दिल्ली में इस दिन से बारापुला फेज-3 एलिवेटेड कॉरिडोर होगा शुरू, 40 मिनट की सफर अब 15 मिटन में होगा तय
29 सितंबर से दिल्ली का बारापुला फेज-3 एलिवेटेड कॉरिडोर आम लोगों के लिए शुरू होने जा रहा है. इससे मयूर विहार, ईस्ट दिल्ली और नोएडा से AIIMS व साउथ दिल्ली की कनेक्टिविटी बेहतर होगी और 35-40 मिनट का सफर करीब 15 मिनट में पूरा होने की उम्मीद है.
Delhi Barapullah Phase 3 Corridor: भारत के हर बड़े शहर में लोगों को ट्रैफिक जाम की समस्या का सामना करना पड़ता है. दिल्ली-NCR में ट्रैफिक जाम ने पिछले कुछ सालों में रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं, जिससे दिल्ली और उसके आसपास के इलाकों में गाड़ी चलाना मुश्किल हो गया है. हालांकि दिल्ली-NCR के सभी लोगों के लिए खुशी की बात है. ईस्ट दिल्ली और नोएडा से साउथ दिल्ली रोजाना आने-जाने वाले लोगों को अब घंटों लंबे ट्रैफिक जाम में नहीं फंसना पड़ेगा. ऐसा इसलिए क्योंकि दिल्ली का बारापुला फेज-3 एलिवेटेड कॉरिडोर 29 सितंबर को पूरी तरह से आम लोगों के लिए खुलने वाला है. इस नए कॉरिडोर के खुलने से मयूर विहार फेज-1 से सराय काले खां और AIIMS तक का सफर बहुत आसान और तेज हो जाएगा. इससे न सिर्फ आने-जाने वालों का फ्यूल बचेगा बल्कि समय भी काफी बचेगा.
बारापुला फेज-3 एलिवेटेड कॉरिडोर 29 सितंबर से शुरू
पिछले 10 सालों से इंतजार कर रहे दिल्ली वालों का लंबा इंतजार खत्म होने वाला है. बारापुला फेज-3 एलिवेटेड कॉरिडोर 29 सितंबर को ट्रैफिक के लिए खोल दिया जाएगा. यह नया कॉरिडोर मयूर विहार फेज-1 को सीधे सराय काले खां से जोड़ता है.
सराय काले खां पर यह मौजूदा बारापुला कॉरिडोर से मिल जाएगा, जिससे पूरे कॉरिडोर की कुल लंबाई लगभग 9 किलोमीटर हो जाएगी. इस कनेक्शन से मयूर विहार से AIIMS और साउथ दिल्ली तक का पूरा रास्ता पूरी तरह से सिग्नल-फ्री हो जाएगा. गाड़ियां अब रेड लाइट पर रुके बिना तेज स्पीड से चलेंगी.
40 मिनट की दूरी सिर्फ 15 मिनट में होगी तय
ध्यान देने वाली बात यह है कि इस नए फ्लाईओवर के खुलने से ईस्ट दिल्ली और नोएडा से साउथ दिल्ली आने-जाने वाले यात्रियों को फायदा होगा. पहले, मयूर विहार, पटपड़गंज, या त्रिलोकपुरी से साउथ दिल्ली जाने वाले ड्राइवरों को लंबा चक्कर लगाना पड़ता था और भारी ट्रैफिक जाम से जूझना पड़ता था. इस दूरी को तय करने में कम से कम 35 से 40 मिनट लगते थे. लेकिन अब, इस नए 3.5 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड हिस्से के खुलने से यह समय घटकर सिर्फ 15 मिनट रह जाएगा. इससे रोजाना आने-जाने वालों का समय और फ्यूल दोनों ही काफी बचेंगे.
यमुना पर एक खास पुल
जानकारी के मुताबिक, यह कॉरिडोर बहुत खास और मॉडर्न टेक्नोलॉजी पर आधारित है. यमुना नदी के बाढ़ के मैदान पर एक खास एक्स्ट्राडोज्ड पुल बनाया गया है. यह पुल केबल और गर्डर टेक्नोलॉजी का एकदम सही मेल है, जो लगभग 125 मीटर तक फैला है. ट्रैफिक जाम से पूरी तरह बचने के लिए, कुल आठ लूप बनाए गए हैं.
जहां मयूर विहार और सराय काले खां दोनों जगहों से गाड़ियां आसानी से आ-जा सकती है. वहीं इस एलिवेटेड कॉरिडोर में देश में पहली बार एक डेडिकेटेड साइकिल ट्रैक और पैदल चलने वालों के लिए रास्ता भी है.
₹1,635 करोड़ की लागत
2014 में मंजूर हुए इस प्रोजेक्ट का कंस्ट्रक्शन 2015 में शुरू हुआ था. जमीन अधिग्रहण के झगड़े, एनवायरनमेंटल क्लीयरेंस और यमुना नदी बेसिन में कंस्ट्रक्शन की चुनौतियों की वजह से इसमें काफी देरी हुई. शुरू में इस प्रोजेक्ट पर लगभग ₹1,260 करोड़ खर्च होने का अनुमान था.
हालांकि, लगातार देरी की वजह से प्रोजेक्ट की रिवाइज्ड लागत लगभग ₹1,635 करोड़ तक पहुंच गई. आखिरकार, सभी रुकावटें दूर हो गई हैं और प्रोजेक्ट पूरा हो गया है. यह कॉरिडोर गाड़ियों से होने वाले कार्बन एमिशन को कम करने और राजधानी में ग्रीन कनेक्टिविटी देने में एक मील का पत्थर साबित होगा.