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क्या होती है मुहूर्त ट्रेडिंग और इस बार दोपहर में बाजार खोलने की जिद क्यों अड़े ब्रोकर्स?

ब्रोकरों ने दिवाली के दिन, दोपहर में ट्रेडिंग कराने की डिमांड की है, ताकि मार्केट में काम करने वाले लोग अपने परिवारों के साथ त्योहार मना सकें.

Written ByGaurav Singh
Published: Oct 19, 2026, 04:20 PM IST|Updated: Oct 19, 2026, 04:31 PM IST
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क्या होती है मुहूर्त ट्रेडिंग और इस बार दोपहर में बाजार खोलने की जिद क्यों अड़े ब्रोकर्स?
Image Credit: बाजार के प्रतिभागियों के आग्रह पर 'मुहूर्त ट्रेडिंग' फिर से दोपहर के समय में शिफ्ट हो सकती है | सोशल मीडिया

About the Author

    Gaurav Singh

    Gaurav Singh

    जी न्यूज में सीनियर सब-एडिटर हैं और वर्तमान में बिजनेस व फाइनेंशियल न्यूज कवर करते हैं.  देश की राजनीति से लेकर दुनिया के बनते-बिगड़ते सत्ता समीकरणों और घटनाओं को कवर कर चुके हैं  पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो UPTU से इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन किया है. उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाले गौरव ने अपने करियर की शुरुआत डिजिटल मीडिया से की और पिछले 6 वर्षों से लगातार इस क्षेत्र में सक्रिय हैं. आप गौरव सिंह से Gaurav.Singh@India.Com पर ईमेल के जरिए सीधे जुड़ सकते हैं. 
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    अगर शेयर मार्केट में आपकी दिलचस्पी है, तो ये खबर आपके काम की है. स्टॉक ब्रोकरों और बाजार में कारोबार करने वाले लोगों ने एक बार फिर स्टॉक एक्सचेंजों से अनुरोध किया है कि वे पिछले साल की तरह ही इस बार भी दिन के समय 'मुहूर्त ट्रेडिंग' आयोजित करने पर विचार करें. ब्रोकरों ने 'ब्रोकर्स इंडस्ट्री स्टैंडर्ड्स फोरम' (BISF) के माध्यम से एक्सचेंजों (NSE एंड BSE) को एक प्रस्ताव सौंपा है.

    ब्रोकरों ने बताया है कि इस साल दिवाली पर शुभ मुहूर्त का समय दोपहर 1:47 बजे से 3:12 बजे के बीच है. उन्होंने दोपहर 2 बजे से 3 बजे के बीच ट्रेडिंग सेशन रखने का प्रस्ताव दिया है. सूत्रों के मुताबिक, एक्सचेंज इस अनुरोध पर विचार कर रहे हैं. शुरुआती योजना के तहत 'मुहूर्त ट्रेडिंग' दोपहर 2:20 बजे से 3:20 बजे के बीच हो सकती है. इससे पहले दोपहर 1:50 बजे से 2:05 बजे तक 'ब्लॉक डील' विंडो होगी और उसके बाद 2:05 बजे से 2:20 बजे तक 'प्री-ओपन' सेशन होगा. हालांकि, इसके लिए अभी तक कोई आधिकारिक सर्कुलर जारी नहीं किया गया है.

    एक्सचेंज आमतौर पर ट्रेडिंग शेड्यूल और छुट्टियों को तय करने से पहले आपस में सलाह-मशविरा करते हैं. इन चर्चाओं के पूरा होने के बाद ही 'मुहूर्त ट्रेडिंग' के फाइनल शेड्यूल की घोषणा होने की उम्मीद है. पिछले साल, 'मुहूर्त ट्रेडिंग' को शाम के पारंपरिक समय के बजाय दोपहर 1:45 बजे से 2:45 बजे के बीच रखा गया है. लेकिन, अभी तक BSE और NSE ने इस पर कोई जवाब नहीं दिया है.

    एसोसिएशन ऑफ एनएसई मेंबर्स ऑफ इंडिया (ANMI) ने अलग से एक्सचेंजों से आग्रह किया है कि वे 'परंपरा, समावेशिता और वर्क लाइफ बैलेंस को ध्यान में रखते हुए दोपहर में 'मुहूर्त ट्रेडिंग' कराने के प्रस्ताव पर विचार करें. ANMI के राष्ट्रीय अध्यक्ष कमलेश श्रॉफ ने कहा, 'इससे हमारी महत्वपूर्ण बाजार परंपरा भी बनी रहेगी और ब्रोकरों, कर्मचारियों तथा उनके परिवारों को देर शाम तक चलने वाले ट्रेडिंग सेशन के दबाव के बिना, एक साथ दिवाली मनाने का मौका भी मिल जाएगा.'

