टाटा ने फिर खेला बड़ा दांव, चंद्रशेखरन ने इटली की पीएम से मुलाकात कर फाइनल की ₹228000 करोड़ की डील
टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने इटली की पीएम जॉर्जिया मेलोनी से मुलाकात कर इवेको अधिग्रहण फाइनल कर दिया है. 3.43 अरब यूरो की इस मेगा डील से ग्लोबल बिजनेस मार्केट में हलचल मच गई है.
देश की सबसे बड़ी और भरोसेमंद कंपनी टाटा का नाम आता है तो हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है. टाटा ग्रुप की तरफ से ऐसा कदम उठाया गया है, जिसकी चर्चा दुनियाभर में हो रही है. टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने रोम के पलाज्जो चिगी में इटली की पीएम जॉर्जिया मेलोनी से मुलाकात की है. इस मुलाकात का मकसद टाटा मोटर्स की तरफ से इटली की मशहूर कमर्शियल व्हीकल निर्माता कंपनी 'इवेको ग्रुप' का टेकओवर रहा. 3.43 अरब यूरो की इस मेगा डील ने ग्लोबल बिजनेस मार्केट में हलचल मचा दी है. इस मुलाकात को भारत और इटली के बीच इंडस्ट्रियल और फाइनेंशियल रिलेशन को और ज्यादा मजबूत करने के मकसद से उठाया जा रहा है.
सूत्रों के अनुसार चंद्रशेखरन ने पीएम मेलोनी के सामने टाटा ग्रुप की लंबे समय की स्ट्रैटजी पेश की है. इस प्लान को अगले पांच साल में नए मुकाम पर ले जाने के लिए तैयार बनाया गया है. 30 अक्टूबर को टाटा मोटर्स की तरफ से ऑफिशियल ऐलान किया गया कि उन्होंने कैश टेंडर ऑफर के शुरुआती सेटलमेंट के बाद इवेको में 89.42% की हिस्सेदारी ले ली है. इस डील के बदले 3.43 अरब यूरो (2,28,000 करोड़) चुकाए गए. इस टेकओवर के बाद अब इवेको ग्रुप, टाटा मोटर्स की अप्रत्यक्ष सहायक कंपनी बन गई है.
ट्यूरिन में इवेको के हेड ऑफिस में ग्लोबल प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए एन. चंद्रशेखरन ने साफ किया कि यह पार्टनरशिप दोनों कंपनियों के लिए गेम-चेंजर साबित होगी. उन्होंने इस प्रोसेस के दौरान इटली सरकार और खासतौर पर पीएम जॉर्जिया मेलोनी और मिनिस्टर एडोल्फो उर्सो की तरफ से दिये गए समर्थन के लिए धन्यवाद किया.
ट्यूरिन से पुराना रिश्ता
इस दौरान एन. चंद्रशेखरन ने बेहद भावुक और दिलचस्प कहानी शेयर करते हुए कहा कि टाटा मोटर्स का ट्यूरिन शहर के साथ पुराने रिश्ता है. उन्होंने याद किया कि कैसे पूर्व चेयरमैन रतन टाटा ने 1990 के दशक की शुरुआत में यह फैसला किया कि टाटा मोटर्स अपनी खुद की पैसेंजर कार बनाएगी. उस सपने को साकार करने के लिए रतन टाटा ने इटली के ट्यूरिन शहर को चुना था. ट्यूरिन के ही एक मशहूर डिजाइन हाउस 'आइडिया' में पहली स्वदेशी भारतीय पैसेंजर कार का डिजाइन और साइज तैयार हुआ था. चंद्रशेखरन ने बताया कि 90 के दशक के आखिरी दिनों से ही टाटा के लोग ट्यूरिन आते-जाते रहे हैं. यही कारण है कि इटली और ट्यूरिन के साथ टाटा का इमोशनल जुड़ाव बहुत गहरा है.
यह मर्जर महज दो कंपनियों का नहीं है, बल्कि यह एक ग्लोबल जायंट माना जा रहा है. संयुक्त बयान के अनुसार अब टाटा मोटर्स और इवेको का संयुक्त रेवेन्यू करीब 21 अरब यूरो करीब 2,28,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. दोनों कंपनियों के पास अपने-अपने अलग प्रोडक्ट पोर्टफोलियो हैं. इस टेकओवर के बाद संयुक्त कारोबार की उपस्थिति दुनिया के 130 से ज्यादा देशों में हो जाएगी. इसमें यूरोप, भारत, दक्षिण अमेरिका, एशिया, मिडिल ईस्ट और अफ्रीका के प्रमुख विकसित और तेजी से बढ़ते बाजार शामिल हैं.