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Indian Economy: दुनिया में उथल-पुथल के बीच भारत की अर्थव्यवस्था कितनी मजबूत? GDP से UPI तक दिखी रफ्तार; ये आंकड़े दे रहे गवाही

टैरिफ और वैश्विक संकट के बीच भी भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है. GDP, GST, ऑटो बिक्री, UPI और विदेशी मुद्रा भंडार के आंकड़े तेज आर्थिक गतिविधियों की तस्वीर दिखा रहे हैं.

Indian Economy: दुनिया में उथल-पुथल के बीच भारत की अर्थव्यवस्था कितनी मजबूत? GDP से UPI तक दिखी रफ्तार; ये आंकड़े दे रहे गवाही

Indian Economy : दुनिया की अर्थव्यवस्था इस समय कई चुनौतियों से गुजर रही है. वेस्ट एशिया में तनाव, ग्लोबल ट्रेड को लेकर अनिश्चितता और टैरिफ की चुनौतियों के बीच भारत की अर्थव्यवस्था ने अपनी मजबूती बनाए रखी है. हाल में सामने आए कई अहम आर्थिक आंकड़े बताते हैं कि घरेलू मांग और आर्थिक गतिविधियों में तेजी बरकरार है.

वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में देश की GDP में 7.8% की ग्रोथ दर्ज की गई. वहीं, अगस्त में GST कलेक्शन करीब 2 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया है. ऑटोमोबाइल बाजार में भी तेज ग्रोथ देखने को मिली है. दूसरी ओर UPI ट्रांजैक्शन ने नया रिकॉर्ड बनाया और देश का विदेशी मुद्रा भंडार भी अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है यानी अर्थव्यवस्था के अलग-अलग मोर्चों से मिल रहे संकेत फिलहाल पॉजिटिव तस्वीर पेश कर रहे हैं.

GDP ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया

वित्त वर्ष 2026-27 की अप्रैल-जून तिमाही में भारत की अर्थव्यवस्था 7.8% की दर से बढ़ी है. खास बात ये है कि ग्रोथ ऐसे समय आई है, जब दुनिया के कई हिस्सों में जियो-पॉलिटिकल तनाव और व्यापार से जुड़ी अनिश्चितताएं बनी हुई हैं. घरेलू मांग ने आर्थिक गतिविधियों को सबसे बड़ा सहारा दिया. इसके अलावा मैन्युफैक्चरिंग, कंस्ट्रक्शन, सरकारी पूंजीगत खर्च और एक्सपोर्ट ने भी विकास दर को मजबूत रखने में योगदान दिया.

GST कलेक्शन लगातार तीसरे महीने दहाई में बढ़ा

अगस्त में सरकार को GST से 1,99,853 करोड़ रुपये मिले है. ये पिछले साल अगस्त के मुकाबले 14.8% ज्यादा है. अगस्त 2025 में GST कलेक्शन 1,74,116 करोड़ रुपये रहा था. घरेलू लेनदेन से मिलने वाला GST रेवेन्यू 9.3% बढ़कर 1.37 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है. वहीं, आयात से जुड़े GST राजस्व में करीब 29% की ग्रोथ हुई और ये 62,604 करोड़ रुपये रहा है.

इससे पहले जुलाई में GST कलेक्शन 15.4% और जून में 13.9% बढ़ा था यानी लगातार तीसरे महीने GST में दोहरे अंकों की ग्रोथ दर्ज हुई है.

कारों की बिक्री में जोरदार उछाल

देश का ऑटोमोबाइल बाजार भी मजबूत मांग का संकेत दे रहा है. अगस्त में थोक कार बिक्री सालाना आधार पर 36% बढ़कर करीब 4.48 लाख यूनिट पहुंच गई है. अप्रैल से अगस्त के बीच देश में 20.5 लाख से ज्यादा कारें बिकीं. ये पिछले साल की इसी अवधि से करीब 22% अधिक है. पिछले पांच वर्षों की तुलना में ये सबसे तेज ग्रोथ बताई जा रही है. डिमांड का यही रुझान जारी रहा तो वित्त वर्ष 2026-27 में भारत में पहली बार कारों की सालाना बिक्री 50 लाख यूनिट के पार जा सकती है.

