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आज का दिन छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के लिए एक ऐतिहासिक दिन है.लंबे समय से विकास की राह देख रहे अति-संवेदनशील और अबूझमाड़ के प्रवेश द्वार कहे जाने वाले रावघाट तक आखिरकार रेल पहुंच गई है. आज, 20 अक्टूबर को केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय नई ताडोकी-रावघाट रेल लाइन का लोकार्पण करेंगे. इसके साथ ही रायपुर और ताडोकी के बीच चलने वाली यात्री ट्रेन का विस्तार रावघाट तक किया जाएगा. इस रेल लाइन का इंतजार सिर्फ कुछ सालों का नहीं, बल्कि एक सदी से भी ज्यादा पुराना है.
दरअसल, रायपुर-रावघाट और रायपुर-कुरुद के बीच आज से ट्रेनें दौड़ना शुरू हो जाएंगी. रेलवे बोर्ड ने इसके लिए मंजूरी दे दी है. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज इन ट्रेनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे. इस कार्यक्रम में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव वर्चुअल माध्यम से शामिल होंगे. आज ताड़ोकी-रावघाट रेल लाइन और अभनपुर-कुरुद ब्रॉडगेज लाइन का भी उद्घाटन किया जाएगा. इसके साथ ही रायपुर की WRS कॉलोनी में इलेक्ट्रिक रेल इंजन मेंटेनेंस फैसिलिटी का भी शुभारंभ होगा. नई रेल सेवाएं शुरू होने से यात्रियों, विद्यार्थियों और नौकरीपेशा लोगों को बड़ी राहत मिलेगी और आवागमन और आसान हो जाएगा.
आजादी के 79 साल बाद नक्सल प्रभावित रावघाट क्षेत्र के लिए इस रेल परियोजना का इतिहास लंबा रहा है और यह संघर्षों से भरा हुआ है. इस मार्ग के लिए पहला सर्वेक्षण 1914 में ब्रिटिश शासन के दौरान किया गया था, लेकिन यह परियोजना कभी योजना चरण से आगे नहीं बढ़ पाई. बाद में स्वतंत्र भारत में और एक लंबे संघर्ष के बाद इसे आखिरकार 1998-99 के रेल बजट में मंजूरी मिल गई. आखिरकार साल 2005 और 2007 के बीच रेलवे, सेल (SAIL) और छत्तीसगढ़ सरकार के बीच एक त्रिपक्षीय समझौता हुआ, जिससे इस परियोजना के जमीनी स्तर पर शुरू होने का रास्ता साफ हो गया.
दल्लीराजहरा से रावघाट तक लगभग 95 किलोमीटर लंबी रेल लाइन का निर्माण किसी युद्धक्षेत्र में काम करने जैसा था. यह पूरा इलाका नक्सली गतिविधियों से बुरी तरह प्रभावित है और अबूझमाड़ के करीब है, जहां नक्सलियों ने हमेशा विकास कार्यों में बाधा डालने की कोशिश की है. रेलवे ट्रैक बिछाने का यह चुनौतीपूर्ण काम असामाजिक तत्वों और नक्सलियों के लगातार खतरे के बीच पूरा किया जाना था. इस काम के दौरान देश की सेवा करते हुए तीन बहादुर सुरक्षाकर्मियों और चार समर्पित मजदूरों ने अपनी जान गंवा दी. नक्सलियों से लगातार बने रहने वाले खतरे को देखते हुए रेलवे और प्रशासन ने सुरक्षा के खास इंतजाम किए. पूरे निर्माण क्षेत्र में 5-5 किलोमीटर के अंतराल पर विशेष सुरक्षा शिविर स्थापित किए गए हैं.