राजधानी दिल्ली में प्रदर्शनों का दौर जारी है. शुक्रवार को भी गहमागहमी बनी रही. इसी कड़ी में दिल्ली पुलिस ने पहले अभिजीत दीपके और फिर आइसा प्रेसिडेंट नेहा बोरा को हिरासत में लिया. यह कार्रवाई सीजेपी के अभिजीत दीपके को हिरासत में लिए जाने के कुछ मिनट बाद हुई. नेहा बोरा को मंडी हाउस के पास से उस समय हिरासत में लिया गया, जब वह आइसा और अन्य वामपंथी संगठनों के कार्यकर्ताओं के साथ सीजेपी के 'लहरा दो तिरंगा' प्रदर्शन में शामिल होने जा रही थीं.
असल में नेहा बोरा का प्रदर्शन कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में शाम 5 बजे आयोजित होने वाली 'तिरंगा सभा' के समर्थन में किया जाना था. पुलिस की कार्रवाई ऐसे समय में हुई जब आयोजकों ने अपने दो साथियों की गिरफ्तारी के विरोध में तिरंगा फहराने और सभा करने का आह्वान किया था.
अभिजीत दीपके ने कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में तिरंगा सभा आयोजित करने की अपील की थी. इसका उद्देश्य सीजेपी के सह-संयोजकों सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी के विरोध में लोगों को एकत्र करना था. दीपके ने समर्थकों से सभा में पहुंचकर तिरंगा फहराने की अपील की थी.
इससे पहले दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को ही उन्हें दो नोटिस जारी कर कनॉट प्लेस में सभा आयोजित नहीं करने की हिदायत दी थी. पुलिस के मुताबिक नई दिल्ली नगरपालिका परिषद ने कार्यक्रम के लिए अनुमति नहीं दी थी. इसके अलावा कार्यक्रम स्थल पर निषेधाज्ञा लागू थी. पुलिस ने चेतावनी दी थी कि इन प्रतिबंधों का उल्लंघन करने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी. इसके बावजूद प्रदर्शन में शामिल होने की तैयारी कर रहे पार्टी और छात्र संगठनों के कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई की गई.
अधिकारियों के मुताबिक दीपके को जारी किए गए नोटिस में से एक नई दिल्ली जिला प्रशासन की ओर से दिल्ली पुलिस अधिनियम के तहत जारी किया गया था. इसमें उन्हें सेंट्रल पार्क नहीं जाने का निर्देश दिया गया, क्योंकि वहां भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता बीएनएसएस की धारा 163 लागू थी. दूसरा नोटिस दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के अधिकारियों की ओर से जारी किया गया था. इसमें दीपके को याद दिलाया गया कि हवाई अड्डे पर एहतियातन हिरासत में लिए जाने और बाद में अदालत में पेश किए जाने के बाद उन्हें, आशुतोष रांका और सौरव दास को कानूनी रूप से पाबंद किया गया था.
जानकारी के मुताबिक अदालत के निर्देश के तहत उन्हें एक वर्ष तक ऐसी गतिविधियों से दूर रहने को कहा गया था जिनसे सार्वजनिक शांति भंग होने की आशंका हो सकती है. पुलिस की तरफ से जारी नोटिस और लागू प्रतिबंधों के बीच तिरंगा सभा को लेकर तनाव की स्थिति बनी हुई थी.
उधर सीजेपी की तरफ से बताया गया कि प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य यह बताना है कि राष्ट्रीय ध्वज कहां फहराना है. यह तय करना नागरिकों का अधिकार है. उन्होंने कहा कि कोई भी उन्हें यह नहीं बता सकता कि वे अपना राष्ट्रीय ध्वज कहां फहराएं और इस बारे में फैसला वे खुद करेंगे. सीजेपी के मुताबिक राष्ट्रीय ध्वज लंबे समय से देशभक्ति का प्रतीक रहा है और इसे फहराने के रास्ते में बाधा नहीं होनी चाहिए. फिलहाल दिल्ली पुलिस ने कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क के आसपास से प्रदर्शनकारियों को हटा दिया है.