अनोखी अदालत: सालभर क्या किया? कटघरे में इंसानों की जगह देवी-देवताओं से सवाल, दोषी मिलने पर सुनाई जाती है सजा
Kondagaon News: कोंडागांव जिले के केशकाल में भांगाराम देवी मंदिर में भादोम जात्रा के मौके पर सदियों पुरानी आदिवासी परंपरा निभाई गई. यहां लगी अनोखी अदालत में इंसानों की जगह 9 परगना के देवी-देवताओं की पेशी हुई.
छत्तीसगढ़ के बस्तर इलाके के कोंडागांव जिले के केशकाल में आस्था और आदिवासी संस्कृति का एक अनोखा संगम देखने को मिला. भादोम जात्रा के दौरान तेलिन सती माई मंदिर के पास भंगाराम देवी के मंदिर में देवताओं की एक अनोखी अदालत लगाई गई. इस परंपरा में कटघरे में इंसान नहीं, बल्कि नौ परगनों (प्रशासनिक क्षेत्रों) के देवता खड़े हुए. माना जाता है कि इस आयोजन के दौरान पिछले एक साल में देवताओं के कामों का हिसाब-किताब देखा जाता है. अगर उनके कर्तव्यों या जिम्मेदारियों में कोई लापरवाही पाई जाती है, तो संबंधित देवता को दोषी माना जाता है और परंपरा के अनुसार सजा दी जाती है.
कटघरे में इंसानों की जगह देवी-देवताओं से सवाल
दरअसल, केशकाल में तेलीन सती माई मंदिर के पास और टाटामारी टूरिज्म रूट पर देवी भंगाराम के मंदिर में एक जात्रा पूजा का आयोजन हुआ. इस दौरान इलाके के नौ परगना के देवी-देवता अपने-अपने पुजारियों, सिरहा, गुनिया, माझी और गायता-मुखिया के साथ मंदिर पहुंचे. परंपरा के अनुसार, देवी भंगाराम के दरबार में इन देवी-देवताओं की उपस्थिति अनिवार्य है. इस अनोखी सभा में पिछले एक साल में देवी-देवताओं के कामकाज की समीक्षा की जाती है. भक्तों की शिकायतों और स्थानीय मान्यताओं के आधार पर यह देखा जाता है कि क्या संबंधित देवता ने अपनी जिम्मेदारियां ठीक से निभाई हैं. माना जाता है कि अगर किसी देवता का कामकाज संतोषजनक नहीं पाया जाता है, तो उन्हें देवी भंगाराम के दरबार में दोषी माना जाता है.
पशु बलि की परंपरा
भादो महीने के कृष्ण पक्ष के शनिवार को हर साल भांगाराम देवी की यह यात्रा आयोजित की जाती है. जात्रा से पहले लगातार छह शनिवार तक विशेष पूजा-अर्चना की जाती है और सातवें शनिवार को भादो जात्रा का आयोजन होता है. जात्रा के दिन पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ देवी-देवताओं की पूजा की जाती है. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, फूलों और सुपारी के साथ पशु बलि की परंपरा भी निभाई जाती है.
अनोखी अदालत देखने दूर-दूर से पहुंचे लोग
इस परंपरा की एक खास बात यह है कि जात्रा के दिन महिलाओं का दरबार में प्रवेश वर्जित होता है. यह भी माना जाता है कि भंगाराम माई की अनुमति के बिना इस क्षेत्र में किसी नए देवता की पूजा शुरू नहीं की जा सकती. आस्था, परंपरा और प्राचीन संस्कृति से गहराई से जुड़ी देवताओं की इस अनोखी अदालत को देखने के लिए कोंडागांव जिले और दूर-दराज के इलाकों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचे. इसी वजह से भंगाराम माई का दरबार लोगों के लिए आकर्षण का मुख्य केंद्र बना रहा.