    मुहूर्त ट्रेडिंग के समय पर विचार करने का आग्रह

    'धन' (Dhan) के फाउंडर जय प्रकाश गुप्ता ने पिछले साल MIIs (मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर इंस्टीट्यूशंस) से दिन के समय मुहूर्त ट्रेडिंग पर विचार करने का आग्रह करने की पहल की थी. उन्होंने इस साल भी यही मांग दोहराई है. उन्होंने कहा, 'मुहूर्त ट्रेडिंग बाजार की एक अहम परंपरा है. लेकिन, इसके साथ कई तरह की ऑपरेशनल और कंप्लायंस (नियम-पालन) संबंधी जिम्मेदारियां भी आती हैं, जिनकी वजह से लोगों को अक्सर देर शाम तक काम में उलझे रहना पड़ता है. इस दिवाली पर अगर दोपहर में मुहूर्त ट्रेडिंग होती है, तो ये प्रोफेशनल्स अपनी जिम्मेदारियां भी पूरी कर सकेंगे और अपने परिवारों के साथ त्योहार भी मना सकेंगे.

    ब्रोकरों का तर्क है कि दोपहर में ट्रेडिंग सेशन होने से ब्रोकरेज फर्मों, स्टॉक एक्सचेंजों, क्लियरिंग कॉरपोरेशन, डिपॉजिटरी, कस्टोडियन, बैंकों और अन्य मार्केट इंटरमीडियरीज (बाजार मध्यस्थों) में काम करने वाले हजारों कर्मचारियों को अपना काम समय पर पूरा करने और शाम के शुभ समय में अपने परिवारों के साथ दिवाली मनाने का मौका मिलेगा. 

    उन्होंने स्पष्ट किया है कि उनका मकसद रेगुलेटरी मानकों (नियमों) में कोई ढील पाना नहीं है, बल्कि बाजार के प्रोफेशनल्स को अपने परिवारों के साथ त्योहार मनाने में मदद करना है. साथ ही यह सुनिश्चित करना है कि बाजार का कामकाज सुचारू रूप से चलता रहे.

    ब्रोकरों ने मुहूर्त ट्रेडिंग के बाद पूरी की जाने वाली 'पोस्ट-ट्रेड कंप्लायंस' (ट्रेड के बाद के नियमों के पालन) की जरूरतों की ओर भी ध्यान दिलाया है. उन्होंने प्रस्ताव दिया है कि कुछ प्रक्रियाओं जैसे कि सिक्योरिटीज का 'अर्ली पे-इन' (समय से पहले भुगतान) और फंड एलोकेशन (धन का आवंटन) को अगले ट्रेडिंग दिन पूरा करने की अनुमति दी जाए. 

    ब्रोकरों के मुताबिक, मौजूदा शेड्यूल की वजह से स्टॉक एक्सचेंजों और क्लियरिंग कॉरपोरेशन जैसी संस्थाओं के कर्मचारियों को अपने परिवारों के साथ त्योहार मनाने के लिए बहुत कम समय मिल पाता है. कंप्लायंस की बढ़ती जरूरतों और रिपोर्टिंग की सख्त समय-सीमा के कारण, कर्मचारियों को अक्सर 'पोस्ट-ट्रेड' प्रक्रियाओं (जैसे फंड एलोकेशन और सिक्योरिटीज का अर्ली पे-इन) को पूरा करने के लिए देर तक रुकना पड़ता है. 

    ब्रोकर्स का कहना है कि जब तक वे अपना काम खत्म करके घर पहुंचते हैं, तब तक दिवाली मनाने का उत्साह खत्म हो चुका होता है. उन्होंने बताया कि ये समस्या कई सालों से बनी हुई है.

    क्या है 'मुहूर्त ट्रेडिंग'?

    भारतीय शेयर बाजारों में 'मुहूर्त ट्रेडिंग' एक पुरानी परंपरा है. ये हर साल दिवाली के दिन आयोजित की जाती है. हिंदू परंपरा में देवी लक्ष्मी की पूजा से जुड़ी इस खास ट्रेडिंग सेशन में निवेशक धन और समृद्धि के प्रतीक के रूप में हिस्सा लेते हैं. ये सेशन विक्रम संवत कैलेंडर के अनुसार नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत का भी प्रतीक है. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) ने 1957 में 'मुहूर्त ट्रेडिंग' की परंपरा शुरू की थी, तब से ये विशेष ट्रेडिंग सेशन पारंपरिक रूप से शाम के समय आयोजित किया जाता रहा है. हालांकि, पिछले साल इसके समय को बदलकर दोपहर कर दिया गया था.

    क्या है ब्रोकर्स की मुख्य डिमांड?

    • ब्रोकर चाहते हैं कि दिवाली पर 'मुहूर्त ट्रेडिंग' दिन के समय हो
    • इसके लिए दोपहर 2 बजे से 3 बजे के बीच का समय प्रस्तावित किया गया है
    • दिन के समय ट्रेडिंग करने से काम और निजी जीवन के बीच बेहतर संतुलन बना रहता है
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