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Moonshot AI CEO: टेक इंडस्ट्री में किसी नई शख्सियत का प्रभाव रोज-रोज देखने को नहीं मिलता. आमतौर पर इस क्षेत्र पर सिलिकॉन वैली के कुछ चुनिंदा टेक दिग्गजों का दबदबा रहता है, जैसे एलन मस्क, मार्क जुकरबर्ग और अब शायद सैम ऑल्टमैन या डारियो अमोडेई. लेकिन, अब Moonshot AI के CEO और सह-संस्थापक यांग जिलिन भी चर्चा में हैं. खासकर Kimi K3 AI मॉडल के लॉन्च के बाद टेक जगत की नजरें उन पर टिक गई हैं.
अमेरिका से पीएचडी पूरी करने के बाद 33 वर्षीय यांग चीन वापस आए और अपनी खुद की AI कंपनी शुरू की. आज वो Moonshot AI के को-फाउंडर और CEO हैं. ये चीन की प्रमुख आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस लैब्स में से एक है.
कंपनी ने अपने Kimi AI मॉडल्स की फैमिली के जरिए दुनियाभर में पहचान बनाई है. इसमें Kimi K3 भी शामिल है. इसे जुलाई 2026 में लॉन्च किया गया था. रिपोर्ट्स के मुताबिक, Moonshot AI के हालिया निजी फंडिंग राउंड में कंपनी की वैल्यूएशन 50 अरब डॉलर आंकी गई है. वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी ने हांगकांग में IPO के लिए गोपनीय रूप से आवेदन भी जमा किया है.
यांग ने महज 17 साल की उम्र में प्रोग्रामिंग की गहन ट्रेनिंग शुरू कर दी थी. इसके बाद उन्होंने चीन की नेशनल ओलिंपियाड इन इन्फार्मेटिक्स प्रतियोगिता में हिस्सा लिया, आगे चलकर उन्होंने Tsinghua यूनिवर्सिटी में पढ़ाई की, जहां उन्होंने मशीन लर्निंग पर रिसर्च की और प्रोफेसर Tang Jie के साथ कई चर्चित रिसर्च पेपर भी लिखे.
साल 2015 में वो पीएचडी करने के लिए कार्नेगी मेलन विश्वविद्यालय चले गए. वहां उन्होंने कंप्यूटर साइंटिस्ट Ruslan Salakhutdinov और William Cohen के मार्गदर्शन में काम किया. उनके रिसर्च वर्क की प्रोफेसरों ने काफी सराहना की.
प्रोफेसरों के मुताबिक, यांग को बहुत ज्यादा मार्गदर्शन की जरूरत नहीं पड़ती थी और वो अपने रिसर्च आइडिया को तेजी से विकसित करने में सक्षम थे. पीएचडी के अंतिम दौर में यांग ने चीन लौटकर अपना स्टार्टअप शुरू करने का फैसला किया.
वॉल स्ट्रीट जर्नल के मुताबिक, उनके पीएचडी सलाहकार Salakhutdinov ने उन्हें इस फैसले को लेकर सावधान भी किया था.

अमेरिका में काम करने के दौरान यांग ने जिस वर्कप्लेस कल्चर का अनुभव किया था, उसकी कुछ झलक उन्होंने Moonshot AI में भी शामिल की है. बीजिंग स्थित ये कंपनी पदनाम और हाइरार्की (ऊंच-नीच वाली पारंपरिक व्यवस्था) से बचती है. यांग जिलिन के लिए सीधी बातचीत एक व्यक्तिगत सिद्धांत है. कंपनी में करीब 300 कर्मचारी हैं. इसके ऑफिस में कॉन्फ्रेंस रूम्स के नाम मशहूर संगीतकारों और बैंड्स के नाम पर रखे गए हैं. इनमें Led Zeppelin, Metallica, Queen, Prince और Bob Dylan जैसे नाम शामिल हैं. कर्मचारी कभी-कभी ऑफिस में चप्पल पहनकर भी काम करते हैं. कंपनी का चीनी नाम 'The Dark Side of the Moon' है. माना जाता है कि ये यांग के रॉक बैंड Pink Floyd के प्रति लगाव को दर्शाता है. चीन के एक स्टार्टअप में यांग का पश्चिमी संस्कृति को अपनाने का ये तरीका फिलहाल काम करता हुआ नजर आ रहा है.
रिपोर्ट के मुताबिक, पीएचडी के अंतिम दौर में हुई बातचीत के दौरान यांग ने साफ कर दिया था कि वो चीन लौटकर अपना स्टार्टअप शुरू करना चाहते हैं. उनके इस फैसले ने उनके सलाहकारों को हैरान कर दिया था. Salakhutdinov ने कथित तौर पर कहा था, 'अगर मैं उनकी जगह होता, तो ऐसा नहीं करता.' यांग के एक साथी पीएचडी छात्र ने बताया कि यांग को भरोसा था कि अगर उन्हें पर्याप्त फंडिंग और कंप्यूटिंग संसाधन मिल जाएं, तो वो ऐसे AI मॉडल बना सकते हैं जो OpenAI और Google के सिस्टम्स को टक्कर दे सकें.
