CJP नेता सौरव दास और आशुतोष रांका पहुंचे क्राइम ब्रांच, क्या है पूरा मामला?
दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर प्रोटेस्ट मामले में CJP के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को पूछताछ के लिए बुलाया है. दोनों नेता गुरुवार को रजौरी गार्डन स्थित क्राइम ब्रांच कार्यालय पहुंचे. दिल्ली पुलिस ने इन सभी को हिरासत में ले लिया था.
दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर प्रोटेस्ट मामले में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को गुरुवार को पूछताछ के लिए बुलाया. CJP के सदस्यों को रजौरी गार्डन के दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच कार्यालय में पेश होने के लिए कहा गया. दोनों नेता क्राइम ब्रांच कार्यालय पहुंच गए हैं.
किस मामले में भेजा था समन?
इससे पहले अक्टूबर में भी दिल्ली पुलिस ने दास और रांका को समन भेजा था. हालांकि, वो समन पर पेश नहीं हुए और बाद में पूछताछ के लिए क्राइम ब्रांच के सामने हाजिर होने के लिए और समय मांगा. सीजेपी नेताओं के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन से जुड़े मामले अक्टूबर में क्राइम ब्रांच को सौंप दिए गए थे. ये मामले 13 अक्टूबर की उस घटना से जुड़े हैं, जब दास, रांका और अजिंक्य शिंदे 11 अन्य लोगों के साथ जंतर-मंतर में घुस गए थे. जंतर-मंतर को अब विरोध-प्रदर्शन के लिए निर्धारित जगह के रूप में हटा दिया गया है.
क्यों लिया था हिरासत में
दिल्ली पुलिस ने इन सभी को हिरासत में ले लिया था. शिंदे को तो जमानत बॉन्ड पर रिहा कर दिया गया, लेकिन सौरव दास और रांका एक सप्ताह तक न्यायिक हिरासत में रहे थे. सीजेपी सदस्य मतदाता सूची के 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं के खिलाफ विरोध कर रहे थे और उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारे भी लगाए.
21 अक्टूबर को एक सप्ताह की न्यायिक हिरासत के बाद दास और रांका को तिहाड़ जेल से रिहा कर दिया गया. उन्होंने एक विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (एसईएम) के सामने लिखित अंडरटेकिंग दी, जिसमें उन्होंने शांति बनाए रखने और जंतर-मंतर पर विरोध-प्रदर्शन का आह्वान न करने का भरोसा दिलाया था. जंतर-मंतर पर अनाधिकृत प्रवेश के मामले में चल रही जांच पूरी होने तक एसईएम ऋतु राज ने दोनों कार्यकर्ताओं को 50,000-50,000 रुपये के निजी मुचलके और जमानत बांड भरने पर रिहा करने का आदेश दिया.
अपने लिखित वचनपत्रों में दोनों कार्यकर्ताओं ने शांति भंग न करने का वादा किया और न्यायपालिका तथा एसईएम कोर्ट सहित उसकी सभी इकाइयों में पूरा भरोसा जताया. एसईएम कोर्ट ने माना कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 135(3) के तहत शांति भंग या सार्वजनिक व्यवस्था में खलल को रोकने के लिए तत्काल कदम, बांड भरवाने और लिखित वचनपत्र लेने के माध्यम से प्रभावी ढंग से उठाए जा सकते हैं.
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