SOCIAL MEDIA

Newsletter

PARTNER SITES
Select language

ट्रंप प्रशासन के PERM प्रोग्राम सस्पेंशन पर विप्रो और इंफोसिस की सफाई, कहा- बिजनेस पर नहीं पड़ेगा बड़ा असर

कंपनियों का कहना है कि उन्होंने अमेरिका में मजबूत लोकल वर्कफोर्स तैयार की है. विप्रो में 80% से अधिक स्थानीय कर्मचारी हैं और यह सस्पेंशन H-1B जैसे वर्क वीजा से अलग है.

Written By Gaurav Singh
Published: Oct 13, 2026, 06:54 PM IST | Updated: Oct 13, 2026, 07:06 PM IST
Join

Wipro Clarifies US PERM Suspension Impact : टेक सेक्टर की दिग्गज कंपनी विप्रो (Wipro) ने परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन (PERM) प्रोग्राम को लेकर बड़ा बयान दिया है. कंपनी ने मंगलवार यानी 13 अक्टूबर को साफ किया कि उसे US लेबर डिपार्टमेंट के ऐलान से कारोबार पर कोई खास असर पड़ने की उम्मीद नहीं है. हाल ही में US ने PERM को लेकर बड़ा फैसला किया था. कुछ कंपनियों के लिए परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन (PERM) प्रोग्राम के तहत नए आवेदनों को रोकने की बात कही गई है. 

स्टॉक एक्सचेंज को दिए एक बयान में कंपनी ने कहा कि PERM प्रोग्राम US में परमानेंट रेजिडेंसी (स्थायी निवास) पाने का एक खास तरीका है और ये H-1B वीजा जैसे बड़े स्किल्ड टैलेंट मोबिलिटी प्रोग्राम से अलग है.

विप्रो ने साफ किया कि उसने US में लोकलाइजेशन (स्थानीय स्तर पर भर्ती) की रणनीति अपनाई है. इसके तहत देश में उसकी 80 प्रतिशत से ज्यादा वर्कफोर्स स्थानीय स्तर पर हायर की गई है. कंपनी ने फाइलिंग में कहा, 'हम स्थानीय टैलेंट में निवेश करने, US के सभी लागू कानूनों और नियमों का पालन करने और अपने क्लाइंट्स के लिए बिजनेस की निरंतरता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं.'

क्या है PERM प्रोग्राम?

PERM प्रोग्राम एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके जरिए एम्प्लॉयर कुछ खास एम्प्लॉयमेंट बेस्ड ग्रीन कार्ड आवेदनों के लिए US लेबर डिपार्टमेंट से लेबर सर्टिफिकेशन मांगते हैं. नए और पेंडिंग आवेदनों पर रोक लगने से एलिजिबल विदेशी कर्मचारियों की इमिग्रेशन प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है. हालांकि, इंफोसिस ने कहा है कि उसे कामकाज पर कोई खास असर पड़ने की उम्मीद नहीं है. कंपनी ने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो वो लागू रेगुलेटरी स्टैंडर्ड्स के मुताबिक और जानकारी देगी.

8 कंपनियों पर लगी रोक

पिछले सप्ताह डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने माइक्रोसॉफ्ट, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), इंफोसिस , एचसीएल टेक, कॉग्निजेंट और कैपजेमिनी जैसी कंपनियों को अपने PERM लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम से रोक दिया है. ये प्रोग्राम ज्यादातर एम्प्लॉयमेंट बेस्ड ग्रीन कार्ड के लिए एक अहम कदम है. US लेबर डिपार्टमेंट ने कहा कि वो प्रभावित कंपनियों से न तो नए PERM आवेदन स्वीकार करेगा और न ही पेंडिंग आवेदनों पर आगे काम करेगा. इस कदम से हजारों विदेशी प्रोफेशनल्स के परमानेंट रेजिडेंसी प्लान में देरी हो सकती है.

भारतीय IT कंपनियां और यहां तक ​​कि भारत में बड़े पैमाने पर काम करने वाली मल्टीनेशनल IT फर्म (जैसे कॉग्निजेंटऔर एक्सेंचर) US एम्प्लॉयमेंट बेस्ड ग्रीन कार्ड प्रोसेसिंग पर काफी हद तक निर्भर हैं. इस फैसले की घोषणा करते हुए अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD वेंस ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि माइक्रोसॉफ्ट के लिए हमारा संदेश है आप एक बेहतरीन अमेरिकी कंपनी हैं. लेकिन, आपको बेहतरीन अमेरिकी कर्मचारियों को काम पर रखना होगा. दुर्भाग्य से अमेरिका में कोई भी ऐसी कंपनी नहीं है जिसने इस सिस्टम का माइक्रोसॉफ्ट से ज्यादा गलत इस्तेमाल किया हो.'

PERM पर इंफोसिस का बयान

इंफोसिस ने फाइलिंग में कहा, 'हमें नहीं लगता कि सस्पेंशन की जो घोषणा हुई है. उसका कंपनी पर कोई बड़ा असर पड़ेगा. अगर जरूरत पड़ी, तो कंपनी लागू रेगुलेटरी स्टैंडर्ड्स के अनुसार और जानकारी देगी.' 

इंफोसिस ने अमेरिका में एक मजबूत लोकल वर्कफोर्स और टेक्नोलॉजी और इनोवेशन हब बनाने में निवेश किया है. कंपनी अमेरिका भर में अपने कर्मचारियों, क्लाइंट्स और समुदायों के प्रति और सभी लागू कानूनों और नियमों का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध है.

Add Zee News as a Preferred Source
TAGS:

About the Author

जी न्यूज में सीनियर सब-एडिटर हैं और वर्तमान में बिजनेस व फाइनेंशियल न्यूज कवर करते हैं.  देश की राजनीति से लेकर दुनिया के बनते-बिगड़ते सत्ता समीकरणों और घटनाओं को कवर कर चुके हैं  पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो UPTU से इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन किया है. उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाले गौरव ने अपने करियर की शुरुआत डिजिटल मीडिया से की और पिछले 6 वर्षों से लगातार इस क्षेत्र में सक्रिय हैं. आप गौरव सिंह से Gaurav.Singh@India.Com पर ईमेल के जरिए सीधे जुड़ सकते हैं. 
Read More

ZEENEWS TRENDING STORIES