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Delhi News: हाल ही में देश की राजधानी में नाबालिग लड़कियों से यौन उत्पीड़न के कई मामलों के बीच दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने पुलिस को महिलाओं की सुरक्षा के लिए एक खास 'पिंक फोर्स' बनाने और स्कूलों, कॉलेजों, मेट्रो स्टेशनों और दूसरी संवेदनशील जगहों पर महिला कर्मचारियों की पेट्रोलिंग बढ़ाने का निर्देश दिया है.
ये निर्देश कालकाजी मंदिर के पास आस्था कुंज पार्क में 17 साल की लड़की के साथ कथित गैंगरेप के एक दिन बाद आए हैं. पुलिस ने कहा कि तीन लोगों ने पुलिस बनकर नाबालिग को एक सुनसान जगह पर ले जाकर कथित तौर पर उसका यौन उत्पीड़न किया. पुलिस के साथ मुठभेड़ के बाद आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है.
कालकाजी मामला हाल के हफ्तों में दिल्ली में नाबालिगों से जुड़े कई मामलों में सबसे नया है. वहीं बीती देर शाम यानी कि सोमवार को देश बंधु गुप्ता रोड पर छह साल की बच्ची के साथ कथित तौर पर यौन उत्पीड़न किया गया, जबकि सदर बाजार में एक दर्जी की दुकान के अंदर कक्षा 6 की छात्रा के साथ कथित तौर पर हमला किया गया. स्वरूप नगर में, एक नाबालिग के साथ कथित तौर पर गैंगरेप किया गया और उसकी हत्या कर दी गई. पुलिस ने तीनों मामलों में आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है.
एलजी के नए निर्देशों के तहत, प्रस्तावित पिंक फोर्स उन जगहों पर महिला पुलिसकर्मियों की मौजूदगी पर फोकस करेगी, जहां महिलाओं और लड़कियों के खास तौर पर असुरक्षित होने की संभावना है. स्कूल, कॉलेज, मेट्रो स्टेशन और दूसरे सेंसिटिव इलाकों की पहचान पेट्रोलिंग बढ़ाने के लिए की गई है.
LG ने पब्लिक शिकायतों की डिजिटल मॉनिटरिंग के लिए भी कहा है, जिसमें निर्देश दिए गए हैं कि हर शिकायत पर तय समय में कार्रवाई की जानी चाहिए. इन निर्देशों का मकसद अकाउंटेबिलिटी में सुधार करना और यह पक्का करना है कि शिकायतें बिना कार्रवाई के पेंडिंग न रहें. लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या पेट्रोलिंग पर ज़्यादा महिला पुलिस कर्मी अकेले दिल्ली को सुरक्षित बना सकती हैं.
कालकाजी मामला याद दिलाता है कि सड़कों पर विजिबिलिटी समस्या का सिर्फ़ एक हिस्सा है. कथित हमलावर पुलिस अधिकारी बनकर एक पार्क के अंदर एक लड़की और उसके दोस्त से संपर्क करने में कामयाब रहे. यह घटना एक पब्लिक जगह पर हुई, जो बड़े धार्मिक स्थलों के पास थी, फिर भी कथित तौर पर हमला PCR कॉल पर पुलिस के मौके पर पहुंचने से पहले ही हो गया था.
यह भी सवाल है कि क्या अभी बताए गए उपायों को तुरंत हुए गुस्से से आगे बनाए रखा जा सकता है.
जून में, LG ने पहले ही स्कूलों और स्टूडेंट हब के आसपास ज्यादा पुलिस तैनात करने का निर्देश दिया था, साथ ही POCSO फ्रेमवर्क के तहत स्कूलों का पूरा ऑडिट करने का भी निर्देश दिया था. जुलाई में, दिल्ली पुलिस ने स्कूलों में सेफ्टी चेक शुरू किए, जिसमें CCTV कैमरे, लाइटिंग, एंट्री और एग्जिट पॉइंट और इमरजेंसी प्लान की जांच शामिल थी.
यह एक बड़े मुद्दे की ओर इशारा करता है
दिल्ली में जरूरी नहीं कि सेफ्टी निर्देशों की कमी हो. यह लागू करने, कवरेज और जवाबदेही से तय होगा कि वे ज्यादा सेफ्टी में बदलेंगे या नहीं. शहर में पहले से ही महिला पुलिसकर्मियों, कमजोर जगहों पर पेट्रोलिंग और महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों के लिए खास इंस्टीट्यूशन शामिल हैं. दिल्ली पुलिस ने जून में अपना पहला खास महिला पुलिस स्टेशन भी खोला.
इसलिए, ‘पिंक फोर्स’ के लिए असली टेस्ट यह नहीं होगा कि कितनी महिला ऑफिसर तैनात की जाती हैं या कितनी पेट्रोलिंग की जाती है.
यह होगा कि क्या कमजोर जगहों को असल में कवर किया जाता है, शिकायतों पर समय पर कार्रवाई होती है, पब्लिक जगहों पर ठीक से नजर रखी जाती है और पुलिस की मौजूदगी एक रोकथाम बनती है, न कि किसी अपराध के बाद सिर्फ एक और घोषणा.
पिछले दो हफ्तों में दिल्ली में नाबालिगों के साथ यौन उत्पीड़न के चार मामले सामने आए हैं, इसलिए अब सवाल सिर्फ पुलिसिंग की एक और लेयर जोड़ने का नहीं है. बल्कि यह है कि क्या मौजूदा लेयर तब काम कर रही हैं जब महिलाओं और लड़कियों को सच में उनकी जरूरत होती है.