Share Market: शेयर बाजार में तबाही वाला गुरुवार, ₹4 लाख करोड़ की बर्बादी के पीछे अमेरिकी कनेक्शन!
Share Market: शेयर बाजार में आज भारी तबाही मची. सेंसेक्स 1,247.71 अंक गिरकर बंद हुआ. बाजार निवेशकों ने 4 लाख करोड़ रुपये से अधिक गंवा दिए. इस बड़ी गिरावट के पीछे वजह क्या है ?
D-Street bloodbath: शेयर बाजार में आज भारी तबाही मची. सेंसेक्स और निफ्टी दोनों क्रैश हो गए. सेंसेक्स 1,247.71
प्वाइंट गिरकर 73,580.54 अंक पर पहुंच गया. निफ्टी 23,100 अंक तक फिसल गया. HDFC Life, Bajaj Fin 6% तक फिसल गए. इंडिगो, ट्रेंड 4% तक गिरे. बाजार में चौतरफा बिकवाली दिखी, ऐसे में सवाल है कि आखिर बाजार को हुआ क्या है ? क्यों बाजार में अचानक इतनी मंदी आ गई ?
बाजार में क्यों आई गिरावट ?
भारतीय शेयर बाजार में आई गिरावट के पीछे कई फैक्टर्स जिम्मेदार हैं, लेकिन सबसे बड़ा रोल अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड का है. US Treasury Bond 19 साल के हाई पर पहुंच गया. US 10-Year Treasury Yields 2007 के बाद के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया. ब्याज दरों के प्रति संवेदनशील 2 सा ट्रेजरी यील्ड 4.9% के पार चला गया. 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड 13.89 बेसिस पॉइंट की तेजी के साथ 5.106% पर पहुंच गया. अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के बढ़ने से सरकारी बॉन्ड इंस्ट्रूमेंट्स में निवेशकों का आकर्षण बढ़ जाता है. ऐसे में निवेशक शेयर बाजार से पैसा निकालकर बॉन्ड मार्केट में लगाने लगते हैं. जिससे इक्विटी बाजार पर दवाब बढ़ जाता है.
बाजार में गिरावट का अमेरिकी कनेक्शन
बता दें कि बॉन्ड यील्ड किसी सरकारी बॉन्ड पर मिलने वाला एनुअल रिटर्न है. जिसकी वैल्यूएशन बाजार की खरीद-बिक्री, मांग-सप्लाई जैसे फैक्टरों से तय होती है. जब बॉन्ड बेचे जाते हैं, तो उसकी कीमत गिरने लगती है और यील्ड बढ़ता है. यील्ड बढ़ने का मतलब है, ज्यादा रिटर्न, ऐसे में निवेशक भारतीय बाजार से पैसा निकालकर अमेरिकी बाजार में लगाने लगते हैं.
कच्चे तेल की कीमत में लौटी तेजी
ईरान-अमेरिका में बीच युद्ध भड़कने के साथ कच्चे तेल की कीमतों में फिर से तेजी लौटी है. ब्रेट क्रूड अचानक 2% तक चढ़कर 102 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया. कच्चे तेल की कीमत में तेजी ने बाजार का सेंटीमेंट बिगाड़ दिया, महंगाई बढ़ने का खतरा निवेशकों पर हावी हो गया और बाजार गिरने लगा.
फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दर में बढ़ोतरी का डर
कच्चे तेल की कीमत में तेजी से मंहगाई बढ़ने का खतरा बढ़ने लगता है, जिससे अमेरिका फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दर में बढ़ोतरी का संभावना बढ़ जाती है. अक्टूबर में ब्याज दर बढ़ने की संभावना 66% तक बढ़ गई है. जिसका असर बाजार पर दिखा. रुपये की कमजोरी जैसे कई दूसरे फैक्टर्स भी आज बाजार पर हावी रहे. भारतीय बाजार में गिरावट के चलते
आज शेयर बाजार में निवेशकों को 4 लाख करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है.