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आज के दौर में सिर्फ सरकारी फाइलों में चमकती स्वास्थ्य व्यवस्था और जमीनी हकीकत के बीच का अंतर कितना खौफनाक और जानलेवा होता है. इसका जीता जागता उदाहरण छत्तीसगढ़ के सूरजपुर से सामने आया है. जहां पर स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही ने एक नवजात से दुनिया में आने से पहले ही जीने का हक छीन लिया है.
दरअसल, रात के अंधेरे में प्रसव पीड़ा से एक गर्भवती महिला पूजा सारथी कराह रही थी. तभी महिला को लेकर परिजन गणेशपुर के सरकारी अस्पताल पहुंचे. परिजनों को उम्मीद थी कि डॉक्टर और नर्स की देखरेख में सुरक्षित प्रसव हो जाएगा और उनके घर में किलकारी भी गूंजेगी. लेकिन वहां पहुंचते ही सिस्टम के खोखले दावों की पोल खुल गई.
गेट पर लगा मिला ताला
जिस प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को 24x7 घंटे खुला रहने का दावा किया गया था. उसी अस्पताल के गेट पर बड़ा सा ताला लटक मिला. हद तो तब हो गई, जब अस्पताल में अलग-अलग शिफ्ट में चौबीसों घंटे स्टाफ की ड्यूटी अनिवार्य होने और अस्पताल परिसर के ठीक अंदर ही डॉक्टर व नर्सों का सरकारी निवास होने के बाद भी रात में वहां कोई भी कर्मचारी मौजूद नहीं मिला, न ही कोई परिसर में मिला.
परिजनों ने लगाई गुहार
आराम फरमा रहे अधिकारी या नर्स ने एक तड़पती गर्भवती महिला की चीख-पुकार सुनने के बावजूद भी अस्पताल के गेट तक आने की जहमत नहीं उठाई. दर्द से छटपटाती महिला और बेबस परिजन मदद की गुहार लगाते रहे. लेकिन धरती के भगवान कहे जाने डॉक्टरों का दिल नहीं पसीजा. आखिरकार सिस्टम की इस क्रूर बेरुखी के आगे लाचार महिला का प्रसव अस्पताल के बंद पड़े गेट के बाहर जमीन पर ही हो गया.
नवजात मासूम की मौत
बिना किसी चिकित्सीय मदद और इलाज के अभाव में उस नवजात मासूम ने अस्पताल की चौखट पर ही दम तोड़ दिया. जिसने 9 महीने तक अपनी कोख में बच्चे को पालने वाली मां की गोद आबाद होने से पहले ही सूनी हो गई. स्वास्थ्य विभाग के इस नकारापन से आहत परिजनों ने अपने बच्चे की मौत का जिम्मेदार अस्पताल प्रबंधन को ठहराया.
परिजनों के बड़े आरोप
परिजनों ने आरोप लगाया है कि अगर समय पर ताला खुल जाता और स्टाफ अपनी ड्यूटी पर होता, तो आज वह मासूम जिंदा होता. सुबह होते ही जैसे ही यह खबर इलाके में फैली तो स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा. उन्होंने स्वास्थ्य विभाग की इस जानलेवा व्यवस्था के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. भारी संख्या में आक्रोशित ग्रामीणों ने अस्पताल का घेराव कर दिया.
एसडीएम ने समझाया
वहीं ग्रामीणों का कहना है कि जिस अस्पताल में इलाज के बजाय ताला मिले, जहां स्टाफ की नींद एक मरीज की जान से ज्यादा कीमती हो. ऐसे अस्पताल को तुरंत बंद कर देना चाहिए. आक्रोशित ग्रामीणों ने मांग की है. इतना ही नहीं उन्होंने यह भी कहा कि लापरवाह कर्मचारियों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए. जब यह जानकारी प्रेमनगर एसडीएम को मिली, तो मौके पर पहुंचे.
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जांच कमेटी का गठन
एसडीएम सुनील अग्रवाल ने आक्रोशित भीड़ को दोषियों पर सख्त कार्रवाई का आश्वासन देकर शांत कराया. इसके बाद मामले को गंभीरता से देखते हुए सीएमएचओ डॉक्टर प्रशांत सिंह ने इस लापरवाही के चलते जिम्मेदार चिकित्सा अधिकारी राजेश पटेल और स्टाफ नर्स प्रमिला गिरी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया. साथ ही इस पूरे मामले की जांच के लिए एसडीएम की अध्यक्षता में एक जांच टीम का भी गठन कर दिया. जांच के बाद दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाी की जाएगी.
(रिपोर्टः ओपी तिवारी, सूरजपुर)