US-Diesel Deal: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस के साथ डीजल खरीद की डील की. इस समझौते से बाद से ही सिर्फ अपने देश ही में ही दुनियाभर में ट्रंप के दोहरे रवैये की आलोचना हो रही है. ट्रंप ने पहले रूसी तेल की खरीद पर प्रतिबंध लगाया, फिर बिल पास करवाकर अधिकार हासिल किया कि जो भी देश रूस से कच्चा तेल या पेट्रोलियम प्रोडक्ट खरीदेगा , उसपर 100 फीसदी टैरिफ लगाया जा सकता है. दुनियाभर पर रूसी तेल से दूर करने वाले ट्रंप ने खुद मॉस्को से हाथ मिला लिया. अब इस डीजल डील में नया ट्वीस्ट आ सकता है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से डीजल के लिए समझौता किया है. साथ ही अप्रैल 2027 के लिए रूसी तेल पर प्रतिबंध हटाया गया है. अब भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने बड़ा दावा किया है. ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में शामिल हुए गोर ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप अगले 10 दिन में इस पर फैसला लेंगे कि रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर प्रतिबंध लगेगा या नहीं ? सर्जियो गोर ने कहा कि अमेरिकी कांग्रेस ने ऐसे देशों पर प्रतिबंध और टैरिफ लगाने का अधिकार राष्ट्रपति को दिया है, जो रूस से तेल और गैस खरीदते हैं. राष्ट्रपति ट्रंप अब अगले 10 दिनों में इस पर फैसला ले सकते हैं.
सवाल ये रूस और अमेरिका के बीत डीजल को लेकर डील हो गई है. रूस अमेरिका को तुरंत 3 लाख टन डीजल की सप्लाई करेगा. नवंबर 2026 में ये सप्लाई 5 लाख टन तक पहुंच जाएगा और इसके बाद रूस करीब 10 लाख टन डीजल की अगली खेप अमेरिका भेजेगा. इस डील की शर्त के मुताबिक रूस को प्रतिबंधों में ढील मिलेगी.
अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने रूसी डीजल पर लगे प्रतिबंधों को 7 अप्रैल, 2027 तक के लिए छूट दी है. अब सवाल यह कि अगर ट्रंप उन देशों पर टैरिफ लगाने का फैसला लेते हैं, जो रूस से तेल खरीद रहा है, तो खुद अमेरिका क्या करेगा? ट्रंप ने खुद ही रूस के साथ डीजल डील साइन की है, ऐसे में इस बात की उम्मीद बहुत ज्यादा है कि फिलहाल वो रूसी तेल की खरीद पर किसी भी तरह का कोई प्रतिबंध नहीं लगाने का फैसला कर सकते हैं. प्रतिबंधों में छूट को जारी रख सकते हैं. कम से कम नवंबर तक, जब कि अमेरिका में मिड टर्म इलेक्शन होने वाले हैं.
गोर ने कहा कि इस अधिकार का मकसद किसी को सजा देना नहीं, बल्कि रूस-यूक्रेन को खत्म करना है. उन्होंने कहा कि बिल पास होने के बाद से राष्ट्रपति ने किसी भी देश पर इस कानून के तहत कोई प्रतिबंध नहीं लगाया है. कानून पारित होने के 30 दिनों के भीतर उन्हें फैसला लेना होगा.
ट्रंप अगले 10 दिन में रूसी तेल के प्रतिबंध पर क्या फैसले लेंगे, इसका असर भारत पर भी होगा. दरअसल भारत के कच्चे तेल के आयात में रूसी तेल की हिस्सेदारी सबसे बड़ी है. अगर ट्रंप रूसी तेल पर प्रतिबंध या 100 फीसदी टैरिफ का फैसला लेते हैं, तो उसका सीधा असर भारत पर होगा. सर्जियो गोर ने ये भी माना कि अमेरिका इस बात को जरूर सझेगा कि कोई भी देश अचानक से रूस से तेल और गैस की सप्लाई लेना बंद नहीं कर सकता है, बल्कि वो धीरे-धीरे इस कम कर युद्ध में इस्तेमाल हो रहे तेल के फंड को रोक सकता है.
इस सवाल के जबाव में गोर ने कहा कि रूसी तेल की खरीद पर भारत को राहत मिलती है या नहीं, ये फैसला पूरी तरह से अमेरिकी राष्ट्रपति का होगा. उन्होंने ये भी दावा किया कि भारत और अमेरिका मिलकर ट्रेड डील को पूरा करेंगे.
अमेरिकी विदेश मंत्री 17 अक्टूबर को भारत के दौर पर पहुंच रहे हैं. इस दौरे पर भारत और अमेरिका के बीच अटकी ट्रेड डील को लेकर चर्चा होगी. दोनों देश कारोबार, व्यापार, निवेश, तेल और डील को लेकर चर्चा को आगे बढ़ाना चाहते हैं, लेकिन क्या प्रतिबंधों के बीच व्यापार और डील की बातें आगे बढ़ सकती हैं? सर्जियो गोर ने मुताबिक अमेरिका भारत के साथ डिफेंस, इन्फॉर्मेंशन, टेक्नोलॉजी, डेटा सेंटर, चिप मैन्युफैक्टरिंग जैसे सेक्टर्स में साझेदारी बढ़ाना चाहता है.