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दिल्ली में बिना रुके टोल कैसे कटेगा? Barrier-Free Tolling System क्या है, इससे प्रदूषण कैसे घटेगा?

Delhi Pollution: दिल्ली में ठंड के शुरू होते ही प्रदूषण की समस्या बढ़ने लगती है. इस दौरान राजधानी की सीमाओं पर टोल प्लाजा के पास गाड़ियों की लंबी लगाइने लग जाती हैं. जाम में गाड़ चलाने वालों को काफी देर तक इंजन चालू रखना पड़ता है.

Written By Akanchha Singh
Published: Sep 15, 2026, 01:20 PM IST | Updated: Sep 15, 2026, 01:21 PM IST
Image Credit: Delhi_pollution
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Delhi News: दिल्ली में ठंड आते ही प्रदूषण की परेशानी शुरू हो जाती है. ऐसे में राजधानी की सीमाओं पर गाड़ियों की लंबी-लंबी लाइनें दिखना शुरू हो जाती हैं. टोल प्लाजा पर गाड़ियों को रुकना पड़ता है, जिससे ट्रैफिक पर असर पड़ने लगता है. वहीं टोल पर गाड़ी के इंजन को चालू रखकर देर तक लोग खड़े रहते हैं. ऐसे में इससे निकलने वाला धुआं दिल्ली की हवा को और खराब कर सकता है.  

इस समस्या को खत्म करने के लिए  दिल्ली की सीमाओं पर Multi-Lane Free Flow यानी MLFF सिस्टम लगाने की प्लानिंग है. इसके लग जाने से ये फायदा होगा कि गाड़ियों को टोल देने के लिए बैरियर पर रुकने की जरूरत नहीं पड़ेगी. गाड़ी चलते हुए ही उसका टोल अपने आप रिकॉर्ड और कलेक्ट किया जा सकेगा. इस सिस्टम को लागू करने की तैयारी अभी अपने शुरुआती चरण में है. कई जगहों का सर्वे किया जा चुका है, लेकिन जरूरी मंजूरियां और तकनीकी काम अभी बाकी है.

क्या है Barrier-Free Tolling System?
Barrier-Free Tolling System को आसान भाषा में समझे, तो ये ऐसा टोल सिस्टम है, जिसमें गाड़ियों को टोल बूथ पर रुकना नहीं पड़ता. अभी जो व्यवस्था है उसमें गाड़ी को टोल प्लाजा पर रुकना पड़ता है, टोल का भुगतान होता है और फिर बैरियर खुलने के बाद गाड़ी आगे बढ़ती है.

MLFF सिस्टम में ये प्रक्रिया बदल जाएगी
वहीं सड़क के ऊपर एक ओवरहेड गैंट्री लगाई जाएगी, जिसमें कई तरह के कैमरे, सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लगे होंगे. जैसे ही कोई गाड़ी इस प्वाइंट से गुजरेगा, सिस्टम उसकी पहचान कर लेगा और संबंधित टोल अपने आप रिकॉर्ड हो जाएगा. यानी गाड़ी की स्पीड कम करने या टोल बूथ पर रुकने की जरूरत नहीं होगी.      

बिना रुके टोल कैसे कटेगा?
इस पूरी व्यवस्था में कई तकनीकों को इस्तेमाल किया जाएगा, जिसमें मेन हैं RFID, ANPR कैमरे, सेंसर और डिजिटल टोलिंग सिस्टम. RFID तकनीक गाड़ियों की पहचान करने में आसानी होगी. वहीं ANPR यानी Automatic Number Plate Recognition कैमरे वाहन की नंबर प्लेट को पढ़ सकते हैं. जब कोई गाड़ी टोल प्वाइंट से गुजरती है, तो ऊपर लगे सेंसर गाड़ियों का रिकॉर्ड कर लेते हैं. ऐसे नंबर प्लेट की जानकारी सिस्टम में दर्ज होती है. इसके बाद गाड़ी से जुड़े डिजिटल टोल अकाउंट या निर्धारित भुगतान व्यवस्था के तहत पैसे काटा जा सकता है. इसके आने से गाड़ी वालों को रोककर कैश देने या टोल बूथ पर लंबी लाइन में खड़े होने की जरूरत नहीं होगी.              

