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महिला पहलवानों की अपील पर कोर्ट सख्त, बृजभूषण शरण सिंह से जुड़े मामले में कोर्ट ने दिया एक हफ्ते का समय

भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह को काउज एवेन्यू कोर्ट ने अपना जवाब एक हफ्ते में दाखिल करने को कहा है. कोर्ट ने बुधावर की सुनवाई में साफ तौर पर कहा कि इसके बाद कोई समय नहीं दिया जाएगा.

Written By Akanchha Singh
Published: Oct 28, 2026, 01:30 PM IST | Updated: Oct 28, 2026, 01:43 PM IST
Image Credit: Brij Bhushan Sharan Singh X
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दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह को राहत देने वाले मामले में अपना जवाब दाखिल करने के लिए एक हफ्ते का मौका दिया है. बुधवार 28 अक्टूबर को हुई सुनवाई में कोर्ट ने कहा कि इसके बाद जवाब दाखिल करने के लिए कोई समय नहीं दिया जाएगा.  

कौन सा है ये मामला? 

ये मामला चार महिला पहलवानों की तरफ से दायर अपील से जुड़ा हुआ है. इन पहलवानों ने WFI के पूर्व सहायक सचिव विनोद तोमर को बरी करने के ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती दी है. इसके साथ ही तोमर को क्रिमिनल धमकी के आरोप में बरी किए जाने के फैसले को चुनौती दी है.

अपील करने वाली महिला पहलवानों का कहना है कि ट्रायल कोर्ट का फैसला कानून के हिसाब से टिकने लायक नहीं है और रिकॉर्ड में मौजूद सबूतों का सही तरीके से आकलन नहीं किया गया है. राउज एवेन्यू कोर्ट ने 28 सितंबर को बृजभूषण सिंह और विनोद तोमर को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था. इसके बाद 9 अक्टूबर को भी उन्हें जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय दिया गया था. ऐसे में अब कोर्ट ने 1 हफ्ते के अंदर जवाब देने का निर्देश दिया है.

मजिस्ट्रेट अश्विनी पंवार ने क्या कहा था

वहीं 3 अगस्त को एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट अश्विनी पंवार ने फैसला दिया था, जिसमें बृजभूषण सिंह और विनोद तोमर को बरी कर दिया गया था. कोर्ट ने कहा था कि प्रॉसिक्यूशन उनके खिलाफ आरोपों को बिना किसी शक के साबित करने में नाकाम रहा है. बता दें कि ये मामला 2023 का है, जब ओलंपियन विनेश फोगट, साक्षी मलिक और बजरंग पुनिया समेत कई पहलवानों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन किया था. इस दौरान बृजभूषण सिंह पर सेक्सुअल हैरेसमेंट और धमकी देने का आरोप लगाया गया था.

महिला पहलवानों ने क्या मांग की थी? 

पहलवानों ने WFI चीफ के पद से बृजभूषण शरण सिंह के इस्तीफे की मांग की थी और फेडरेशन को खत्म करने की मांग की थी. इस विवाद के बाद इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन (आईओए) की अध्यक्ष, पीटी उषा को शिकायत के बाद एक जांच कमेटी बनाई गई थी. इसके बाद केंद्रीय खेल मंत्रालय ने डब्ल्यूएफआई के कामकाज को निलंबित कर दिया. मई 2024 में, राउज एवेन्यू कोर्ट ने सिंह के खिलाफ यौन उत्पीड़न और पांच महिला पहलवानों के सम्मान को ठेस पहुंचाने के संबंध में आरोप तय किए. सिंह ने खुद को बेगुनाह बताया था और ट्रायल का सामना करने का फैसला किया था.

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Input- IANS

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About the Author

जी-न्यूज में ट्रेनी सब एडिटर. वर्तमान में दिल्ली-एनसीआर हरियाणा डिजिटल टीम में दिल्ली-एनसीआर-हरियाणा की राजनीति, हाइपर लोकल, क्राइम की खबरों पर नजर. यूटिलीटी की खबरों में दिलचस्पी है. 2023 में संस्थान से जुड़े. माखन लाल चतुर्वेदी भोपाल से पत्रकारिता में डिग्री हासिल की.
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