अर्थव्यवस्था की रफ्तार रहेगी बरकरार, 6.5-7% GDP ग्रोथ का अनुमान, जेफरीज ने कमाई को लेकर किया बड़ा ऐलान
जेफरीज के मुताबिक, मजबूत घरेलू डिमांड और बैंक क्रेडिट के दम पर भारत की रियल GDP ग्रोथ 6.5-7% रह सकती है. हालांकि, बढ़ती एनर्जी कीमतें बड़ी चुनौती बनी हुई हैं.
India's GDP Growth : भारत चालू वित्त वर्ष में 6.5-7 प्रतिशत की रियल GDP ग्रोथ दर्ज करने की राह पर है. वहीं, नॉमिनल GDP ग्रोथ करीब 11-12 प्रतिशत रहने का अनुमान है. ये अनुमान ब्रोकरेज फर्म जेफरीज की ताजा रिपोर्ट में जताया गया है. जेफरीज के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 में कंपनियों की कमाई में करीब 14 प्रतिशत ग्रोथ का अनुमान है. ये अप्रैल 2027 से शुरू होने वाले वित्त वर्ष में बढ़कर 17 प्रतिशत हो सकती है.
बैंक क्रेडिट से आर्थिक गतिविधियों में मजबूती के संकेत
जेफरीज ने आर्थिक गतिविधियों की मजबूती के प्रमुख संकेतक के तौर पर बैंक क्रेडिट ग्रोथ को रेखांकित किया है. अगस्त के अंत तक बैंक क्रेडिट में सालाना आधार पर 19.1 प्रतिशत की ग्रोथ हुई है. वहीं, जुलाई में कॉरपोरेट लोन में 21.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई. माइक्रो, स्मॉल एंड मीडियम इंडस्ट्रियल एंटरप्राइजेज (MSME) को दिए गए कर्ज में 24.9 प्रतिशत की ग्रोथ हुई है. अगस्त में जमा राशि भी 17.8 प्रतिशत बढ़ी है.
जेफरीज के मुताबिक, SME लोन में तेजी इस बात का संकेत हो सकती है कि हालिया GST और श्रम सुधारों तथा कारोबार सुगमता बढ़ाने के प्रयासों का असर दिखाई देने लगा है. कॉरपोरेट लोन में बढ़ोतरी लंबे समय से प्रतीक्षित प्राइवेट सेक्टर के कैपेक्स साइकिल में संभावित सुधार की ओर भी इशारा करती है.
घरेलू मांग बनी हुई है मजबूत
ब्रोकरेज के मुताबिक भारत में घरेलू मांग अब भी मजबूत बनी हुई है. अगस्त में GST कलेक्शन में सालाना आधार पर 14.8 प्रतिशत की ग्रोथ हुई है. अप्रैल-अगस्त के दौरान बिजली की मांग ग्रोथ बढ़कर 9.4 प्रतिशत हो गई, जबकि जनवरी-मार्च में ये केवल 1.8 प्रतिशत थी. देश के 7 प्रमुख शहरों में जनवरी से जुलाई 2026 के दौरान आवासीय रियल एस्टेट बिक्री में सालाना आधार पर 7 प्रतिशत की ग्रोथ हुई है. इसके मुकाबले 2025 में बिक्री में 1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी.
जेफरीज का अनुमान है कि नॉमिनल GDP ग्रोथ में सुधार से कंपनियों की कमाई में भी तेजी आएगी और ये ग्रोथ मौजूदा वित्त वर्ष के अनुमानित 14 प्रतिशत से बढ़कर अप्रैल 2027 से शुरू होने वाले वित्त वर्ष में 17 प्रतिशत हो सकती है.
एनर्जी की कीमतें बनीं बड़ी चिंता
जेफरीज ने कहा कि भारत की आर्थिक संभावनाओं पर मिडिल ईस्ट में जारी घटनाक्रम और खासकर एनर्जी कीमतों का असर पड़ सकता है. रिपोर्ट के समय ब्रेंट क्रूड करीब 106 डॉलर प्रति बैरल पर था. प्रमुख तेल मार्गों में व्यवधान से एनर्जी बाजारों पर दबाव बढ़ रहा था. हालांकि, जेफरीज के मुताबिक भारत ने अब तक रूस से रियायती दरों पर कच्चा तेल खरीद जारी रखते हुए और अमेरिका से ऊर्जा आयात बढ़ाकर एनर्जी सप्लाई में बड़े व्यवधान से बचाव किया है. ब्रोकरेज का अनुमान है कि भारतीय रिजर्व बैंक 2026 के अंत तक रेपो रेट में 50 बेसिस प्वाइंट्स की बढ़ोतरी कर सकता है.