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Delhi News: सुप्रीम कोर्ट ने राजधानी में सस्ती दरों पर जमीन पाने वाले प्राइवेट अस्पतालों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी EWS मरीजों को फ्री में इलाज करने के निर्देश दिए हैं. कोर्ट ने दिल्ली सरकार से साफ तौर पर कहा है कि ऐसे सारे हॉस्पिटल की पहचान की जाए और ये देखा जाए कि वो लीज की शर्तों के अनुसार काम कर रहे हैं या नहीं.
कोर्ट ने क्या कहा?
दरअसल, ये मामला उन हॉस्पिटलों से जुड़ा हुआ है, जिन्हें सरकार की तरफ से सस्ते दरों में जमीन या दूसरी सुविधाएं मिली हैं. ऐसी जमीन की लीज शर्तों में गरीब और EWS मरीजों को फ्री में इलाज देने का प्रावधान शामिल है. सुप्रीम कोर्ट इसे लेकर पहले भी अस्पतालों और दिल्ली सरकार से जवाब मांग चुका है.
सुनवाई के समय कोर्ट को बताया गया कि दिल्ली सरकार ने फिलहाल 51 हॉस्पिटल की लिस्ट सौंपी है. हालांकि, कोर्ट के सामने ये बात भी आई कि इसमें कुछ और अस्पताल शामिल हो सकते हैं. इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य सचिव को कहा कि वो ऐसे अस्पतालों की जानकारी जुटाकर अदालत में जमा करने का निर्देश दिया है.
कोर्ट की कार्यवाही में ये बात बताया गया है कि कुछ EWS मरीजों ने ये आरोप लगाया है कि उन्हें कुछ अस्पतालों से ये कहकर वापस किया गया है कि वो कोर्ट में चल रही कार्यवाही का हिस्सा नहीं है. इसके बाद कोर्ट ने साफ तौर पर कहा कि पात्र मरीजों को फ्री में इलाज की सुविधा से वंचित नहीं किया जाना चाहिए.
10% IPD और 25% OPD में मुफ्त इलाज
सुप्रीम कोर्ट के 2018 के फैसले के अनुसार, संबंधित लीज शर्तों के तहत आने वाले अस्पतालों को EWS मरीजों के लिए मुफ्त इलाज की व्यवस्था करनी होती है. सामान्य तौर पर इस व्यवस्था में IPD के 10% और OPD के 25% मरीजों को फ्री में इलाज देने का प्रावधान बताया गया है. अलग-अलग अस्पतालों की लीज और समझौते की शर्तों के अनुसार परसेंट अलग भी हो सकता है.
कोर्ट के सामने इस मामले में एक SOP यानी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर का ड्राफ्ट भी रखा गया है. प्रस्तावित नियमों के अनुसार, किसी EWS मरीज को इमरजेंसी इलाज देने से केवल इसलिए इनकार नहीं किया जा सकेगा कि उस महीने का निर्धारित कोटा पूरा हो चुका है.
अगर किसी अस्पताल की तरफ से मुफ्त में इलाज देने से इनकार किया जाता है, तो उसका कारण लिखित रूप में देना होगा. ड्राफ्ट में इलाज का खर्च, किसी खास डॉक्टर या कंसल्टेंट की पसंद और प्रशासनिक परेशानी जैसी वजहों को इनकार का आधार नहीं माना गया है.
अगली सुनवाई कब है
अस्पतालों की तरफ से SOP के कुछ प्रावधान भी सुझाए गए हैं. यही वजह है कि कोर्ट ने अगली सुनवाई तक SOP को लास्ट रूप देकर पेश करने को कहा है. मामले की अगली सुनवाई 4 नवंबर को होगी. 51 अस्पतालों की लिस्ट में मैक्स, फोर्टिस, मूलचंद, प्राइमस, विमहांस, बत्रा, धर्मशिला नारायणा, सीता राम भारती, सर गंगा राम और सेंट स्टीफंस जैसे कई बड़े अस्पताल शामिल हैं. सुप्रीम कोर्ट अब ये भी देख रहा है कि लिस्ट से बाहर रह गए पात्र अस्पतालों को इस व्यवस्था के दायरे में कैसे लाया जाए.