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हफ्ते के पहले ही दिन शेयर बाजार में कारोबार के दौरान जबरदस्त गिरावट देखने को मिल रही है. इससे एक बार फिर से निवेशकों को बड़ा झटका लगा है. स्टॉक मार्केट का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 700 अंक की भारी गिरावट के साथ 74,032 अंक के लेवल पर आ गया. दूसरी तरफ निफ्टी 50 सूचकांक भी 23,000 के मनोवैज्ञानिक आंकड़े से नीचे आ गया. पिछले कारोबारी सत्र में तेजी के साथ बंद हुए शेयर बाजार के अचानक क्रैश होने के पीछे कमजोर बैंक नतीजे, सुस्त ग्लोबल संकेत और क्रूड ऑयल के ऊंचे दाम का दबाव बताया जा रहा है. बाजार में आई गिरावट के पीछे कौन से 3 कारण हैं? आइए जानते हैं-
बाजार में सोमवार को आई गिरावट का अहम कारण दूसरी तिमाही (Q2) के निराशाजनक नतीजे रहे. बैंकिंग शेयर में सबसे ज्यादा बिकवाली देखने को मिली. एक्सिस बैंक (Axis Bank) के शेयर में 5% तक की गिरावट आई. भले ही एक्सिस बैंक का सालाना आधार पर मुनाफा 38% बढ़ा हो. लेकिन बढ़े हुए खर्च के कारण शेयर में बिकवाली देखी गई. इसके अलावा सबसे बड़े प्राइवेट बैंक HDFC और दूसरे बैंकों के शेयर पर भी दबाव देखा गया. इसका असर यह हुआ कि निफ्टी का प्राइवेट बैंक इंडेक्स बुरी तरह पिट गया.
अमेरिकी मार्केट में पिछले हफ्ते हुई भारी बिकवाली का असर एशियाई और भारतीय बाजार पर भी देखा गया. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी कंपनियों में बिकवाली के चलते नैस्डैक (Nasdaq) और एसएंडपी 500 में जोरदार गिरावट देखने को मिली. साउथ कोरिया का कोस्पी इंडेक्स भी 3% से ज्यादा टूट गया. घरेलू लेवल पर एलटीएम (LTM) जैसी दिग्गज आईटी कंपनियों के कमजोर नतीजों ने टेक शेयरों की हालत खराब कर दी. इसके बाद चौतरफा बाजार में बिकवाली का माहौल देखा जा रहा है.
ब्रेंट क्रूड के दाम भले ही कुछ फिसलकर 107 डॉलर प्रति बैरल के करीब आ गए हो. लेकिन पिछले हफ्ते क्रूड के दाम में आई भारी तेजी के बाद क्रूड अभी भी ऊंचे लेवल पर ही बना हुआ है. क्रूड के 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चलने से बाजार पर दबाव बना हुआ है. भारत अपनी जरूरत का अधिकांश क्रूड ऑयल आयात करता है. ऐसे में क्रूड के दाम बढ़ने का असर देश के आयात बिल पर पड़ता और इसमें इजाफे से महंगाई का खतरा बना रहता है. इसके अलावा रुपये पर भी दबाव देखा जाता है. मैक्रो-इकोनॉमिक चिंता के चलते निवेशकों की तरफ से बाजार में सतर्कता बरती जा रही है और जमकर बिकवाली का दौर चल रहा है.