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दिवाली से पहले राजधानी में वायु प्रदूषण का लेवल और खराब हो गया है. छोटी दिवाली के दिन स्मॉग की मोटी चादर ने राष्ट्रीय राजधानी को घेर लिया, जिससे कई इलाकों में विजिबिलिटी कम हो गई. राजधानी में शानिवार को प्रदूषण का स्तर 'बहुत खराब' श्रेणी में रहा और औसत वायु प्रदूषण AQI 369 रहा.
सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) के अनुसार, लोधी रोड पर AQI 246 रिकॉर्ड किया गया, जबकि IMD लोधी रोड स्टेशन पर 275 रिकॉर्ड किया गया, दोनों ही खराब श्रेणी में हैं. कई दूसरे मॉनिटरिंग स्टेशनों ने AQI लेवल 300 से ऊपर बताया जा रहा है.
दिवाली पर और भी खराब हो सकती है दिल्ली की हवा
रविवार को एयर क्वालिटी 'खराब' होने का अनुमान है, दिवाली के जश्न, गाड़ियों से निकलने वाले धुएं और पराली जलाने के पीक सीज़न की वजह से प्रदूषण का बोझ और बढ़ने की उम्मीद है.
शनिवार को दिल्ली के डेटा रिकॉर्ड करने वाले 59 मॉनिटरिंग स्टेशनों में से 16 में एयर क्वालिटी 'खराब' कैटेगरी में रही, जबकि 29 में यह 'बहुत खराब' कैटेगरी में रही. सबसे खराब AQI IIT दिल्ली के पास 452 रिकॉर्ड किया गया.
सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) के अनुसार, लोधी रोड पर AQI 246 रिकॉर्ड किया गया, जबकि IMD लोधी रोड स्टेशन पर 275 रिकॉर्ड किया गया, दोनों ही खराब श्रेणी में हैं. कई दूसरे मॉनिटरिंग स्टेशनों ने AQI लेवल 300 से ऊपर बताया जा रहा है.
दिवाली पर और भी खराब हो सकती है दिल्ली की हवा
रविवार को एयर क्वालिटी 'खराब' होने का अनुमान है, दिवाली के जश्न, गाड़ियों से निकलने वाले धुएं और पराली जलाने के पीक सीज़न की वजह से प्रदूषण का बोझ और बढ़ने की उम्मीद है.
शनिवार को दिल्ली के डेटा रिकॉर्ड करने वाले 59 मॉनिटरिंग स्टेशनों में से 16 में एयर क्वालिटी 'खराब' कैटेगरी में रही, जबकि 29 में यह 'बहुत खराब' कैटेगरी में रही. सबसे खराब AQI IIT दिल्ली के पास 452 रिकॉर्ड किया गया.
सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) के अनुसार, 0 से 50 के बीच के AQI को 'अच्छा', 51 से 100 को 'संतोषजनक', 101 से 200 को 'मध्यम', 201 से 300 को 'खराब', 301 से 400 को 'बहुत खराब', और 401 से 500 को 'खराब' माना जाता है.
दिल्ली के लिए एयर क्वालिटी अर्ली वार्निंग सिस्टम (EWS) के अनुसार, 8 और 9 नवंबर को एयर क्वालिटी 'खराब' कैटेगरी में रहने की संभावना है. मौसम और एयर क्वालिटी एक्सपर्ट्स ने खराब मौसम, दिवाली से जुड़े त्योहारों और गाड़ियों से निकलने वाले धुएं और पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने के पीक टाइम को इस खराब स्थिति की वजह बताया है. खराब मौसम की वजह से हालात और बिगड़ रहे हैं. EWS के मुताबिक, 6,000 स्क्वायर मीटर प्रति सेकंड से कम वेंटिलेशन इंडेक्स और 10 किलोमीटर प्रति घंटे से कम की औसत हवा की स्पीड, पॉल्यूटेंट के असरदार फैलाव के लिए ठीक नहीं है.
शनिवार को देश की राजधानी में PM10 सबसे बड़ा पॉल्यूटेंट था.
दिल्ली के लिए डिसीजन सपोर्ट सिस्टम (DSS) के मुताबिक, शनिवार को शहर के प्रदूषण में ट्रांसपोर्ट सेक्टर का सबसे बड़ा योगदान था, जिसका हिस्सा 21.4% था. पराली जलाने का हिस्सा 1.7% आंका गया और अनुमान है कि रविवार को यह बढ़कर 5.4% हो सकता है.
पराली जलाने के मामले
इंडियन एग्रीकल्चरल रिसर्च इंस्टीट्यूट की कंसोर्टियम फॉर रिसर्च ऑन एग्रोइकोसिस्टम मॉनिटरिंग एंड मॉडलिंग फ्रॉम स्पेस (CREAMS) लेबोरेटरी के सैटेलाइट डेटा मुताबिक, शुक्रवार को छह राज्यों में पराली जलाने की 589 घटनाएं सामने आईं. इनमें से पंजाब में 357, हरियाणा में नौ, उत्तर प्रदेश में 23, राजस्थान में 58, उत्तराखंड में तीन और मध्य प्रदेश में 139 घटनाएं रिपोर्ट की गईं. 15 सितंबर से 6 नवंबर के बीच छह राज्यों में खेतों में आग लगने की कुल 6,226 घटनाएं सामने आई हैं.
दिवाली पर पटाखे जलाने की टाइमिंग
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट राजधानी में दिवाली के मौके पर 7 और 8 नवंबर को रात 8 से 10 बजे तक ग्रीन पटाखे जलाने की अनुमति दी है. शनिवार को पटाखे जलाने से हवा और भी खराब हो गई है. दिवाली के मौक पर यह भी ज्यादा खराब हो सकती है.