पेट्रोल पर ₹8, LPG पर ₹300 का घाटा: महंगे तेल से रोज हो रहा है ₹530 करोड़ का नुकसान, क्या फिर बढ़ेंगे दाम?
Oil Company: महंगे कच्चे तेल ने भारत की तेल कंपनियों का घाटा बढ़ाकर 18000 करोड़ रुपये पर पहुंचा दिया है. हर दिन तेल कंपनियां 530 करोड़ का नुकसान झेल रही रही है. सवाल ये कि ये नुकसान वो कब तक झेल पाएंगी, क्या इसका बोझ फिर से आम आदमी पर पहुंचेगा?
India Oil Import Bill: खाड़ी युद्ध के चलते कच्चे तेल की कीमतों में भारी तेजी फिर से लौटी है. ईरान-अमेरिका के बीच समझौते की स्थिति बनती नहीं दिख रही है. होर्मुज खुलने के आसार खत्म होते जा रहे हैं. सप्लाई अटकने से क्रूड की कीमत 108 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है. भारत के लिए ये चिंताजनक हैं, क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है. बढ़ता आयात बिल तेल कंपनियों के घाटे को बढ़ा रहा है. हर लीटर पेट्रोल-डीजल और LPG की हर सिलेंडर पर कंपनियां भारी नुकसान झेल रही है.
भारतीय तेल रिफाइनरियों पर भारी दवाब
भारत जरूरत का 85 फीसदी तक क्रूड इम्पोर्ट करता है. भारतीय तेल रिफाइनरियों को फिजिकल क्रूड के लिए फ्यूचर्स प्राइस से ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है. क्रूड ऑल की फ्यूचर रेट के मुकाबले स्पॉट रेट 15 डॉलर अधिक पर पहुंच गई है. गल्फ देशों से सप्लाई अटकने के चलते स्पॉट प्राइस में तेजी आ रही है. US एनर्जी इंफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन (EIA) के डेटा के मुताबिक 1 से 22 सितंबर के बीच ब्रेंट क्रूड की स्पॉट प्राइस नवंबर के फ्यूचर्स प्राइस से औसतन करीब 12 डॉलर ज्यादा रहा. 15 सितंबर के बाद तो ये अंतर बढ़कर 22 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है.
महंगे तेल से तेल कंपनियां, रिफाइनरियों पर भारी दबाव
पश्चिम एशिया तनाव और सप्लाई संकट की वजह से कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ी का दबाव भारतीय रिफाइनरियों और तेल कंपनियों पर बढ़ रहा है. भारत की तीन बड़ी सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियां हर दिन करीब 530 करोड़ रुपये का नुकसान झेल रही है. ICRA के डेटा के मुताबिक क्रूड प्राइस में तेजी और मौजूदा कीमतों के बावजूद घरेलू रिटेल कीमतों में बदलाव नहीं होने के चलते इन कंपनियों को हर दिन 530 करोड़ रुपये का घाटा हो रहा है.
- कंपनियों को डीजल पर करीब 9 रुपये प्रति लीटर का घाटा हो रहा है.
- पेट्रोल पर करीब 8 रुपये प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है.
- घरेलू LPG सिलेंडर पर करीब 300 प्रति सिलेंडर नुकसान हो रहा है.
18000 करोड़ रुपये के नुकसान में तेल कंपनियां
ICRA के मुताबिक कच्चे तेल का बढ़ता आयात बिल और रिटेल प्राइस में बदलाव नहीं होने से तेल कंपनियों का घाटा लगातार बढ़ता जा रहा है. भारतीय तेल कंपनियों के लिए इंडियन क्रूड बास्केट 21 सितंबर को करीब 117.4 डॉलर/बैरल पर पहुंच गया है, जबकि FY25-26 में इसकी औसत वैल्यू 66 डॉलर प्रति बैरल थी. आयात लागत बढ़ने का असर तेल कंपनियों की प्रॉफिटेबिलिटी और कैश फ्लो पर पड़ रहा है.
फिजिकल मार्केट में तेल की हाई प्राइसिंल रिफाइनरियों की खरीद लागत को बढ़ा रही है. महंगा क्रूड सीधे भारतीय रिफाइनरों की इनपुट लागत और मार्जिन पर असर डालती है. अप्रैल-जून 2026 में तेल कंपनियों को ज्वाइंट नेट लॉस 18,000 करोड़ रुपये से अधिक रहा.
सप्लाई संकट से तेल रिफाइनरियों पर बढ़ रहा दवाब
होर्मुज बंद होने की वजह से तेल सप्लाई पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं. सप्लाई अटकने से तेल कंपनियों को फ्यूचर्स रेट्स से ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है. सप्लायर्स फ्यूचर्स कीमतों से 20 डॉलर प्रति बैरल तक का प्रीमियम मांग रहे हैं. खाड़ी देशों से सप्लाई अटकने की वजह से तेल का फिजिकल मार्केट टाइट है.
अब आगे क्या होगा ?
तेल कंपनियों की चिंता है कि अगर ये युद्ध खत्म नहीं हुआ, होर्मुज नहीं खुला, तो उसका घाटा बढ़ता चला जाएगा. ICRA के मुताबिक, अगर ग्लोबल मार्केट में ब्रेंट क्रूड की कीमत अगले वित्त वर्ष की बाकी अवधि में भी 105-115 डॉलर प्रति बैरल के बीच बनी रही और घरेलू रिटेल कीमतों में रहता है और पेट्रोल-डीजल की घरेलू कीमतें नहीं बढ़तीं, तो तेल कंपनियों की अंडर रिकवरी 64,000 करोड़ रुपये तक हो सकती है.
जबकि LPG पर तेल कंपनियों का सालाना घाटा 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो सकती है. अब सवाल ये है कि तेल कंपनियां कब तक इस बोझ को उठाएंगी. अगर तेल कंपनियां इस घाटे को नहीं झेल पाई, तो फिर से पेट्रोल-डीजल की कीमत बढ़ेगी. गैस सिलेंडर के दाम बढ़ाने पड़ सकते हैं. तेल कंपनियों के इस घाटे को कम करने के लिए रिटेल प्राइस में बदलाव किया जा सकता है.
पेट्रोल-डीजल , LPG सिलेंडर के बढ़े थे दाम
तेल कंपनियों के बढ़ रहे घाटे के बाद मई 2026 में सरकार ने लगातार 4 बार रेट रिवाइज कर पेट्रोल के दाम में 7.35 रुपये प्रति लीटर, डीजल की कीमत में 7.53 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी. LPG सिलेंडर के रेट्स कई बार बढ़ाए गए.