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Nike Restructuring Plan: 'Just Do It' स्लोगन के जरिये दुनिया में अपनी पहचान बनाने वाला स्पोर्ट्स ब्रांड नाइकी (Nike) आज बेहद मुश्किल दौर से गुजर रहा है. कंपनी की मार्केट वैल्यूएशन से 230 बिलियन डॉलर खाक हो गए. घटती बिक्री, गिरता प्रॉफिट, चीन के बाजार में करारी शिकस्त और गलत पॉलिसी के कारण इस दिग्गज ब्रांड की चमक फीकी पड़ती जा रही है. असर यह हो रहा है कि कंपनी बड़े पैमाने पर छंटनी, रीस्ट्रक्चरिंग और बेंगलुरु में नया कैंपस बनाकर इस संकट से बाहर निकालने की कोशिश में जुटी है.
दशकों तक स्पोर्ट्स और फैशन मार्केट की शहंशाह बनी रही नाइकी (Nike) आज एक अलग मोड़ पर आकर खड़ी हो गई है. कंपनी की ऑल आई से मार्केट वैल्यूएशन 230 बिलियन डॉलर नीचे आ गई है. 31 अगस्त को खत्म हुई तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू 4 प्रतिशत घटकर 11.2 बिलियन डॉलर रह गया और प्रॉफिट 712 मिलियन डॉलर रह गया. निवेशकों को बड़ा झटका तब लगा जब कंपनी की तरफ से चेतावनी दी गई कि FY 2027 में भी उसकी बिक्री में गिरावट आ सकती है. इस घोषणा के बाद कंपनी के शेयर में गिरावट देखी जा रही है.
बड़ा सवाल यही है कि आखिर इतने बड़े स्पोर्ट्स ब्रांड को अचानक क्या हो गया? समस्या यह नहीं है कि लोगों ने स्पोर्ट्सवियर या जूते खरीदना बंद कर दिया. समस्या यह है कि नाइकी (Nike) की तरफ से ऐसे प्रोडक्ट कम बनाए जा रहे हैं, जिन्हें देखकर कस्टमर हर हाल खरीदने के लिए मजबूर हो जाएं. नाइकी का कहना है कि उसका कोर स्पोर्ट्स और रनिंग सेगमेंट सुधर रहा है. कंपनी के लाइफस्टाइल बिजनेस पर असर देखा जा रहा है.
नाइकी को सबसे ज्यादा नुकसान चीन में हुआ है. तिमाही आंकड़ों के अनुसार ग्रेटर चाइना से नाइकी के रेवेन्यू में 22 फीसदी की भारी गिरावट आई है. करेंसी-न्यूट्रल बेस पर देखें तो यह गिरावट 26 फीसदी तक पहुंच जाती है. चीन में पिछले एक क्वार्टर से नाइकी की बिक्री लगातार गिर रही है. इसका अहम कारण यह है कि चीन के लोकल स्पोर्ट्स ब्रांड्स अब काफी आगे बढ़ चुके हैं. इतना ही नहीं वे चाइनीज कस्टमर की बदलती पसंद को इंटरनेशनल ब्रांड्स से बेहतर समझ रहे हैं. नाइकी की डिस्ट्रीब्यूशन स्ट्रेटजी भी चीन में फ्लॉप साबित हुई है. नाइकी अब चीन में अपने ऑनलाइन सेल्स मॉडल को बदलने की तैयारी कर रहा है.
नाइकी ने पिछले कुछ सालों के दौरान डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर (D2C) मॉडल पर जबरदस्त काम किया. कंपनी ने होलसेल रिटेलर्स पर निर्भरता कम करके सीधे अपने ऐप और स्टोर्स से सामान बेचने की पॉलिसी तैयार की. लेकिन कंपनी के लिए यह फैसला गलत साबित हुआ. होलसेल स्टोर्स से हटने के कारण नाइकी के प्रोडक्ट उन दुकानों से गायब हो गए जहां आम कस्टमर खरीदारी के लिए जाता था. बिक्री गिरने पर नाइकी को गलती का अहसास हुआ और अब कंपनी फिर से होलसेल रिटेलर्स के साथ रिलेशन सुधारने पर काम कर रही है.