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शेयर बाजार में लगातार सातवें दिन गिरावट से हाहाकार, सेंसेक्स 800 और निफ्टी के 200 अंक टूटने का क्या है कारण?

भारतीय शेयर बाजार में लगातार सातवें दिन भारी गिरावट देखी जा रही है. कारोबारी सत्र की शुरुआत में गिरकर खुला सेंसेक्स कुछ देर बाद ही 826 अंक टूट गया. बात करें निफ्टी 50 की तो यह भी 22,600 अंक के नीचे चला गया. कच्चा तेल फिर से चढ़कर 115 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया है.

Written By Kriyanshu Saraswat
Published: Oct 28, 2026, 11:46 AM IST | Updated: Oct 28, 2026, 11:52 AM IST
Image Credit: (AI) बुधवार सुबह बीएसई सेंसेक्स 345 अंक गिरकर खुला था.
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ग्लोबल मार्केट से मिल रहे कमजोर संकेतों के बीच आईटी और बैंकिग शेयरों में भारी बिकवाली के चलते हफ्ते के तीसरे दिन भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ लाल निशान में खुला. इस दौरान प्रमुख बेंचमार्क सेंसेक्स और निफ्टी 50 में एक प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई. लगातार सातवें दिन शेयर बाजार में गिरावट देखने को मिल रही है. कच्चे तेल के बढ़ते दाम, जियो -पॉलिटिकल टेंशन और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की तरफ से ब्याज दर पर फैसला लिये जाने से पहले निवेशकों की सतर्कता ने बाजार के सेंटिमेंट पर निगेटिव असर डाला है. निवेशकों की तरफ से बरती जा रही सतर्कता का असर यह हुआ कि बीएसई सेंसेक्स 345 अंक गिरकर 73,253.44 पर खुला. निफ्टी 50, 71.75 अंक गिरकर 22,678 अंक पर खुला.

कारोबारी सत्र के दौरान एक समय सेंसेक्स पिछले बंद के मुकाबले 826.19 अंक गिर गया और 72,772 अंक पर पहुंच गया. वहीं, एनएसई निफ्टी 50 पिछले बंद से 209 अंक गिरकर 22,540 अंक के लेवल पर पहुंच गया. सेक्टरवार देखें तो निफ्टी आईटी, निफ्टी के सभी सेक्टोरल इंडेक्स गिरकर कारोबार करते देखे गए. जानकारों का कहना है कि निवेशक यूएस फेड रिजर्व के फैसलों और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर नजर रखेंगे. पिछले सत्र के दौरान निफ्टी गिरकर 22,749 पर बंद हुआ था. आइए जानते हैं आज शेयर बाजार में गिरावट के प्रमुख कारण-

कच्चे तेल के दाम में लगी आग

शेयर बाजार में देखी जा रही बड़ी गिरावट का सबसे बड़ा कारण क्रूड ऑयल के दाम में तेजी है. बुधवार को इंटरनेशनल मार्केट में ब्रेंट क्रूड 115 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया. यह पिछले चार साल के रिकॉर्ड लेवल के बेहद करीब है. मिडिल ईस्ट में तेल की सप्लाई रुकने की आशंका और 3 नवंबर के अमेरिकी मिडटर्म इलेक्शन के बाद ईरान पर अमेरिकी हमले की चर्चा के बाद ग्लोबल ऑयल मार्केट में हड़कंप मचा हुआ है. अमेरिका में क्रूड ऑयल का स्टॉक 20 लाख बैरल कम हो गया है. भारत जरूरत का 85% क्रूड ऑयल इम्पोर्ट करता है. क्रूड के दाम बढ़ने से भारत का इम्पोर्ट बिल बढ़ जाता है और भारतीय रुपया कमजोर होता है. देश में महंगाई बढ़ने की आशंका से कंपनियों की इनपुट कॉस्ट बढ़ जाती है.

