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जामिया मिल्लिया इस्लामिया (Jamia Millia Islamia) में छात्रसंघ (Student Union) की बहाली की मांग को लेकर छात्रों का प्रदर्शन 18वें दिन भी जारी है. छात्र पिछले लगभग 20 साल से बंद पड़े छात्रसंघ के चुनाव कराने, चुनाव की पक्की तारीख घोषित करने और संविधान को मंजूरी देने के लिए स्पष्ट समय-सीमा तय करने की मांग कर रहे हैं. 26 अक्टूबर को विश्वविद्यालय प्रशासन ने आदेश जारी किया था कि संविधान को मंजूरी मिलने के 15 दिनों के अंदर छात्र संघ के चुनाव कराए जाएंगे. प्रशासन ने छात्रों के निलंबन और शो-कॉज नोटिस भी वापस ले लिए थे. छात्र इस बात पर अड़े हैं कि प्रशासन ने संविधान को पास करने की कोई निश्चित तारीख नहीं दी है और वे भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों और दूसरी मांगों पर स्पष्टता चाहते हैं.
वहीं जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी से PHD की पढ़ाई कर रही उजमा बताती हैं कि हम लोगों का आज 18वें दिन भी जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी कैंपस के अंदर प्रदर्शन जारी है. जामिया एडमिनिस्ट्रेशन के द्वारा हम सभी प्रदर्शन कर रहे छात्रों के प्रति कड़ा रवैया अपनाया जा रहा है. सबसे पहले जामिया प्रशासन से जब हम लोगों की बातचीत हुई थी, तब उन्होंने कहा था कि जितने भी छात्र को सस्पेंशन नोटिस दिया गया था उसे वापस ले लिया जाएगा. इसके साथ ही चुनाव की तारीख का ऐलान किया जाएगा, लेकिन उन्होंने कोई समय सीमा नहीं बताया. उनके द्वारा कहा गया है कि संविधान बनने के बाद आप लोगों का चुनाव कराया जाएगा, लेकिन समय नहीं बताया गया, जिसको लेकर छात्र नाराज थे. उन्होंने अपना प्रदर्शन नहीं छोड़ा और आज भी प्रदर्शन जारी है.
वहीं, अब हम लड़कियों को हर रोज एडमिनिस्ट्रेशन की तरफ से नई-नई धमकियां दी जा रही हैं. हमें कहा जा रहा है कि अगर आप प्रदर्शन में शामिल होती हैं, तो आपको हॉस्टल खाली करना पड़ेगा और यूनिवर्सिटी से रस्टिकेट कर दिया जाएगा. प्रदर्शन में लड़कों के साथ शामिल होने को लेकर भी हम लड़कियों से गंदी और अभद्र बातें कही जा रही हैं, जो बेहद शर्मनाक है.
हमारी एडमिनिस्ट्रेशन से मांग है कि हॉस्टल के पास बैठकर इस तरह की अभद्र बातें करने वाले लोगों को तुरंत वहां से हटाया जाए. हम लड़कियां किसी इमरजेंसी की वजह से हॉस्टल में रुकती हैं. ऐसे में हमारे साथ इस तरह के अपशब्दों का इस्तेमाल करना बिल्कुल गलत है. एडमिनिस्ट्रेशन को इस मामले में सख्त रवैया अपनाना चाहिए और ऐसे लोगों को तुरंत वहां से हटाना चाहिए. हमारी बस एक ही मांग है कि जामिया प्रशासन छात्र संघ चुनाव कराने की तय समय सीमा बताए. अगर ऐसा नहीं होता है, तो हमारा प्रदर्शन इसी तरह जारी रहेगा.
वहीं छात्र बताते हैं कि वो इंजीनियरिंग फैकेल्टी से आते हैं, जब हम लोगों का एडमिनिस्ट्रेशन से बातचीत हुआ स्टूडेंट यूनियन के चुनाव को लेकर तो उन्होंने जो 2016 में आश्वासन हमें दिया था फिर से वही आश्वासन दिया जा रहा है. ऐसे में इस बार छात्र उनके सहमति में सहमत नहीं होने वाले हैं. जामिया प्रशासन रात के समय में छात्रों से मिलने के लिए पहुंचते हैं. उन्हें डरा धमका कर उनसे सिग्नेचर कराया जाता है, लेकिन फिर भी हम लोग अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं. हम लोग चाहते हैं कि हमारा यूनिवर्सिटी फिर से रिओपन हो, हम लोग ऑनलाइन क्लासेस का बाय काट करते हैं. हम लोगों को ऑफलाइन क्लासेस दिया जाए और जामिया प्रशासन छात्र संघ चुनाव का तारीख का ऐलान करें.
बता दें कि गुरुवार 29 अक्टूबर को जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी का फाउंडेशन डे भी है, लेकिन छात्रों के प्रदर्शन को देखते हुए जामिया प्रशासन के द्वारा अपने सभी प्रोग्राम को कैंसिल कर दिया गया है. वहीं 12 अक्टूबर से स्टूडेंट यूनियन की मांग को लेकर लगातार छात्रों का प्रदर्शन आज 18वें दिन भी जारी है.
(दिल्ली से हरि किशोर साह की रिपोर्ट)