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LNG Supply : भारत के लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) के आयात में सितंबर महीने के दौरान बड़ा बदलाव देखने को मिला. एनर्जी मार्केट के आंकड़ों के मुताबिक, ओमान भारत का सबसे बड़ा LNG सप्लायर बनकर उभरा और उसने अमेरिका को पीछे छोड़ दिया है. ये बदलाव ऐसे समय में आया है जब भारत वेस्ट एशिया में जारी जियो-पॉलिटिकल टेंशन्स के बीच अपने एनर्जी आयात सोर्स में विविधता लाने की रणनीति पर लगातार काम कर रहा है.
एनर्जी विश्लेषण कंपनी केप्लर के आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर में भारत ने ओमान से 5.85 लाख टन एलएनजी का आयात किया. ये अगस्त की तुलना में 11.6 प्रतिशत अधिक था. इसके साथ ही भारत के कुल LNG आयात में ओमान की हिस्सेदारी लगभग 27 प्रतिशत रही है.

नाइजीरिया सितंबर में भारत का दूसरा सबसे बड़ा एलएनजी सप्लायर रहा है. हालांकि, वहां से आयातित वॉल्यूम 3.51 लाख टन रही. ये पिछले महीने की तुलना में 35 प्रतिशत कम थी. वहीं, अगस्त में भारत का सबसे बड़ा एलएनजी सप्लायर रहा अमेरिका तीसरे स्थान पर खिसक गया. अमेरिका से आयात 59 प्रतिशत घटकर सितंबर में लगभग 16 प्रतिशत हिस्सेदारी तक सीमित रह गया.
एक समय भारत के LNG आयात का सबसे बड़ा सोर्स रहा कतर भी इस लिस्ट में काफी पीछे चला गया. सितंबर में कतर से केवल 94,000 टन एलएनजी आयात किया गया और वह छठे स्थान पर रहा. इसके मुकाबले संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने 3.11 लाख टन और अंगोला ने 2.05 लाख टन LNG भारत को निर्यात की है.
विश्लेषकों के अनुसार, कतर की सप्लाई में आई गिरावट का प्रमुख कारण मार्च में रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी पर हुए हमले का प्रभाव है. ये क्षेत्र कतर का प्रमुख LNG उत्पादन केंद्र माना जाता है और भारत सहित कई देशों के लिए प्राकृतिक गैस का महत्वपूर्ण सोर्स है.
सितंबर में भारत का कुल LNG आयात भी घटा है. अगस्त में जहां आयात 25 लाख टन था. वहीं, सितंबर में यह 14 प्रतिशत घटकर 21.7 लाख टन रह गया. प्राकृतिक गैस भारत की अर्थव्यवस्था के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए जरूरी है. इसका उपयोग उर्वरक उत्पादन, औद्योगिक ताप प्रक्रियाओं, बिजली उत्पादन और शहरी परिवहन में बड़े पैमाने पर किया जाता है. भारत अपनी LNG जरूरतों का लगभग आधा हिस्सा आयात करता है.
वर्तमान में भारत के एलएनजी आयात का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा पश्चिम एशियाई देशों, विशेष रूप से कतर और यूएई से आता है. इन आपूर्तियों का बड़ा हिस्सा होर्मुज से होकर गुजरता है, जिससे क्षेत्रीय तनावों का सीधा असर ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है. इसी जोखिम को कम करने के लिए भारत सरकार ने हाल के वर्षों में ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने की रणनीति अपनाई है. इसके तहत एलएनजी, एलपीजी और कच्चे तेल की खरीद कनाडा, अल्जीरिया, अमेरिका, मोजाम्बिक और ब्राजील जैसे देशों से भी बढ़ाई जा रही है.
एनालिस्ट का कहना है कि भारत के कच्चे तेल आयात अपेक्षाकृत सुरक्षित हैं क्योंकि उनके सोर्स काफी विविध हैं. लेकिन, LNG और LPG के मामले में स्थिति अलग है, क्योंकि इसके ऑप्शन सीमित हैं और खाड़ी क्षेत्र में किसी भी सप्लाई या शिपिंग व्यवधान का असर भारतीय बाजार पर जल्दी पड़ सकता है.
(IANS के इनपुट के साथ)