बिलासपुर हाई कोर्ट ने पूर्व सलवा जुडूम कर्मियों की सेवा शर्तों और अधिकारों से जुड़े मामले में राज्य शासन सहित अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है. मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति कृष्ण राम महापात्र और न्यायमूर्ति संतोष शर्मा की पीठ ने सुरेश कुमार उर्फ सुरेश निषाद की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया.
दरअसल, यह मामला उन कर्मियों की सेवा संबंधी पात्रताओं और अधिकारों से जुड़ा है, जिन्हें सलवा जुडूम अभियान के दौरान विशेष पुलिस अधिकारी के रूप में नियुक्त किए जाने के बाद छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल में शामिल किया गया था. याचिकाकर्ता ने सेवा शर्तों में कथित भेदभाव का मुद्दा उठाते हुए संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के तहत समानता तथा सार्वजनिक रोजगार में समान अवसर के अधिकार का हवाला दिया है.
सलवा जुडूम साल 2005 के आसपास बस्तर क्षेत्र में शुरू हुआ नक्सल विरोधी अभियान था. इससे जुड़े कुछ युवाओं को विशेष पुलिस अधिकारी (CPO) के रूप में नियुक्त किया गया था. साल 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने एसपीओ के सशस्त्र नक्सल विरोधी अभियानों में इस्तेमाल पर रोक लगाई थी. इसके बाद सलवा जुडूम से जुड़े कुछ कर्मियों को छत्तीसगढ़ आर्म्ड पुलिस फोर्स में शामिल किया गया.
सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता राज कुमार गुप्ता ने जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया. याचिकाकर्ता की ओर से सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता फतेश कुमार साहू और हाई कोर्ट के अधिवक्ता विद्याभूषण सोनी ने पैरवी की.
वहीं कोर्ट ने प्रतिवादियों को चार सप्ताह में जवाब दाखिल कर उसकी प्रति याचिकाकर्ता के अधिवक्ताओं को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है. मामले की अगली सुनवाई छह सप्ताह बाद होगी. फिलहाल हाई कोर्ट ने शासन से जवाब मांगा है और याचिका में उठाए गए मुद्दों पर अंतिम फैसला होना बाकी है.
(रिपोर्टः शैलेंद्र सिंह ठाकुर, बिलासपुर)