वेस्टर्न रेलवे के रतलाम डिवीजन ने कबाड़ की बिक्री करके अपनी कमाई में 27 करोड़ रुपये का भारी इजाफा किया है. स्क्रैप की बिक्री होने से रेलवे यार्ड में साफ-सफाई के साथ काफी जगह भी खाली हो गई है. रेलवे की तरफ से बिक्री किये गए कबाड़ में बेकार खड़े इलेक्ट्रिक इंजन के अलावा यात्री कोच भी शामिल थे. इस खबर के आने के बाद यही कहा जा रहा है कि रेलवे यात्रियों को सुविधा देने के साथ ही बेकार पड़े स्क्रैप को बेचकर बंपर कमाई भी कर रहा है. वेस्टर्न रेलवे के रतलाम डिवीजन ने यह मुकाम 'जीरो स्क्रैप कैम्पेन' के तहत हासिल किया है.
रतलाम डिवीजन की तरफ से करीब 5,000 मीट्रिक टन कबाड़ को नीलाम करके 26.96 करोड़ रुपये का रेवेनयू जुटाया गया है. इस कदम से रेलवे के खजाने में भारी रकम आने के साथ ही वर्कशॉप में बेकार पड़ी कीमती जगह भी खाली हो गई. इससे कर्मचारियों को आप साफ-सुथरा परिसर मिलेगा.
सफाई अभियान के दौरान रेलवे ने दो पुराने WAG-5 इलेक्ट्रिक इंजन, दो खराब पैसेंजर कोच, एक टॉवर वैगन और लोकोमोटिव केयर सेंटर के बेकार पड़े इंस्ट्रमेंट को नीलाम किया है. इसके अलावा रेलवे ट्रैक के आसापास पड़े खराब और गैर जरूरी सामान को हटाकर भी जगह खाली कर दी गई है.
डीआरएम अश्विनी कुमार और सीनियर डिवीजनल मैटेरियल मैनेजर अमीर यादव की देखरेख में इस अभियान को पूरा किया गया. 5,000 मीट्रिक टन कबाड़ हटने से रेलवे यार्ड और मेंटीनेंस सेंटर में काफी जगह खाली हो गई है. खाली हुई जगह का इस्तेमाल ऑपरेशनल कामों के लिए किया जाएगा.
वेस्टर्न रेलवे के पीआरओ मुकेश कुमार ने बताया कि इस अभियान के तहत गैर जरूरी सामान की पहचान करके उसकी नीलामी का प्रोसेस पूरे साल जारी रहेगा. इस तरह की नीलामी होने से रतलाम डिवीजन के सभी परिसरों को कबाड़ मुक्त और साफ-सुथरा बनाया जा सकेगा. इससे रेलवे की कमाई में भी बढ़ोतरी होगी.
वेस्टर्न रेलवे ने फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के दौरान 16 अक्टूबर तक करीब 320 करोड़ रुपये के कबाड़ की बिक्री की है. 'मिशन जीरो स्क्रैप' के तहत रेलवे का मकसद बेकार होने वाले सामान से रेवेन्यू जुटाना है. इसके लिए ने फाइनेंशियल ईयर 2027 के दौरान 500 करोड़ रुपये से ज्यादा की स्क्रैप बिक्री करने का टारगेट रखा है.