India-EU Trade Deal : क्या रूस से तेल की खरीद यूरोपीय संघ यानी EU के साथ व्यापार वार्ता में बाधा बन रही है? इस सवाल के जवाब में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्थिति स्पष्ट की है. म्यूनिख लीडर्स मीटिंग में उन्होंने कहा कि यूरोप में अमेरिका की तरह कोई 'लिंडसे ग्राहम बिल' नहीं है, जो ये तय करेगा कि भारत के साथ व्यापार वार्ता किस दिशा में आगे बढ़ेगी.
वित्त मंत्री के मुताबिक, रूस से तेल खरीद और भारत की रणनीतिक स्वायत्तता जैसे मुद्दों पर चर्चा जरूर हुई है, लेकिन भारत-यूरोपीय संघ व्यापार वार्ता तय करने के लिए ये शर्त नहीं थी.
निर्मला सीतारमण से जब ये पूछा गया कि क्या रूस से भारत की तेल खरीद यूरोपीय साझेदारों के साथ बातचीत में समस्या बन गई है. इसके जवाब में उन्होंने कहा कि उनकी जानकारी के मुताबिक, यूरोप में कोई 'लिंडसे ग्राहम बिल' नहीं है.
सीतारमण ने कहा कि व्यापार वार्ता से पहले और बाद में कई मुद्दों पर औपचारिक और अनौपचारिक रूप से चर्चा की जाती है, लेकिन संकेत दिया कि रूसी तेल का मुद्दा यूरोप के साथ चर्चा में निर्णायक स्थिति नहीं थी. उनकी ये टिप्पणी तब आई है, जब भारत बदलते वैश्विक व्यापार माहौल में अपने राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा और रणनीतिक स्वायत्तता के साथ व्यापार विस्तार को संतुलित करना चाहता है.
सीतारमण ने कहा कि राष्ट्रीय हितों की रक्षा सुनिश्चित करने के लिए व्यापार समझौतों को तेजी से तैयार किया जा रहा है, जबकि देश सप्लाई चेन व्यवधानों और कमजोर बहुपक्षीय ट्रेड फ्रेमवर्क से निपट रहे हैं. उन्होंने कहा कि भारत-यूरोपीय संघ समझौते ने इस दृष्टिकोण को प्रदर्शित किया है, जिसमें दोनों पक्षों ने संवेदनशील क्षेत्रों, विशेष रूप से कृषि के आसपास सुरक्षा बरकरार रखते हुए अपनी टैरिफ लाइनों और टैरिफ मूल्य का 90 प्रतिशत से अधिक हिस्सा खोल दिया है.
सीतारमण ने ये भी कहा कि भारत तेजी से द्विपक्षीय समझौतों को आगे बढ़ा रहा है, क्योंकि बहुपक्षीय ट्रेड इकोसिस्टम कमजोर हो गया है. उन्होंने कहा, 'अब संतुलन कुछ हद तक बहुपक्षीय के बजाय द्विपक्षीय के पक्ष में झुका हुआ है.' उन्होंने कहा कि देश नए व्यापार साझेदारों की तलाश कर रहे हैं और समझौतों के माध्यम से उन रिश्तों को मजबूत कर रहे हैं.
वित्त मंत्री ने ये भी कहा कि भारत के व्यापार समझौतों पर सप्लाई चेन की निरंतरता पर अधिक ध्यान देने के साथ बातचीत की जा रही है. उन्होंने कहा कि वे देश नए साझेदार ढूंढ रहे हैं, जहां मौजूदा सप्लाई चेन पहले ही बाधित हो चुकी है.