IDBI Bank: भारत सरकार ने एक और बैंक में अपनी हिस्सेदारी बेचकर उसे विदेशी कंपनी के हाथों में सौंप दिया है. आज कैबिनेट ने IDBI बैंक की स्ट्रैटेजिक रिस्ट्रक्चरिंग के फैसले को मंजूरी दे दी. 14 अक्टूबर को केंद्रिय कैबिनेट ने IDBI के नए खरीदार के नाम पर मुहर लगा दी. कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद ये एयर इंडिया के बाद भारत सरकार का दूसरा सबसे बड़ा विनिवेश है.
बुधवार को केंद्रीय कैबिनेट ने बैंक की 60.72 फीसदी की हिस्सेदारी बेचने के फैसले पर मुहर लगा दी. सरकार ने फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स के हाथों बैंक की ये हिस्सेदारी बेच दी है. ये सौदा 52878 करोड़ रुपये में हुई है. हालांकि सरकार ने 3 साल तक बैंक का नाम नहीं बदलने की शर्त रखी है. मतलब फिलहाल फेयरफैक्स IDBI बैंक का नाम नहीं बदल पाएगा.
सरकार और LIC बैंक में अपनी 60.72% हिस्सेदारी बेचेंगे, जिसे कनाडाई अरबपति प्रेम वत्स की कंपनी 'फेयरफैक्स' खरीद रही है. इस डील के बाद सरकार और एलआईसी की हिस्सेदारी घटकर सिर्फ 34 फीसदी रह जाएगी. जिसमें से केंद्र सरकार के पास 15 फीसदी और बीमा कंपनी LIC के पास 19 फीसदी का शेयर होगा. जबकि अन्य के पास 5.28 फीसदी की हिस्सेदारी होगी. फेयरफैक्स के पास सबसे ज्यादा 60.72 फीसदी शेयर हैं और वो बैंक का सबसे बड़ा हिस्सेदार बन गया है.
IDBI बैंक में किसकी कितनी हिस्सेदारी?
बैंक को बेचने के लिए लंबे वक्त से प्रोसेस चल रहा था. 7 अक्टूबर 2022 से ही सरकार अपनी हिस्सेदारी कम करने की कोशिशों में लगी हुई थी. शुरुआत में 5 बड़ी कंपनियों ने बैंक को खरीदने में दिलचस्पी दिखाई. पेपर जांच के बाद रेस में सिर्फ 4 कंपनियां रह गई. कनाडाई कंपनी फेयरफैक्स ने सरकार के तय मूल्य से अधिक शेयर की कीमत लगाकर डील में अपनी बढ़त बना ली.
बैंक की हिस्सेदारी बिकने और सरकारी से प्राइवेट बनने के बाद उन लोगों के मन में सवाल है कि जिनका खाता इस बैंक में है. जिनका खाता इस बैंक में है, उनका क्या होगा? जिन्होंने इस बैंक से लोन लिया है, उन पर क्या असर होगा? बता दें कि बैंक के खाताधारकों पर इस डील का कोई असर नहीं होने वाला है. आपका पैसा, आपकी FD पूरी तरह सुरक्षित है.बैंक से लिए होम लोन, कार लोन, पर्सनल लोन की ब्याज दरों में भी कोई बदलाव नहीं होगा. यानी आपके लेनदेन पर इस डील को असर नहीं होगा. इस खबर के आने के बाद IDBI बैंक के शेयर रॉकेट बन गए. शेयर 82 रुपये से चढ़कर 90 रुपये से पार पहुंच गया.