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Share Market: सोमवार, 12 अक्टूबर को कारोबारी हफ्ते के पहले दिन की शेयर बाजार में भारी गिरावट दिखी.सेंसेक्स और निफ्टी दोनों तेजी के साथ खुले, लेकिन 10 बजते ही ऐसी गिरावट आई कि मार्केट ने डे हाई से 1200 अंक नीचे फिसल गया. सेंसेक्स गिरते-गिरते 547.65 फिसलकर 71,924 पर बंद हुआ. दोपहर 3 बजे के करीब, तो सेसेंक्स 730 अंक तक गिर चुका था.
तेजी के साथ खुला बाजार क्यों लुढ़का ?
आज बाजार जब खुला, तो निवेशकों के चेहरे खिल उठे. सेंसेक्स पिछले बंद 72,472 के मुकाबले बढ़त के साथ 72,771 अंक पर खुला. 412 अंक की शुरुआती तेजी ने सेंसेक्स को 73,884 के लेवल पर पहुंचा दिया, लेकिन कुछ ही मिनटों में ये तेजी गायब होने लगी. 10 बजते-बजते सेंसेक्स और निफ्टी का बुरा हाल हो गया.
20 मिनट में हो गया खेला
निफ्टी ने सिर्फ 20 मिनट के भीतर अपनी तेजी गंवा दी. शुक्रवार को 22,520.45 पर बंद हुआ निफ्टी सोमवार को 22,593.20 पर खुला. शुरुआती खरीदारी ने इसे 22,651.10 के डे हाई पर पहुंचा दिया. करीब 9:20 बजे ये तेजी जारी रही, लेकिन 9:40 बजते-बजते निफ् अपनी बढ़त को खोने लगा और उच्चतम स्तर से फिसलकर 22,550 के नीचे आ गया.अब सवाल ये कि जब बाजार पॉजिटिव खुला, तो फिर अचानक उसमें गिरावट कैसे आई?
किसने बाजार को नीचे खींचा
आरबीआई के रोजाना कैश रिजर्व के सख्त नियम का असर बैंकिंग शेयर पर दिखा. महंगा कच्चा तेल कंपनियों के खर्च को लेकर चिंता बढ़ा रहा है, जिसके चलते शेयर बाजार में बिकवाली हावी रही. टेक महिंद्रा, ITC, L&T, हिंडाल्को और HUL आज टॉप लूजर्स लिस्ट के शेयर में शामिल हो गए. बजाज ऑटो, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स के स्टॉक गिरते बाजार में भी संभले.
दो दिन की तेजी के बाद आज बाजार में मुनाफावसूली दिखी. प्रॉफिट बुकिंग के अलावा FII की बिकवाली ने बाजार को नीचे धकेला है. विदेशी निवेशकों की बिकवाली का सिलसिला जारी रहा और आज अक्टूबर के 6 कारोबारी सत्रों में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों से करीब 45,125 करोड़ रुपये निकाल लिए हैं.
रुपये को संभालने के लिए रिजर्व बैंक ने बड़ा कदम उठाया. RBI ने रुपये को समर्थन देने और विदेशी मुद्रा बाजार में दबाव कम करने के लिए तेल कंपनियों की डॉलर खरीद को स्पॉट मार्केट से हटाने के साथ हेडिंग संबंधी नियमों को सख्त कर दिया है. जिसका असर आज बाजार पर दिखा.
इसके अलावा रिजर्व बैंक ने कैश रिजर्व रेशियो की न्यूनतम दैनिक मेंटिनेंस की सीमा को 90 फीसदी से बढ़ाकर 99 फीसदी कर दिया. 16 अक्टूबर से ये नियम लागू होगा. इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने 25000 करोड़ रुपये से सरकारी बॉन्ड बेचने का ऐलान किया है, ताकि बैंकिंग सिस्टम में अतिरिक्त लिक्विडिटी को कम किया जा सके.
बैंकिंग सिस्टम में नकदी घटने और बॉन्ड यील्ड बढ़ने से वित्तीय परिस्थितियां सख्त होती दिख रही है. जिसकी वजह से शेयरों को लेकर निवेशकों का आकर्षण प्रभावित होता है. हालांकि आरबीआई के फैसले का असर आज रुपये पर दिखा है. डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 96 पैसे मजबूत होकर 95.77 पर पहुंच गया.