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Delhi में प्रदर्शन के दौरान RAF-पुलिस के लिए बॉडी कैमरा अनिवार्य करने से HC ने किया इनकार, सरकार लेगी फैसला

दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रदर्शन और भीड़ नियंत्रण के दौरान RAF व दिल्ली पुलिस के लिए बॉडी-वॉर्न कैमरा अनिवार्य करने की मांग पर सीधे आदेश देने से इनकार करते हुए सरकार को 6 महीने में फैसला लेने को कहा है.

Written By Renu Akarniya
Published: Oct 07, 2026, 04:15 PM IST | Updated: Oct 07, 2026, 04:31 PM IST
Image Credit: Delhi में प्रदर्शन के दौरान RAF-पुलिस के लिए बॉडी कैमरा अनिवार्य करने से HC ने किया इनकार
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Delhi News: दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रदर्शन के दौरान RAF और दिल्ली पुलिस के अधिकारियों के लिए बॉडी-वॉर्न कैमरा अनिवार्य करने की मांग वाली याचिका पर सीधे सुनवाई से इंकार किया. कोर्ट ने याचिकाकर्ता वकील चाहत राघव से कहा कि वो सरकार को ज्ञापन दे. सरकार इस पर 6 महीने में फैसला लेकर याचिकाकर्ता को जानकारी दे. कोर्ट ने कहा कि हम सरकर को इस बारे में निर्देश नहीं दे सकते.

क्या है पूरा मामला?
दिल्ली हाईकोर्ट ने विरोध प्रदर्शनों और भीड़ नियंत्रण के दौरान दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के जवानों के लिए बॉडी-वॉर्न कैमरा (BWC) अनिवार्य करने की मांग वाली जनहित याचिका  पर सीधे कोई आदेश जारी करने से इनकार कर दिया है. कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नितिन वासुदेव साम्ब्र और न्यायमूर्ति अरुण भारद्वाज की पीठ ने कहा कि इस संबंध में न्यायिक आदेश जारी करने के दूरगामी परिणाम हो सकते हैं और कानून में ऐसा कोई "ग्रे एरिया" (अस्पष्टता) नहीं है, जिसके लिए अदालत के हस्तक्षेप की आवश्यकता हो.

हाईकोर्ट ने इस मामले पर सीधे फैसला सुनाने के बजाय केंद्र सरकार को निर्देश दिए हैं:
- कोर्ट ने सरकार से कहा कि वह इस याचिका को एक प्रतिवेदन (Representation) के तौर पर ले. 
- सरकार को इस विषय और स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) बनाने पर 6 महीने के भीतर निर्णय लेना होगा. 
- अगर याचिकाकर्ता सरकार के फैसले या कार्रवाई न करने से असंतुष्ट रहते हैं तो वे दोबारा अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं.

याचिका में क्या थी मुख्य मांगें
- यह याचिका मुख्य रूप से जुलाई 2026 में जंतर-मंतर पर हुए CJP के प्रदर्शनों के बाद दायर की गई थी, जहां पुलिस और प्रदर्शनकारियों दोनों की ओर से अत्यधिक बल प्रयोग और हिंसा के आरोप-प्रत्यारोप लगे थे. 
- याचिकाकर्ता का तर्क था कि बॉडी कैमरा होने से न केवल पुलिस की जवाबदेही तय होगी, बल्कि उपद्रवियों और हिंसक प्रदर्शनकारियों के खिलाफ भी पुख्ता डिजिटल सबूत मिल सकेंगे. 
- केंद्र सरकार ने अदालत को सूचित किया कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शनों के लिए वीडियोग्राफी के प्रावधानों सहित एक एसओपी पहले से ही लागू है. 
- इस बीच, दिल्ली पुलिस ने कानून-व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए नई दिल्ली इलाके में तैनात अपने अग्रिम पंक्ति के सुरक्षाकर्मियों को पहले ही बॉडी कैमरे जारी करना शुरू कर दिया है. 

बॉडी-वॉर्न कैमरा पुलिस या किसी भी सुरक्षा बल को क्यों इस्तेमाल करने चाहिए? 
बॉडी कैमरों का मकसद पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना है, लेकिन इससे प्राइवेसी को लेकर भी बहस छिड़ जाती है. जिन लोगों को फिल्माया जा रहा है (संदिग्ध, पीड़ित, गवाह) उनकी प्राइवेसी को लेकर बहस होती है. मगर कैमरा पहनने वाले अधिकारियों या उन अधिकारियों की प्राइवेसी को लेकर भी चिंता है, जिनके काम उनके साथी रिकॉर्ड करते हैं. इसलिए ये दोनों पक्षों के लिए जरूरी साबित हो सकता है.

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About the Author

रेनू अकर्णिया, वर्तमान में Zee News में सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं और दिल्ली-एनसीआर और हरियाणा की लेटेस्ट, ट्रेंडिंग कंटेंट, यूटिलिटी जुड़ी खबरों पर काम कर रहे हैं. रेनू पिछले 3 सालों से डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं. पत्रकारिता में ग्रेजुएशन करने के बाद उन्होंने 2022 में Zee News से करियर की शुरुआत की.  लोकल चैनल समाचार प्लस में इंटर्न से शुरुआत की और कारवां बढ़ता हुआ जी न्यूज पहुंचा.
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