क्रिप्टो से दूरी, ब्लॉकचैन पर भरोसा! RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया भारत का रुख
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि भारत ब्लॉकचेन और टोकनाइजेशन टेक्नोलॉजी को बढ़ावा दे रहा है. लेकिन, मॉनेटरी सॉवरेनिटी और पॉलिसी से जुड़ी चिंताओं के कारण क्रिप्टोकरेंसी को लेकर सतर्क है.
RBI Remains Cautious on Crypto : भारत ने क्रिप्टोकरेंसी के प्रति सतर्क रुख अपनाया है, जबकि डिस्ट्रिब्यूटेड लेजर टेक्नोलॉजी और टोकनाइजेशन जैसी टेक्नोलॉजी को बढ़ावा दिया है. ये बात RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शनिवार यानी 3 अक्टूबर को कही है.
गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि भारत क्रिप्टो एसेट्स के पीछे की टेक्नोलॉजी में इनोवेशन का समर्थन करता है, जिसमें डिस्ट्रिब्यूटेड लेजर और टोकनाइजेशन शामिल हैं. लेकिन, मॉनेटरी सॉवरेनिटी, मॉनेटरी पॉलिसी और कैपिटल फ्लो (पूंजी प्रवाह) से जुड़ी चिंताओं के कारण क्रिप्टोकरेंसी को लेकर सतर्क है.
क्रिप्टो को लेकर सतर्क रुख!
उन्होंने कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव में कहा, 'हमारा दृष्टिकोण टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देने का रहा है और हम इनमें से कुछ का इस्तेमाल सेंट्रल बैंक में और बाहर PPP (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मोड में कर रहे हैं. लेकिन, जहां तक क्रिप्टो की बात है, तो इसे लेकर सतर्क रुख अपनाया गया है.'
गवर्नर ने कहा कि आप जिस समस्या को हल करने की कोशिश कर रहे हैं, वो मुख्य रूप से घरेलू पेमेंट की समस्या नहीं है, क्योंकि हमारे देश और कई अन्य देशों में घरेलू पेमेंट अब काफी तेज, सस्ते और सुविधाजनक हैं.
RBI गवर्नर ने क्रिप्टोकरेंसी को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि इससे देश की मुद्रा व्यवस्था पर असर पड़ सकता है. खासकर, इससे पैसे की एक समान कीमत बनाए रखने और मौद्रिक नीति को प्रभावी ढंग से लागू करने में दिक्कत आ सकती है. इसका असर उन उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर ज्यादा पड़ सकता है, जहां विदेशी पूंजी के फ्लो पर पहले से कुछ प्रतिबंध हैं.
क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट है सबसे बड़ी चुनौती
उन्होंने कहा कि ज्यादा बड़ी चुनौती क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट की है. इसके लिए सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) सहित अन्य समाधानों पर विचार किया जा सकता है. दुनिया भर में बढ़ते सरकारी कर्ज और बॉन्ड यील्ड में हो रही बढ़ोतरी पर मल्होत्रा ने कहा कि यील्ड में बदलाव असल में डिमांड और सप्लाई पर निर्भर करता है. इसमें सरकार और प्राइवेट सेक्टर का खर्च भी बढ़ रहा है. इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की वजह से होने वाला खर्च भी शामिल है.
खर्च बढ़ गया है : संजय मल्होत्रा
संजय मल्होत्रा ने कहा, 'पैसे की कमी है और खर्च बढ़ गया है. सरकार और प्राइवेट कंपनियां, दोनों ही AI की वजह से ज्यादा खर्च कर रही हैं और इसी वजह से बॉन्ड यील्ड और कर्ज बढ़ रहे हैं.'
मल्होत्रा ने कहा कि RBI की मॉनेटरी पॉलिसी मुख्य रूप से देश के अंदर विकास और महंगाई की स्थिति पर ध्यान देती है. लेकिन, ग्लोबल इंटरेस्ट रेट्स का भी भारत पर असर पड़ता है. इसमें देश में रियल इंटरेस्ट रेट्स पर पड़ने वाला असर भी शामिल है. उन्होंने कहा, 'इस बात का हमें ध्यान रखना होगा.'