Razorpay IPO: IPO से ₹6000 करोड़ जुटाएगी Razorpay, लेकिन आम यूजर्स को क्या मिलेगा? पेमेंट ऐप से लेकर UPI तक...समझिए क्या होगा असर?
Razorpay ने भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के पास इस साल जून में कॉन्फिडेंशियल तरीके से IPO के ड्राफ्ट पेपर्स जमा कराए थे.
Razorpay IPO: फिनटेक यूनिकॉर्न रेजरपे (Razorpay) को अपने प्रस्तावित इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) के लिए मार्केट रेगुलेटर भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) से मंजूरी मिल गई है. इस IPO के जरिए कंपनी 6,000 करोड़ रुपये (633 मिलियन डॉलर) तक जुटा सकती है. इस मामले से परिचित सूत्रों ने ये जानकारी दी.
सूत्रों ने बताया कि रेजरपे पब्लिक इश्यू के जरिए करीब 5 अरब डॉलर की वैल्यूएशन हासिल करने का टारगेट रख रही है.
इस साल जून में रेजरपे ने भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड के पास आईपीओ के ड्राफ्ट पेपर्स जमा कराए थे. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रेजरपे 2027 की पहली तिमाही में बाजार में एंट्री कर सकती है.
IPO से मिलने वाले पैसे का क्या करेगी रेजरपे?
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, IPO से जुटाई जाने वाली रकम का इस्तेमाल कंपनी के कारोबार के विस्तार, तकनीकी विकास, नए प्रोडक्ट और वित्तीय सेवाओं को मजबूत करने के लिए हो सकता है. लेकिन, फिलहाल IPO से मिलने वाली रकम के इस्तेमाल का डिटेल और अंतिम ब्योरा उपलब्ध नहीं है. इसलिए ये कहना सही नहीं होगा कि पूरे पैसे का इस्तेमाल कहां किया जायेगा.
कंपनी ने प्रस्तावित इश्यू के लिए एक्सिस कैपिटल, कोटक महिंद्रा कैपिटल, जेपी मॉर्गन और सिटी को बैंकर के तौर पर नियुक्त किया है. शुरुआत में कंपनी की योजना लगभग 7 अरब डॉलर के वैल्यूएशन पर 700 मिलियन डॉलर जुटाने की थी. लेकिन, निवेशकों के मौजूदा रुख को देखते हुए IPO लाने वाली कई कंपनियों ने पब्लिक मार्केट को लेकर अधिक सतर्क रवैया अपनाना शुरू कर दिया है.
2014 में IIT रुड़की के पूर्व छात्र हर्षिल माथुर और शशांक कुमार द्वारा स्थापित, रेजरपे बिजनेसेज को पेमेंट प्रोसेसिंग और बैंकिंग सर्विस देती है. इसके निवेशकों में GIC, पीक XV पार्टनर्स और टाइगर ग्लोबल शामिल हैं.
रेजरपे का किससे है मुकाबला?
रेजरपे का मुकाबला प्रोसस समर्थित पे-यू, कैशफ्री पेमेंट्स, पाइन लैब्स, फोन-पे और पेटीएम जैसी कंपनियों से है. पे-यू ने भी भारतीय बाजार में लिस्ट होने की योजना बनाई है, जबकि पाइन लैब्स और पेटीएम पहले से ही लिस्टेड हैं. फोन-पे के भी चालू वित्त वर्ष के अंत तक लिस्ट होने की संभावना है.
रेजरपे पिछले कुछ वर्षों से पब्लिक लिस्टिंग की तैयारी कर रही है. फरवरी 2024 में को-फाउंडर और हर्षिल माथुर ने कहा था कि कंपनी अपनी 'रिवर्स-फ्लिप' प्रक्रिया पूरी करने और अपना मुख्यालय (डोमिसाइल) भारत में स्थानांतरित करने के बाद IPO लाने की योजना बना रही है.
कंपनी ने मई 2025 में 'रिवर्स-फ्लिप' प्रक्रिया पूरी कर ली. इसके तहत उसने अपनी मूल कंपनी (पैरेंट कंपनी) का मुख्यालय अमेरिका से भारत स्थानांतरित कर दिया है. इस प्रक्रिया में अमेरिका में पंजीकृत अपनी मूल इकाई का भारतीय सब्सिडियरी, 'रेजरपे सॉफ्टवेयर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड' के साथ विलय किया गया है. रेजरपे ने भारतीय स्टॉक एक्सचेंजों पर लिस्टिंग की योजना के तहत मई 2023 में ही यह प्रक्रिया शुरू कर दी थी.
कंपनी की कमाई कितनी है और कितना घाटा हुआ?
वित्त वर्ष 2025 (FY25) में रेजरपे का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू सालाना आधार पर 65 प्रतिशत बढ़कर 3,783 करोड़ रुपये हो गया है. ये पिछले वित्त वर्ष में 2,296 करोड़ रुपये था. इसमें कंपनी के पेमेंट गेटवे बिजनेस, रेजरपे-एक्स (RazorpayX) और अंतरराष्ट्रीय कामकाज का बड़ा योगदान रहा. इसका ग्रॉस प्रॉफिट 906 करोड़ रुपये से बढ़कर 1,277 करोड़ रुपये हो गया है.
वित्त वर्ष 2025 में कंपनी को 1,209 करोड़ रुपये का नेट लॉस हुआ है. इसका मुख्य कारण कर्मचारियों के लिए स्टॉक ओनरशिप प्लान (ESOP) से जुड़े एकमुश्त खर्च और 'रिवर्स-फ्लिप' प्रक्रिया के कारण उत्पन्न हुई टैक्स देनदारियां थीं. सेबी की मंजूरी मिलने के बाद रेजरपे 2027 की शुरुआत में संभावित लिस्टिंग की तैयारी कर रहा है. ये बाजार की स्थितियों और निवेशकों की मांग पर निर्भर करेगा.
क्या है आम ग्राहकों के लिए इसका मतलब?
रेजरपे का IPO आम ग्राहकों के लिए सीधे तौर पर कोई नया पेमेंट ऐप या UPI सुविधा लेकर नहीं आ रहा है. न ही सिर्फ IPO की मंजूरी मिलने से ऑनलाइन पेमेंट के नियम बदल जाएंगे. लेकिन, इस लिस्टिंग की सबसे बड़ी अहमियत भारत के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम के लिए है. अगर कंपनी जुटाई गई पूंजी का इस्तेमाल बेहतर तकनीक, ट्रांजैक्शन, पेमेंट सेटलमेंट और कारोबारियों के लिए नई सर्विस विकसित करने में करती है, तो इसका फायदा धीरे-धीरे आम ग्राहकों तक भी पहुंच सकता है.
दुकानदारों और छोटे कारोबारियों को क्या फायदा हो सकता है?
Razorpay का कारोबार केवल बड़े ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म तक सीमित नहीं है. छोटे कारोबारियों, स्टार्टअप और ऑनलाइन बिजनेस को भी कंपनी पेमेंट स्वीकार करने के लिए तकनीकी सुविधाएं देती है. IPO के बाद कंपनी अपने टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म, पेमेंट लिंक, पेमेंट पेज और सेटलमेंट सिस्टम को बेहतर बनाने में निवेश करती है, तो कारोबारियों को फायदा हो सकता है.