UPI ने भी बनाया नया रिकॉर्ड

डिजिटल पेमेंट के मोर्चे पर भी भारत लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है. NPCI के आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त में UPI के जरिए 24.51 अरब ट्रांजैक्शन हुए है. ये पहली बार है जब एक महीने में UPI लेनदेन की संख्या 24 अरब के पार गई है. अगस्त में UPI के जरिए करीब 29.82 लाख करोड़ रुपये के भुगतान प्रोसेस किए गए हैं. पिछले साल अगस्त में 19.63 अरब ट्रांजैक्शन हुए थे. इस लिहाज से सालाना आधार पर लेनदेन की संख्या में करीब 22% की बढ़ोतरी हुई है. रक्षाबंधन जैसे त्योहारों के दौरान डिजिटल पेमेंट में आई तेजी ने भी इस रिकॉर्ड में योगदान दिया.

रिकॉर्ड लेवल पर विदेशी मुद्रा भंडार

भारत की बाहरी वित्तीय स्थिति के लिहाज से भी अच्छी खबर आई है. 21 अगस्त 2026 को समाप्त सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 12.422 अरब डॉलर बढ़कर 729.328 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया. इससे पिछले सप्ताह भी विदेशी मुद्रा भंडार में 9.905 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई थी. विदेशी मुद्रा भंडार का ये स्तर बाहरी झटकों से निपटने के लिहाज से भारत की स्थिति को मजबूत करता है.

पेट्रोल-डीजल की खपत में भी बढ़ोतरी

देश में आर्थिक गतिविधियों और खपत के संकेत पेट्रोल-डीजल की बिक्री से भी मिल रहे हैं. अगस्त में पेट्रोल की बिक्री पिछले साल की तुलना में 7.9% बढ़ी, जबकि डीजल की मांग में 6.5% की ग्रोथ दर्ज हुई है. एविएशन टर्बाइन फ्यूल यानी ATF की बिक्री भी इस दौरान 1.4% बढ़ी. ये आंकड़े बताते हैं कि परिवहन और आर्थिक गतिविधियों में मांग बनी हुई है.

पांच बड़े संकेत, जो बता रहे अर्थव्यवस्था की कहानी

अगर इन सभी आंकड़ों को एक साथ देखा जाए तो तस्वीर काफी स्पष्ट नजर आती है. GDP की 7.8% ग्रोथ, करीब 2 लाख करोड़ रुपये का GST कलेक्शन, कारों की बढ़ती बिक्री, 24.51 अरब UPI ट्रांजैक्शन और 729.328 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार-ये सभी अलग-अलग क्षेत्रों से आने वाले ऐसे संकेत हैं, जो भारतीय अर्थव्यवस्था में मजबूती दिखाते हैं. हालांकि, वैश्विक स्तर पर टैरिफ, जियो-पॉलिटिकल तनाव, ऊर्जा कीमतों और व्यापार से जुड़ी अनिश्चितताएं अभी भी चुनौती बनी हुई हैं. ऐसे माहौल में घरेलू खपत और निवेश का मजबूत रहना भारत की अर्थव्यवस्था के लिए अहम सहारा है.

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Gaurav Singh

Gaurav Singh

जी न्यूज में सीनियर सब-एडिटर हैं और वर्तमान में बिजनेस व फाइनेंशियल न्यूज कवर करते हैं.  देश की राजनीति से लेकर दुनिया के बनते-बिगड़ते सत्ता समीकरणों और घटनाओं को कवर कर चुके हैं  पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो UPTU से इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन किया है. उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाले गौरव ने अपने करियर की शुरुआत डिजिटल मीडिया से की और पिछले 6 वर्षों से लगातार इस क्षेत्र में सक्रिय हैं. आप गौरव सिंह से Gaurav.Singh@India.Com पर ईमेल के जरिए सीधे जुड़ सकते हैं. 
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