रेलवे कर्मचारियों को 78 दिन की सैलरी के बराबर मिलेगा बोनस? PIB ने वायरल दावे पर दिया बड़ा अपडेट
रेलवे बोर्ड ने साफ किया है कि यह डॉक्यूमेंट नकली है और इस पर फर्जी साइन हैं और रेलवे ऑफिस और स्टाफ से कहा गया है कि वे इस कथित बोनस घोषणा पर कोई कार्रवाई न करें या इसके आधार पर कोई पेमेंट न करें.
सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर एक नकली लेटर तेजी से वायरल हो रहा है. इसमें दावा किया गया है कि एलिजिबल नॉन-गजेटेड रेलवे कर्मचारियों को 78 दिनों की सैलरी के बराबर प्रोडक्टिविटी लिंक्ड बोनस (PLB) मिलेगा. इस वजह से रेलवे बोर्ड को सफाई देनी पड़ी है. इस कथित लेटर में RBE नंबर 101/2026 और तारीख 6 अक्टूबर, 2026 लिखी है. इसमें दावा किया गया है कि रेलवे बोर्ड ने बोनस को मंजूरी दे दी है और एलिजिबल कर्मचारियों को 41,149 रुपये का पेमेंट मिलेगा.
रेलवे बोर्ड ने इस लेटर को नकली और मनगढ़ंत बताते हुए खारिज कर दिया है और कहा है कि इसे बोर्ड ने जारी नहीं किया है.
सोशल मीडिया पर फैला नकली लेटर
रेलवे बोर्ड के मुताबिक, ये लेटर अलग-अलग सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर फैलने के बाद उनके ध्यान में आया. बताया जा रहा है कि लेटर पर उस अधिकारी के जाली हस्ताक्षर हैं जिनका नाम इस कथित लेटर में लिखा है. बोर्ड ने साफ कर दिया है कि न तो ये लेटर और न ही इसमें लिखी बातें अधिकृत हैं. बोर्ड ने जोनल रेलवे, प्रोडक्शन यूनिट और रेलवे के दूसरे ऑफिसों को खास तौर पर निर्देश दिया है कि वे इस डॉक्यूमेंट पर कोई कार्रवाई न करें और न ही इस पर ध्यान दें.
बोनस के दावे को अनधिकृत घोषित किया गया
नकली लेटर में दावा किया गया है कि योग्य नॉन-गजेटेड रेलवे कर्मचारी 78 दिनों की सैलरी के बराबर प्रोडक्टिविटी लिंक्ड बोनस पाने के हकदार हैं. इसमें 41,149 रुपये का पेमेंट बताया गया है. रेलवे बोर्ड ने कहा है कि सर्कुलेट किए गए पत्र के आधार पर कोई कार्रवाई न की जाए और न ही कोई पेमेंट किया जाए.
सभी संबंधित रेलवे ऑफिस को सलाह दी गई है कि वे इस डॉक्यूमेंट को पूरी तरह से नजरअंदाज करें और अधिकारियों और कर्मचारियों को इस फर्जी सूचना के बारे में जानकारी दें. रेलवे बोर्ड ने कर्मचारियों से बोनस नोटिस की पुष्टि करने को कहा है.
रेलवे बोर्ड ने कर्मचारियों और अधिकारियों को सलाह दी है कि PLB पेमेंट से जुड़ी किसी भी सूचना पर कार्रवाई करने से पहले, वे रेल मंत्रालय और रेलवे बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट के जरिए उसकी सच्चाई की पुष्टि कर लें. साथ ही, ये भी चेतावनी दी गई है कि सोशल मीडिया, मैसेजिंग प्लेट या अन्य अनधिकृत स्रोतों से मिली सूचनाओं को आधिकारिक निर्देश न माना जाए और न ही उनके आधार पर कोई पेमेंट किया जाए.