLO मतदताओं की मदद कर सकते हैं.
कब लगाए जाएंगे शिविर?
SIR से जुड़े मामलों को निपटाने के लिए शिविर 18 और 25 अक्टूबर को भी लगाए जाएंगे. CEO ने बयान में कहा कि दिल्ली की वोटर लिस्ट में 33 लाख एंट्रीज में लॉजिकल गड़बड़ी या अनमैप्ड होने की समस्या थी. इन परेशानियों को सुलझाने के लिए एक प्रोएक्टिव कैंपेन शुरू किया था.
वोटर्स को नोटिस भेजे गए
उन्होंने ये भी कहा कि किसी भी पात्र मतदाता को लिस्ट से बाहर नहीं किया जाएगा. एसआईआर प्रक्रिया के तहत दिल्ली में लगभग 33 लाख वोटर्स को नोटिस भेजे गए थे. ये नोटिस उनके एन्यूमरेशन फॉर्म में दी गई जानकारी में पाई गई गड़बड़ियों के कारण भेजे गए थे.
SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता लिस्ट में दर्ज जानकारी में गड़बड़ी मिलने पर वोटर्स को नोटिस भेजे गए थे. इसका मकसद उन्हें अपनी जानकारी साफ करने और जरूरी दस्तावेज जमा करने का मौका देना था. नोटिस पाने वालों में कई चर्चित हस्तियां भी शामिल हैं. इनमें पूर्व उपप्रधानमंत्री एल.के. आडवाणी, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और चुनाव आयुक्त एस.एस. संधू के नाम शामिल हैं.