दिल्ली में भारत अंतरराष्ट्रीय चावल सम्मेलन 2026 की शुरुआत हो गई है. भारत मंडपम में तीन दिवसीय सम्मेलन 25 अक्टूबर तक आयोजित किया गया है. इसमें 150 से अधिक देशों के खरीदारों ने पंजीकरण कराया है, जिसमें 4,649 पंजीकरण हुए हैं. इस सम्मेलन के दौरान चावल उद्योग वैश्विक कीमतों और मांग में बदलाव के बीच अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के साथ कारोबारी संबंधों का विस्तार करने की कोशिश कर रहा है. इसमें कुवैत, दक्षिण अफ्रीका, बेनिन, नाइजीरिया, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और सऊदी अरब तक के खरीदार शामिल हैं. ऐसे में आइए जानते हैं इस सम्मेलन क्या खास है. साथ ही भारतीय चावल कारोबार के लिए इसका क्या महत्व है.
इस सम्मेलन को चावल निर्यातकों, खरीदारों और कारोबार से जुड़े लोगों को एक मंच पर लाने का आयोजन माना जा रहा है. इस दौरन 65 वक्ता हिस्सा लेंगे. साथ ही इसके तहत 9 ज्ञान सत्र आयोजित किए जाएंगे. साथ ही कारोबारियों के बीच 2,038 बैठकें पहले से तय की गई हैं. भारत मंडपम में हो रहे इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य नए बाजारों की पहचान करना है.
इस आयोजन में सबसे ज्यादा चर्चा साल 2027 में चावल की कीमतों को लेकर होगी. शुरुआती सत्र में विशेषज्ञ ये समझेंगे कि आने वाले साल में वैश्विक बाजार में चावल के दाम बढ़ेंगे या घटेंगे. इसमें बासमती और गैर-बासमती चावल की कीमतों पर खास तौर पर चर्चा की जाएगी.
चावल का इस्तेमाल पूजा के दौरान किया जाता है. साबुत चावल के दानों को पूजा में अक्षत कहा जाता है. इन्हें तिलक के साथ देवी-देवताओं को चढ़ाया जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अक्षत को शुभ और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है.
चावल से निकलने वाले स्टार्च (जिसे मांड भी कहा जाता है) का इस्तेमाल कपड़ों को कड़क (क्रिसप), नया जैसा दिखाने और चमकदार बनाने के लिए किया जाता है.
भारतीय विवाह परंपराओं में चावल का इस्तेमाल आशीर्वाद, मंगलकामना और समृद्धि की कामना के लिए किया जाता है.
चावल की भूसी का इस्तेमाल ईंधन, पैकेजिंग सामग्री और कुछ निर्माण उत्पादों में किया जाता है। चावल की भूसी को उच्च दबाव में दबाकर छोटे-छोटे पेलेट्स या बड़े ब्रिकेट्स (बायो-कोयला) बनाए जाते हैं. इसका उपयोग बिजली संयंत्रों (जैसे NTPC), ईंट भट्टों और चावल मिलों के बॉयलरों में थर्मल ऊर्जा पैदा करने के लिए पारंपरिक कोयले के विकल्प के रूप में किया जाता है।
चावल की भूसी का इस्तेमाल ईंधन, पैकेजिंग और निर्माण से जुड़ी चीजें बनाने के लिए किया जाता है. इसे दबाकर छोटे पेलेट्स या बड़े ब्रिकेट्स बनाए जाते हैं, जिनका इस्तेमाल बिजली के लिए, ईंट भट्टों और चावल मिलों में गर्मी पैदा करने के लिए किया जाता है. ये पारंपरिक कोयले के ऑप्शन के रूप में भी काम आते हैं.
Rice Bran Oil वास्तव में चावल के दाने की सख्त बाहरी भूरी परत यानी चोकर (भूसी या ब्रान) से निकाला जाता है.
चावल का इस्तेमाल त्वचा के लिए भी किया जाता है. चावल का पानी और चावल का अर्क त्वचा और बालों के लिए बेहुत फायदेमंद माने जाते हैं. इसमें विटामिन-B, विटामिन-C, विटामिन-E, अमीनो एसिड, एंटीऑक्सीडेंट्स और मिनरल्स की मात्रा पाए जाते हैं.
बिना नमक, तेल या मसाले वाला चावल धोने का पानी कुछ पौधों में सीमित मात्रा में इस्तेमाल किया जा सकता है. चावल के पानी में थोड़ी मात्रा में नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटेशियम, स्टार्च और विटामिन होते हैं जो पौधों की हल्की ग्रोथ में मदद करते हैं.
कपड़े के पैक में सूखे चावल भरकर बनाया गया होममेड हीटिंग पैड (Rice Pack) गर्म सिकाई का एक फेमस तरीका है.
रंग-बिरंगे चावल के दाने (Colored Rice) बड़े बच्चों के लिए एक बेहतरीन, सुरक्षित और क्रिएटिव लर्निंग टूल हैं. बड़े बच्चों (जैसे 5 से 10 वर्ष) का मोटर स्किल और मानसिक स्तर बेहतर होता है.