Carnegie Mellon में यांग के सह-मार्गदर्शक और मशीन लर्निंग के प्रोफेसर William Cohen ने वॉल स्ट्रीट जर्नल को बताया कि पीएचडी के दौरान यांग 'चीन के शीर्ष स्कूल से आया एक हॉटशॉट' जैसा था. Carnegie Mellon में पढ़ाई के अंतिम दौर में यांग ने Google Brain में इंटर्नशिप भी की थी. 2019 में उन्होंने Google Brain के संस्थापक सदस्यों में से एक Quoc V. Le के साथ मशीन लर्निंग पर दो रिसर्च पेपर लिखे. आज इन पेपर्स को 20,000 से अधिक बार उद्धृत किया जा चुका है.
अब Moonshot AI अपने अगले बड़े लक्ष्य की ओर बढ़ रही है. रायटर्स के मुताबिक, स्टार्टअप की योजना 2027 की शुरुआत में IPO लाने की है. कंपनी अपने IPO के जरिए करीब 3 अरब डॉलर जुटाने का लक्ष्य रखा है. एक ऐसे समय में जब चीन के कई AI और टेक टैलेंट बेहतर अवसरों के लिए अमेरिका का रुख कर रहे हैं. यांग जिलिन का चीन लौटकर अपनी AI कंपनी खड़ी करना और उसे वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाना एक अलग कहानी पेश करता है.
यांग जिलिन का जन्म 1992 में चीन के गुआंगडोंग प्रांत के शान्ताउ शहर में हुआ था. उन्होंने Tsinghua यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की और इसके बाद पेंसिल्वेनिया स्थित Carnegie Mellon यूनिवर्सिटी (CMU) से पीएचडी पूरी की. वहां उन्होंने Russ Salakhutdinov और William Cohen समेत कई प्रमुख AI रिसर्चर्स के साथ काम किया. CMU में यांग ने महज चार साल में अपनी पीएचडी पूरी कर ली और मशीन लर्निंग के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया. पढ़ाई पूरी करने के बाद यांग झिलिन ने Google Brain और Meta में काम किया और कई रिसर्च पेपर भी प्रकाशित किए. इसके बाद वह चीन लौट आए और अपने देश में AI से जुड़े प्रोजेक्ट्स पर काम करने लगे. इनमें Huawei का PanGu मॉडल और बीजिंग अकेडमी ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का Wu Dao शामिल था. Wu Dao एक बड़े पैमाने का मल्टीमॉडल AI मॉडल है.
Kimi K3 के लॉन्च के बाद इस बात पर भी चर्चा शुरू हो गई कि आखिर यांग जिलिन अमेरिका में ही क्यों नहीं रुके. कुछ प्रमुख टेक हस्तियों ने तर्क दिया कि अमेरिका अपनी नीतियों के कारण प्रतिभाशाली लोगों को दूर कर रहा है. यांग के प्रोफेसर और मेंटर Russ Salakhutdinov ने कहा कि अमेरिका की इमिग्रेशन प्रक्रिया डराने वाली और 'अनिश्चित' हो सकती है. लेकिन, उन्होंने ये भी स्पष्ट किया कि यांग की चीन लौटने की योजना पहले से ही थी.

एक समय एप्पल यांग जिलिन को अपनी टीम में शामिल करने के लिए इतना उत्सुक था कि कंपनी उन्हें बीजिंग से ही काम करने की अनुमति देने को तैयार थी. Russ Salakhutdinov ने बताया कि वो एप्पल के एक वरिष्ठ अधिकारी के साथ ईमेल बातचीत में शामिल थे. उस अधिकारी ने पूछा था कि क्या यांग एप्पल से जुड़ने में दिलचस्पी रखते हैं. Salakhutdinov ने जवाब दिया कि यांग अपने देश वापस जाना चाहते हैं. इसके बाद एप्पल की ओर से जवाब आया कि अगर वो चाहें तो कंपनी का बीजिंग में ऑफिस है और वो वहीं से एप्पल के लिए काम कर सकते हैं यानी अमेरिका की बड़ी टेक कंपनियों के लिए काम करने के मौके होने के बावजूद यांग जिलिन ने चीन लौटने और अपने देश में AI कंपनी खड़ी करने का फैसला किया. आज Moonshot AI और उसके Kimi मॉडल्स ने उन्हें चीन के उभरते हुए प्रमुख AI चेहरों में शामिल कर दिया है.