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Share Market 1 October: सितंबर की तबाही ने अक्टूबर में भी शेयर बाजार का पीछा नहीं छोड़ा. महीने के पहले दिन ही शेयर बाजार में सूनामी आई. सेंसेक्स 1100 प्वाइंट से अधिक फिसल गया. निफ्टी 350 प्वाइंट से अधिक फिसल गया. शेयर बाजार की इस बिकवाली ने आज निवेशकों को 10 लाख करोड़ रुपये खाक कर दिए. शेयर बाजार में अक्टूबर के पहले दिन ही भारी बिकवाली हावी रही. सेंसक्स और निफ्टी दोनों 1.5 फीसदी से अधिक टूट गए. हालांकि सेंसेक्स दिन के निचले स्तर से संभलते हुए 570 अंक टूटकर 1 अक्टूबर को 71,909.70 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 198.50 अंक फिसलकर 22,421.95 के स्तर पर आ गया.
शेयर बाजार में अक्टूबर के पहले दिन ही भारी बिकवाली हावी रही. सेंसक्स और निफ्टी दोनों 1.5 फीसदी से अधिक टूट गए. सेंसेक्स 71,734.08 अंक पर पहुंच गयाय 1 अक्तूबर को BSE पर लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट वैल्यू 10,18,546 करोड़ रुपये तक गिर गया.
बाजार में भारी गिरावट के बाद निफ्टी ऑटो में 4% से अधिक फिसला, निफ्टी मेटल, निफ्टी रियल्टी, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में 2% से अधिक की गिरावट आई. M&M, मारुति सुजुकी, TATA Steel, अल्ट्राटेक सीमेंट, ITC, HUL, BEL के स्टॉक्स 3% से ज्यादा फिसले. L&T, पावर ग्रिड, बजाज फाइनेंस, HDFC बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक के शेयरों में 1 से 2% की गिरावट आई.
Foreign institutional investors यानी विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली ने बाजार में तबाही मचाई. बीते 2 दिनों ने FII ने बाजार से 2 अरब डॉलर यानी करीब 20,000 करोड़ रुपये निकाल लिए. बुधवार, 30 सितंबर को विदेशी निवेशकों ने बाजार से 10,148 करोड़ रुपये निकाले. 1 अक्टूबर, गुरुवार को 10,743 करोड़ रुपये निकाल लिए. बीते एक हफ्ते में FII का आउटफ्लो 26,000 करोड़ रुपये रहा.
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल का नकारात्मक असर बाजार पर दिखा. 10 साल वाला यूएस बॉन्ड यील्ड बढ़कर 5.33%, 30 साल वाला यूएस बॉन्ड यील्ड 5.67% पर पहुंच गया. सरकारी बॉन्ड पर बेहतर रिटर्न मिलने से निवेशक बाजार से पैसा निकालकर बॉन्ड में लगाने लगते हैं. जिसकी वजह से बाजार में बिकवाली हावी हो जाती है. शेयर बाजार गिरने लगता है. रुपए में गिरावट का नकारात्मक असर बाजार पर पड़ा है.
तेल से लेकर खेत तक टेंशन
कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ता तनाव बाजार पर निगेटिव इम्पैक्ट डाल रहा है. कच्चे तेल की बढ़ी कीमत महंगाई बढ़ा रही है. बढ़ती महंगाई ब्याज दर बढ़ाने की आशंका बढ़ाएगी, ब्याज दर बढ़ने से बाजार पर नकारात्मक असर डालेगा. वहीं कम बारिश और सूखे के डर से बाजार हिला हुआ है. फसल प्रभावित हुई तो किसान की आमदनी पर असर होगा. खाने-पीने की चीजों की कीमतें बढ़ेगी तो लोगों की खरीदारी क्षमता गिरेगी. बारिश की चिंता धीरे-धीरे कंपनियों की बिक्री तक पहुंच जाएगी. जिसका असर कंपनियों की कमाई पर पड़ेगा. ये डर बाजार को प्रभावित कर रहा है.