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अमेरिका-ईरान के बीच तनाव

मार्केट की अनिश्चितता का सबसे ज्यादा असर बाजार पर देखने को मिलता है. इस समय पूरी दुनिया में जियोपॉलिटिकल टेंशन चरम पर है. मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के न्यूक्लियर ठिकानों और स्ट्रैटेजिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर मिलिट्री स्ट्राइक का प्लान कर रहे हैं. दुनिया के अहम ऑयल ट्रांसपोर्ट रूट होर्मुज स्ट्रेट में तेल के एक टैंकर के समुद्री बारूदी सुरंग से टकराने के बाद आग लगने की खबर है. सऊदी अरब, पाकिस्तान और चीन तेहरान और वॉशिंगटन के बीच शांति की कोशिश में जुटे हैं. लेकिन बाजार को लगता है यदि वहां एक भी मिसाइल और चली तो ग्लोबल मार्केट का बैलेंस बिगड़ जाएगा. इसी डर में एफआईआई भारतीय बाजार से अपना पैसा निकालकर सुरक्षित जगह पर निवेश कर रहे हैं.

एक्सपायरी के बाद तगड़ी प्रॉफिट बुकिंग

बाजार में गिरावट का केवल ग्लोबल रीजन ही नहीं है. इस गिरावट के पीछे कुछ घरेलू और तकनीकी कारण भी हैं. मंगलवार को डेरिवेटिव्स (F&O) सेगमेंट की एक्सपायरी थी. एक्सपायरी के बाद ट्रेडर्स नए पोजीशंस को आगे ले जाने के मूड में नहीं दिखाई दिये. निफ्टी जब 22,500 के अहम लेवल के नजदीक पहुंचता है तो ट्रेडर्स अमूमन सतर्क हो जाते है ंऔर अपनी पुरानी पोजीशंस को निकालकर प्रॉफिट बुकिंग करने लगते हैं.

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फेड रिजर्व के फैसले का डर

बाजार में गिरावट का चौथा और बड़ा कारण अमेरिकी सेंट्रल बैंक यानी यूएस फेडरल रिजर्व की तरफ से ब्याज दर को लिया जाने वाला फैसला है. यूएस फेड रिजर्व बुधवार देर रात अपनी मॉनेटरी पॉलिसी का ऐलान करने वाला है. हालांकि, बाजार को ज्यादा उम्मीद यही है कि ब्याज दर को 3.75% से 4.00% की रेंज में स्थिर रखा जाएगा. यदि फेड चेयर केविन वॉर्श ने यह इशारा दिया कि अमेरिका में महंगाई को रोकने के लिए लंबे समय तक ब्याज दर ऊंची बनी रहेंगी तो इससे ग्लोबल इक्विटी मार्केट को झटका लगेगा. ऊंची ब्याज दर का सीधा सा मतलब है डॉलर का मजबूत होना और भारत जैसे इमर्जिंग मार्केट से विदेशी निवेशको के पैसे का बाहर निकलना.

(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है। जी मीडिया अपने पाठकों को किसी भी तरह के निवेश की सलाह नहीं देता। किसी भी प्रकार का निवेश करने से पहले अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से संपर्क करें।)

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About the Author

क्रियांशु सारस्वत वरिष्ठ बिजनेस जर्नलिस्ट (Business Journalist) हैं, उन्हें डिजिटल और प्रिंट मीडिया में 17 साल का अनुभव है. मौजूदा समय में वह Zee News (Hindi) की डिजिटल टीम में बतौर 'असिस्टेंट न्यूज एडिटर' कार्यरत हैं. क्रियांशु को बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, टैक्सेशन, कमोडिटी और सरकारी योजनाओं आदि से जुड़ी खबरों को आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में महारथ हासिल है. Zee News से पहले क्रियांशु ने टाइम्स इंटरनेट, हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण और अमर उजाला की वेबसाइट में अहम संपादकीय जिम्मेदारियां निभाई हैं. इस दौरान क्रियांशु ने ऑटो, टेक्नोलॉजी और लाइफस्‍टाइल लीड की जिम्मेदारी संभाली है. अभी क्रियांशु बिजनेस लीड हैं. यूपी से ताल्‍लुक रखने वाले क्र‍ियांशु पत्रकार‍िता में पोस्ट ग्रेजुएट हैं.
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