अभी कहां अटका है काम?
दिल्ली में इस सिस्टम को लागू करने के लिए कई मेन बॉर्डर प्वाइंट्स की पहचान की गई है. MCD की तरफ से 9 मेन जगहों का सर्वे किया गया है. वहीं इन जगहों पर  निर्माण और इंस्टॉलेशन का काम अभी शुरू नहीं हुआ है. जब से NHAI से जुड़ी मंजूरी मिली है काम आगे बढ़ने का उम्मीद है. इन नौ प्रमुख टोल प्लाजा में टिकरी बॉर्डर, सिंघु, कापसहेड़ा, आया नगर, बदरपुर, अप्सरा-शाहदरा, नई मंडोली, गाजीपुर और रजोकरी शामिल हैं. इसमें से गाजीपुर जैसे कुछ जगह काफी व्यस्त हैं. यहां पर दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे के माध्यम से यूपी और दूसरे राज्यों से काफी संख्या में गाड़ी दिल्ली की तरफ आते हैं. ऐसे में बिना ट्रैफिक रोके तैयारी करना बड़ी चुनौती हो सकती है.      

प्रदूषण कम करने में कैसे मिलेगी मदद?
बता दें के टोल प्लाजा पर लगने वाला जाम इसका मेन कारण है. एक साथ जब सैकड़ों गाड़ियां टोल बूथ पर पहुंचती हैं, तो उन्हें अपनी स्पीड को कम करना पड़ता है या रुकना पड़ता है. कई बार गाड़ी चलाने वाले गाड़ी के इंजन को बंद नहीं करते हैं.  इसे लंबे समय तक गाड़ियों से धुआं निकलता रहता है.

Barrier-Free Tolling System में गाड़ियों को रुकने की जरूरत नहीं होगी

पहला, टोल प्लाजा पर गाड़ियों की कतार कम होगी.

दूसरा, गाड़ियों के रुकने और दोबारा तेज होने की प्रक्रिया कम होगी.

तीसरा, इंजन के लंबे समय तक चालू रहने से होने वाला उत्सर्जन कम हो सकता है.

इस तरह अगर सिस्टम सही तरीके से काम करता है तो दिल्ली की सीमाओं पर ट्रैफिक से होने वाले प्रदूषण को कम करने में मदद मिल सकती है.

क्या इससे सर्दियों वाला प्रदूषण खत्म हो जाएगा?
दिल्ली का प्रदूषण केवल टोल प्लाजा या गाड़ियों के कारण नहीं होता. ठंड में कई दूसरे कारण भी प्रदूषण बढ़ाने में मुख्य भूमिका निभाते हैं. इनमें मौसम की स्थिति, हवा की कम गति, निर्माण का काम, सड़क की धूल, गाड़ियों का उत्सर्जन और आसपास के इलाकों में पराली जलाने जैसे कारण शामिल हैं. इसलिए MLFF सिस्टम प्रदूषण को पूरी तरह खत्म नहीं कर सकता, लेकिन टोल प्लाजा पर गाड़ियों की भीड़ और अनावश्यक उत्सर्जन को कम करने में इसकी भूमिका हो सकती है.

सुप्रीम कोर्ट ने क्यों दिया था निर्देश?
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली की सीमाओं पर लगने वाले जाम और प्रदूषण को देखते हुए MCD को टोल प्लाजा की व्यवस्था पर विचार करने का निर्देश दिया था. कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया था कि लोगों के स्वास्थ्य और सार्वजनिक हित को प्राथमिकता दी जानी चाहिए. इसके बाद ही MCD की तरफ से बताया गया कि दिल्ली के मेन एंट्री पॉइंट्स पर बैरियर-फ्री टोलिंग सिस्टम लगाने की योजना है.

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जी-न्यूज में ट्रेनी सब एडिटर. वर्तमान में दिल्ली-एनसीआर हरियाणा डिजिटल टीम में दिल्ली-एनसीआर-हरियाणा की राजनीति, हाइपर लोकल, क्राइम की खबरों पर नजर. यूटिलीटी की खबरों में दिलचस्पी है. 2023 में संस्थान से जुड़े. माखन लाल चतुर्वेदी भोपाल से पत्रकारिता में डिग्री हासिल की.
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