झीरम घाटी कांड: बेटे को छोड़नी पड़ी पढ़ाई, कानूनी लड़ाई में टूटा परिवार...जेल में बंद पूर्व सरपंच के परिवार ने NIA जांच पर उठाए सवाल
Jheeram Ghati Case: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी घटना की जांच और आरोपियों को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं. दंतेवाड़ा के चिकपाल गांव के पूर्व सरपंच जोगा मरकाम के परिवार ने दावा किया है कि उन्हें इस मामले में गलत तरीके से फंसाया गया.
छत्तीसगढ़ के इतिहास की सबसे दर्दनाक घटना... झीरम घाटी कांड, जिसे याद कर आज भी बस्तर सिहर उठता है. लेकिन अब इसी मामले में एक नया मोड़ सामने आया है. जेल में बंद दंतेवाड़ा के चिकपाल गांव के पूर्व सरपंच जोगा मरकाम के परिवार ने न्याय की गुहार लगाई है. परिजनों का दावा है कि जोगा मरकाम को झीरम घाटी कांड में गलत तरीके से फंसाया गया है. परिवार का कहना है कि जब झीरम घाटी में नक्सली हमला हुआ, उस वक्त जोगा मरकाम हमले वाली जगह पर नहीं, बल्कि अपने घर में पारिवारिक शादी की तैयारियों में जुटे थे.
कानूनी लड़ाई में टूटा परिवार
जोगा के बेटे हेमलाल मरकाम के अनुसार, उनके पिता को पहले कनवरगांव के ठेकेदार तोमर की हत्या के मामले में गिरफ्तार किया गया था. हालांकि बाद में अदालत ने जोगा मरकाम को उस मामले में बरी कर दिया, लेकिन जेल में रहते हुए ही उन्हें झीरम घाटी मामले में आरोपी बना दिया गया. परिवार का दावा है कि गिरफ्तारी के समय जोगा के पास से कोई हथियार या नक्सल-संबंधी सामग्री बरामद नहीं हुई थी. उनका यह भी आरोप है कि पिता के लिए कानूनी लड़ाई लड़ने के दौरान उनकी आर्थिक स्थिति पूरी तरह बिगड़ गई. उन्हें अपनी खेती की जमीन, गायें और यहां तक कि बकरियां भी बेचनी पड़ीं. बेटे का कहना है कि इस मामले में अब तक लगभग दो से तीन लाख रुपये खर्च हो चुके हैं और आर्थिक तंगी के कारण उन्हें अपनी पढ़ाई भी छोड़नी पड़ी.
परिवार ने NIA जांच पर उठाए सवाल
NIA की जांच की गंभीरता पर सवाल उठाते हुए, परिवार के सदस्यों और ग्रामीणों का कहना है कि इतनी बड़ी घटना के असली दोषियों को सजा मिलनी चाहिए, न कि बेगुनाह ग्रामीणों को झूठे मामलों में फंसाकर जेल में डाला जाना चाहिए. परिवार अब सरकार, प्रशासन और अदालतों से मामले की निष्पक्ष दोबारा जांच और जोगा मरकाम की रिहाई की अपील कर रहा है. इस बीच, स्थानीय जन-प्रतिनिधि और ग्रामीण भी जोगा मरकाम के समर्थन में आगे आए हैं. उनका कहना है कि जांच में असली दोषियों की पहचान होनी चाहिए और किसी भी बेगुनाह ग्रामीण को लंबे समय तक जेल में नहीं रखा जाना चाहिए.
मास्टरमाइंड घूम रहे हैं- महेंद्र कर्मा की बेटी तुलिका
NIA द्वारा पहले से जेल में बंद 10 लोगों को दोषी ठहराए जाने पर शहीद महेंद्र कर्मा की बेटी तुलिका कर्मा ने कहा कि, "जो वाकई में झीरम कांड के मास्टरमाइंड हैं, वो आज बाहर घूम रहे हैं और सरकार के साथ नजर आ रहे हैं. कोर्ट ने जिन 10 लोगों को सजा सुनाई है, वे पहले से ही पिछले 10 से 13 सालों से जेल में अपनी सजा काट रहे हैं. सवाल यह है कि इस पूरी घटना को अंजाम देने वाले असली अपराधी कानून की पकड़ से क्यों बचते आ रहे हैं?"
दोषियों को सजा मिले
तुलिका ने आगे कहा, "जोगा मरकाम के मामले में भी गंभीर सवाल हैं. वह मेरे जिला पंचायत क्षेत्र के रहने वाले हैं. वहां के ग्रामीण और उनके परिवार वाले लगातार कह रहे हैं कि झीरम घटना वाले दिन जोगा मरकाम गांव में एक शादी समारोह में मौजूद थे. अगर ऐसा है, तो जांच एजेंसियों को इस पहलू की भी गंभीरता से जांच करनी चाहिए. एक तरफ सरकार बड़े नक्सली नेताओं के सरेंडर के बाद उन्हें जिम्मेदारियां और मौके दे रही है, वहीं दूसरी तरफ झीरम जैसी भयानक घटनाओं के पीड़ित परिवार अभी भी पूरी सच्चाई और न्याय का इंतज़ार कर रहे हैं. हमारी मांग है कि झीरम की पूरी साजिश का पर्दाफाश हो और जो भी असल में दोषी हो, उसे कानून के मुताबिक सजा मिले."