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RBI MPC Meeting: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (Reserve Bank of India) की मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी (MPC) की तीन दिन की बैठक आज यानी बुधवार 7 अक्टूबर को खत्म हो रही है. बैठक के बाद RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा लिए गए फैसलों की घोषणा करेंगे. सबकी नजरें इस बात पर हैं कि क्या सेंट्रल बैंक इस बार ब्याज दरों में कोई बदलाव करेगा? MPC की बैठक 5 से 7 अक्टूबर तक चली है. इसका निर्णय 7 अक्टूबर यानी आज होगा.
महंगाई, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और रुपये की गिरती कीमत की वजह से ज्यादातर एनालिस्ट का मानना है कि RBI रेपो रेट बढ़ाएगा. RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा आज सुबह 10 बजे नई मॉनेटरी पॉलिसी की घोषणा करेंगे. इसके बाद दोपहर में प्रेस कॉन्फ्रेंस होगी. बता दें, रिजर्व बैंक ने पिछली चार बैठकों में रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखा है.
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा बुधवार सुबह 10:00 बजे मॉनेटरी पॉलिसी स्टेटमेंट जारी करेंगे. इसके बाद, वे MPC के दूसरे सदस्यों के साथ दोपहर 12 बजे मॉनेटरी पॉलिसी के बाद होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे. आप RBI गवर्नर मल्होत्रा का लाइव भाषण सेंट्रल बैंक के ऑफिशियल सोशल मीडिया हैंडल पर देख सकते हैं.
अभी रेपो रेट 5.25% है. अगर RBI इसे 25 बेसिस प्वाइंट्स बढ़ाता है, तो ये 5.50% हो जाएगा. फरवरी 2023 के बाद से यह पहली बार होगा जब रेट बढ़ाया जाएगा.
उम्मीद है कि सेंट्रल बैंक FY27 के लिए महंगाई का अपना अनुमान बनाए रखेगा. हालांकि, कुछ लोग इसमें बढ़ोतरी की उम्मीद कर रहे हैं. RBI ने पिछली समीक्षा में FY27 के लिए CPI महंगाई का अनुमान घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया था. जुलाई में खुदरा महंगाई 4.45 प्रतिशत थी. ये अगस्त में बढ़कर 4.82 प्रतिशत हो गई थी.
क्रेडिट रेटिंग एजेंसी ICRA और ब्रोकरेज फर्म गोल्डमैन सैक्स का अनुमान है कि इस बार रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट्स की बढ़ोतरी हो सकती है. रॉयटर्स के एक सर्वे में लगभग 60% अर्थशास्त्रियों ने 0.25% की बढ़ोतरी का अनुमान लगाया है.
रेपो रेट बढ़ने का सीधा असर लोन पर पड़ता है. जब बैंकों के लिए RBI से पैसा उधार लेना महंगा हो जाता है, तो वे इसका बोझ ग्राहकों पर डाल सकते हैं. इससे होम, कार और पर्सनल लोन पर ब्याज दरें और EMI बढ़ सकती हैं. साथ ही, फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) पर भी असर पड़ सकता है, ज्यादा डिपॉजिट पाने के लिए बैंक FD पर ब्याज दरें बढ़ा सकते हैं. इससे निवेशकों को अधिक रिटर्न मिल सकता है. अगर दरें बढ़ती हैं तो होम, ऑटो और अन्य ऋण वाले उधारकर्ताओं को ज्यादा EMI देनी पड़ सकती है.