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छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर से एक बहुत ही अनोखी और दिलचस्प घटना सामने आई है. यहां रावण दहन को लेकर हुए एक विवाद के बाद भगवान राम, लक्ष्मण और हनुमान का किरदार निभाने वाले लोग न्याय की गुहार लेकर पुलिस थाने पहुंच गए. आयोजन समिति का आरोप है कि रावण दहन रात 10:00 बजे होना था, लेकिन पुतले को तय समय से 15 मिनट पहले ही जला दिया गया. अब सवाल यह उठता है कि पुतले को जलाने की इतनी जल्दी किसे थी, और इस जल्दबाजी के पीछे की असल कहानी क्या है?
दरअसल, यह पूरा मामला बिलासपुर के सिविल लाइंस थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले चांदनी चौक (कुडुदंड) का है. 20 अक्टूबर को दशहरा के मौके पर नव युवक श्रद्धा दुर्गा एवं दशहरा उत्सव समिति ने रावण का 35 फुट ऊंचा पुतला बनवाया था, जिस पर लगभग 40,000 रुपये का खर्च आया था. कार्यक्रम में भगवान राम, लक्ष्मण और हनुमान की झांकी और पारंपरिक रस्में शामिल थीं और रावण के पुतले को रात 10:00 बजे जलाया जाना था. सारी तैयारियां पूरी हो चुकी थीं, समय तय था और लोग बेसब्री से इस पल का इंतजार कर रहे थे. लेकिन दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार रावण के पुतले को रात 9:45 बजे ही जला दिया गया.
रावण का पुतला तय समय से पहले ही जला दिए जाने से नाराज होकर भगवान राम, लक्ष्मण और हनुमान का किरदार निभाने वाले लोग आयोजन समिति के सदस्यों के साथ पुलिस स्टेशन पहुंचे. समिति ने मनीष राव चौहान (उर्फ अंकित) और उनके साथियों पर आरोप लगाया है कि उन्होंने तय समय से पहले ही पुतले को आग लगा दी. अब सवाल यह उठता है कि रात के 9:45 बजे ही रावण के पुतले को इतनी जल्दी खत्म करने की क्या जरूरत थी?
शिकायत में समिति के भीतर पहले से मौजूद आंतरिक मतभेदों और धार्मिक व सामाजिक प्रकृति की टिप्पणियों से उपजे विवादों का भी जिक्र है. समिति के अनुसार, इस घटना से इसके सदस्यों और स्थानीय समुदाय के बीच काफी परेशानी और नाराजगी है. हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना अभी बाकी है और संबंधित पक्षों के बयान भी दर्ज नहीं किए गए हैं. सीमा चंद्रवंशी और अन्य सदस्यों ने सिविल लाइंस पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई है. पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 196, 299, 324(4) और 3(5) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. अब यह देखना होगा कि जांच में क्या सामने आता है. फिलहाल, रावण दहन के बाद बिलासपुर में एक विवाद जरूर खड़ा हो गया है.