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Bastar Naxal Story: रक्षाबंधन के मौके पर एक भावुक कर देने वाली कहानी सामने आई है. जहां एक पुलिस के जवान ने 22 साल बाद अपनी नक्सली बहन से राखी बंधवाई है. कभी दोनों के बीच बंदूकें थीं और दोनों ही जंगल में मौजूद थे. एक तरफ पुलिस की वर्दी में भाई वेट्टी रामा था, दूसरी तरफ नक्सली संगठन में शामिल बहन वेट्टी कन्नी थी. बस्तर में लंबे समय तक चले नक्सल हिंसा के दौर ने दोनों को एक दूसरे के आमने-सामने खड़ा कर दिया था.
भाई ने कभी भी अपनी बहन को भूला नहीं, उसका मकसद सिर्फ ड्यूटी निभाना नहीं था, बल्कि बहन को हिंसा के रास्ते से वापस लाना भी था. वेट्टी कन्नी साल 2003 में नक्सली संगठन में शामिल हो गई थी और उसका भाई वेट्टी रामा साल 2007 में संगठन छोड़कर समाज की मुख्यधारा में शामिल हो गया था. इसके बाद भाई ने सालों तक अपनी बहन को चिट्ठियां लिखकर वापस लौटने की अपील की. लेकिन नक्सली संगठन की तरफ से उसे घर जाने नहीं दिया गया. इसके बावजूद भाई ने उम्मीद नहीं छोड़ी.
एक बार आमने-सामने खड़े
किस्मत का खेल देखिए, जिन जंगलों में कभी दोनों एक-दूसरे के दुश्मन बनकर आमने-सामने खड़े हुए, उन्हीं जंगलों में एक मुठभेड़ के दौरान भाई-बहन की नजरें फिर से एक-दूसरे से टकरा गईं. वह मुलाकात बहुत ही भावुक कर देने वाली थी, लेकिन हालात ऐसे थे कि दोनों चाहकर भी एक दूसरे के पास नहीं आ सकते थे. इसके बाद भी उसके भाई की कोशिश लगातार जारी रही.
22 साल बाद मनाया त्योहार
कई साल बीत गए, चिट्ठियां लिखीं और वापस आने की अपील का सिलसिला लगातार चलता रहा. आखिरकार साल 2025 में वह दिन आया, जब वेट्टी कन्नी ने हथियार छोड़कर मुख्यधारा में आने का फैसला किया. सालों से बिछड़े भाई-बहन एक बार फिर से आमने-सामने आए. इस बार दुश्मन की तरह नहीं, बल्कि एक भाई-बहन के रूप में एक-दूसरे से मिले. ठीक 22 साल बाद रक्षाबंधन के मौके पर दोनों ने एक साथ बैठकर रक्षाबंधन का त्योहार भी मनाया.
जी न्यूज पर भावुक कहानी
कभी जिस रिश्ते के बीच में बंदूकें और जंगल आ रहे थे. लेकिन आज उनके बीच में सिर्फ भाई-बहन का प्यार झलक रहा है. बहन वेट्टी कन्नी ने भाई को राखी बांधकर रक्षाबंधन का त्योहार बड़े ही धूमधाम से मनाया. रक्षाबंधन के इस खास मौके पर ZEE Media की टीम ने भी इस भावुक मिलन को अपने कैमरे में कैद किया. पूर्व नक्सली कमांडर वेट्टी रामा और वेट्टी कन्नी से उनकी जिंदगी के उस हिस्से की कहानी के बारे में जाना, जिसे वे शायद कभी भी भूल नहीं पाएंगे.
बाहर निकालने की कोशिश
भाई वेट्टी रामा ने ZEE NEWS की टीम को बताया कि 22 साल के बाद इस साल हमारी बहन ने राखी बांधी है. इतने सालों तक राखी नहीं बंध पाने के बारे में बताते हुए कहा कि मेरी बहन नक्सली संगठन में थी, जहां पर राखी बांधने की अनुमति नहीं थी. वेट्टी रामा ने कहा कि वह अगस्त 2018 में समाज की मुख्यधारा में लौट आए थे. लेकिन उसकी बहन 2015 में वापस आई है. इतना ही नहीं उन्होंने यह भी कहा कि उसे संगठन से बाहर निकालने के लिए लगातार कोशिश करते रहे. गस्त के दौरान अधिकारी और मीडियाकर्मियों के जरिए संदेश भेजकर मुख्यधारा में लौटने की अपील करते थे.
गांव में काफी अच्छा लग रहा
जंगल में बहन से आमना-सामने होने की घटना पर वेट्टी रामा ने बताया कि एक बार बालंटोंग की पहाड़ी में उन्होंने बहन को सामने देखा था. उन्होंने कहा कि दोनों के बीच करीब 300 से 400 मीटर की दूरी थी और उन्होंने बहन को पहचान लिया था. नक्सली दूसरी तरफ भाग गए और पुलिस ने उन्हें पकड़ने की कोशिश की, लेकिन मुलाकात नहीं हो पाई. वहीं वेट्टी कन्नी ने ZEE NEWS की टीम को बताया कि बस्तर में शांति और 22 साल बाद भाई को राखी बांधकर अच्छा लग रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि अब गांव वालों के साथ में रहकर काफी अच्छा लग रहा है.